उन्हें समझ ही नहीं आ रहा कि वे आग से खेल रहे हैं!

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AAP के लिए ये जन समर्थन सिर्फ पंजाब में ही क्यों आया? देश के अन्य राज्यों में क्यों नहीं आया? मेरे लिए ये शोध का विषय था, तो मैंने चीज़ों को बड़ी बारीकी से देखना शुरू किया.

वो कौन लोग हैं जो AAP ज्वाइन कर रहे हैं? कौन इनके think tank हैं? Main stream media इनके बारे में क्या लिख रहा है? Social media में इनके मुखर समर्थक कौन लोग हैं?

अंदर झाँकने पर मुझे बड़ी भयावह तस्वीर दिखाई दी!

सबसे पहला बयान जिससे मैं चौकन्ना हुआ वो पंजाब पुलिस के Ex DGP शशिकांत का था जो उसने पटियाला की एक जनसभा में दिया था 2013 में!

उसमें उसने कहा कि संत जरनैल सिंह भिंडरांवाले तो एक संत, एक सोशल reformer थे और उनके रहते किसी की ये औकात नहीं थी कि drugs का सेवन कर लेता!

ये बयान पढ़ कर मेरे कान खड़े हो गए… एक आपिया, एक दुर्दांत खालिस्तानी आतंकवादी का गुणगान कर रहा है?

फिर मैंने पूरे घटनाक्रम को इसी एंगल से देखना शुरू किया. UK और Canada में बैठे खालिस्तानियों की Fb वाल खंगालनी शुरू की. देखा कि AAP को पूरा जनसमर्थन और funding तो खालिस्तानियों से आ रही है.

AAP के जनसमर्थन को समझने के लिए आपको पहले पंजाब की Socio Economic दशा-दिशा को समझना पड़ेगा…

पंजाब दरअसल एक किस्म का उन्नत बिहार है, जैसे बिहारी दिल्ली, मुम्बई, सूरत और लुधियाना में आप्रवासी मजदूर बन के जीवन यापन करता है, वैसे ही पंजाबी इंग्लैंड, अमेरिका, कनाडा, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया में जा के आप्रवासी मजदूर बन के कमाता है.

बिहारी अपने गाँव में बैठी पत्नी, माँ-बाप को मनी आर्डर भेजता है तो पंजाबी Western Union से.

पंजाबी बिहारी को नफरत से देखता है और इनको ”साला भइया” बोलता है, तो England अमेरिका वाले इन पंजाबियों को “देसी” बुलाते हैं.

पंजाबियों को मलाल रहता है कि साले बिहारियों ने आ के पंजाब गंदा कर दिया, slums में रहते हैं, ठीक उसी तरह वहाँ अंग्रेज इनको गरियाते हैं कि साले पंजाबियों ने आ के इंग्लैंड गंदा कर दिया. जिस मोहल्ले में बहुत ज़्यादा पंजाबी रहते हैं, अंग्रेज वहाँ रहना पसंद नहीं करते.

कहने का मतलब ये कि बिहारी और पंजाबी दोनों मूलतः आप्रवासी मजदूरी करने वाली कौमें हैं (बिहारी से मेरा आशय हमेशा पूर्वांचल से रहा है, मतलब anything beyond Lucknow)

तो मामला ये है कि यहां पंजाब में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां का लड़का कहीं विदेश में मजदूरी ना कर रहा हो और western Union से पैसा न भेजता हो.

अब भैया जो मनी आर्डर भेजता है, उसकी बात तो सुननी/माननी पड़ेगी ना?

और उसकी समस्या ये है कि वो वहाँ England और Canada में खालिस्तानियों से घिरा है, उनके influence में है.

उसे वहाँ दिन-रात खालिस्तान का सपना दिखाया जाता है, गुरुद्वारों में तकरीरें सुनाई जाती हैं कि कैसे वहाँ पंजाब में सिख हिंदुओं की गुलामी कर रहे हैं और ये कि 1947 में नेहरू ने सिखों को धोखा दिया और खालिस्तान बनाने के वादे से मुकर गए.

कहने का अर्थ ये कि NRI वहाँ जा के कब खालिस्तानी हो जाता है, उसे पता ही नहीं चलता.

तो 2013 में कनाडा UK में बैठे खालिस्तानियों को ये समझ आ गया कि एक ये नयी पार्टी आ गयी है जिसे पंजाब में मोहरा बनाया जा सकता है.

और फिर अचानक ही रातों रात सभी NRI (कृपया खालिस्तानी पढ़ें) आपिये बन गए. और उनकी देखा देखी सारा पंजाब आपिया बन गया.

आज भी आप यहां पंजाब आ के देख लीजिए, पंजाब का ये विधान सभा चुनाव यहां से नहीं बल्कि कनाडा और UK से लड़ा जा रहा है. 50,000 से ज़्यादा NRI (खालिस्तानी) छुट्टी ले के आये हुए हैं.

वहाँ विदेश में बाकायदा विधानसभा वार चुनाव (War room) दफ्तर बनाये हुए हैं जहां बैठे volunteers यहां बैठे लोगों को फोन कर AAP को वोट देने की अपील कर रहे हैं, Fb और whatsapp पे हज़ारों-हज़ारों group और pages बनाये गए हैं.

दरअसल विदेश में बैठे खालिस्तानियों ने बहुत पहले मतलब 1994–95 में ही ये समझ लिया था कि पंजाब में कांग्रेस और अकाली-भाजपा दोनों ही उनकी दाल नहीं गलने देंगे.

ऐसे में उनको केजरीवाल और इसकी AAP में एक संभावना दिखती है. पर एक बात ये भी तय है कि चुनाव बाद वहाँ बैठे खालिस्तानी इनसे बाकायदे इस समर्थन की कीमत वसूलेंगे.

फिलहाल report ये है कि पंजाब के मालवा belt में AAP का जोर है. पिछले एक हफ्ते में इनकी स्थिति में बहुत सुधार हुआ है.

खालिस्तानियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, पर मेरे पंजाबी भाई समझ नहीं रहे कि वो आग से खेल रहे हैं.

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया ऑनलाइन (www.makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया ऑनलाइन के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया ऑनलाइन उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.

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