एक खुला पत्र भारत के प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी के नाम

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narendra modi open letter from pushkker awasthi
पुष्कर अवस्थी नरेन्द्र मोदी

आदरणीय नरेंद्र मोदी जी,
प्रधान मंत्री
भारत सरकार
नई दिल्ली

विषय: राष्ट्र द्रोह की गतिविधियों में संलिप्त संगठनों और व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही में शिथिलता पर शंका

महोदय,

मैं राष्ट्र के प्रति समर्पित, भारत का एक नागरिक हूँ और मुझे आपकी राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता पर उतना ही विश्वास है, जितना मुझे कल सुबह, सूर्य का पूरब दिशा से उदय होने का विश्वास है. आप के भारत के भविष्य के प्रति विश्वास पर, 2014 के लोकसभा के चुनाव में, हम लोगों ने विश्वास कर के, भारत के साथ साथ, अपने भविष्य के लिए, आपका भारत के प्रधानमन्त्री पद के लिए अवाहन किया था और सत्तारूढ़ होने पर आपका स्वागत किया था.

अभी तक, भारत को आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक रूप से सबल बनाने के लिए, आपकी सरकार ने, दूरद्रष्टि रखते हुए, दूरगामी परिणामों के लिए जो भी कदम उठाये हैं, उसके लिए आपको साधुवाद है. लेकिन इसके साथ ही मैं आपको एक सलाह भी देना चाहता हूँ. हालाँकि मुझे पूर्ण विश्वास है की जिस तरफ मैं आपका ध्यान खींचना चाहता हूँ, उस पर आप, अपने तरीके से काम कर रहे होंगे लेकिन एक जिम्मेदार और सजग नागरिक होने के नाते, मेरा कर्तव्य है कि अपनी बात जरूर रखूँ.

महोदय, आपने अपने 32 महीने के कार्यकाल में यह तो अनुभव कर ही लिया होगा कि कांग्रेसियों, वामपंथियों, समाजवादियों, आपियों, ज्यादातर मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लिए आप सबसे घृणित व्यक्ति है. इस वर्ग में इस घृणा का भाव, उनके राजनैतिक रूप से अप्रसांगिक होने के भय से उत्पन्न हुआ है. इन लोगों ने इस भय को समाप्त करने के लिए आज राष्ट्र विरोधी ताकतों से, भारत की अस्मिता और अखण्डता से समझौता तक कर लिया है.

मोदी जी, कोई भी राष्ट्र अपनी संप्रभुता, अपने नागरिकों के बेवकूफ और महत्वकांक्षी हो जाने के बाद भी बनाये रख सकता है लेकिन भीतरघातियों की उपस्थिति में राष्ट्र अपनी संप्रभुता बनाये रखने में सफल नहीं हो सकता है. आज भारत की सीमा पर खड़ा भारत का शत्रु चाहे कितना भी शक्तिशाली हो उससे भारत निपटने में सक्षम हो सकता है क्यूंकि वह सामने है और सीमा के पार से आ रहा है लेकिन देश द्रोही से निपटने में भारत सक्षम है इस पर फिलहाल प्रश्न चिन्ह लगा है.  मुझे मालूम है यह विषम स्थिति है क्यूंकि राष्ट्रद्रोही  भारत का ही नागरिक है और वह आसानी से जनमानस में घुला मिला रहता है. वह लोगों से, लोगों की भाषा में, उनके स्वाभाविक आशंकाओं, महत्वाकांक्षाओं, स्वार्थ और स्थिरता के प्रति मोह को, मित्र बनकर, उद्वेलित करता है.

मोदी जी, हमारा जनमानस 1000 साल से गुलाम था और आज भी आज़ाद हो कर भी गुलाम है, इसलिए भीरुता और हीनता उसकी नसों में खून बन कर दौड़ रही है. राष्ट्रद्रोही इन्ही आज़ाद गुलामो की भीड़ में गुमनाम बन कर, अफवाहे फैला कर, समाज में अस्थिरता लाता है. राष्ट्रद्रोही, लोगों के डर से मित्रता करता है और उनके डर को अपना हथियार बनाता है.

वो राष्ट्र को, राष्ट्र के नागरिकों की मानवीय कमजोरियों से ही, अंदर से सड़ाता है. यह बढ़ती हुयी सड़ांध, धीरे धीरे राष्ट्र की संवैधानिक व्यवस्थाओं को कमजोर करने लगती है और फिर एक दिन वह आता है जब लोकतंत्र का चौथा खम्भा, पत्रकारिता, राष्ट्रद्रोहियों के लिए एक अस्त्र बन जाता है. और फिर एक समय ऐसा आता है कि राष्ट्र की राजनैतिक इच्छा शक्ति और व्यवस्था चरमरा जाती है. मोदी जी, यह याद रखियेगा की एक राष्ट्र के लिए, एक मदांध हत्यारे का बच जाना, एक राष्ट्रद्रोही के जीवित बच जाने से लाख गुना श्रेष्ठ होता है.

मोदी जी, हम आखिरी मुकाम पर है, जहाँ भारत के चौथे खम्बे ने राष्ट्रद्रोहियों की अधीनता स्वीकार कर ली है. विदेश यात्राओं, संसद का न चलने देना, अवार्ड वापसी, अख्लाख़, मालदा, रोहित, कश्मीर, केरला, बंगाल होते हुए खालिस्तानियों के सर उठाने तक की घटनाओं ने यह साफ़ कर दिया है कि आज विपक्ष दिवालिया हो चुका है और ज्यादातर भारत का मिडिया और बौद्धिक जमात, राष्ट्रविरोधी हो चुका है. मोदी जी यह युद्ध काल है, इससे पहले कोई राष्ट्र भक्त इन राष्ट्रद्रोही के खिलाफ अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर कोई कार्यवाही कर दे, मोदी जी एक प्रधानमंत्री के रूप में जरुर कोई निर्णय ले लीजियेगा.

मोदी जी, मैं अंत में अपनी बात समाप्त करते हुए, अपने आदर्श ‘अब्राहम लिंकन’ के एक कथन को आपकी दुविधा को समाप्त करने के लिए उद्धृत करना चाहूंगा.

“Congressmen who willfully take action during wartime that damages morale and undermine the military are saboteurs and should be arrested, exiled, or hung”
― Abraham Lincoln

“कोई भी कांग्रेसमैन(सांसद या विधायक) जान बूझ कर युद्ध कालीन स्थिति में ऐसा करता है जिससे आत्मविश्वास टूटता है और सैन्य बल के मनोबल को चोट पहुँचती है वह आतंकी है और उसे गिरफ्तार या देश निकाला या फिर फांसी में चढ़ा देना चाहिए.”

आपका शुभचिंतक भारतीय
पुष्कर अवस्थी

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5 COMMENTS

  1. दद्दा,

    साधुवाद आपको ।

    ये थी जन-मानस के “मन की बात “.

    सादर ।

  2. 100% agreeable write up by Awasthi ji. Nothing should come in between performing Rashtradharm and Rajdharm. The countrymen have full faith in You Mr. PM and hue and cry from some is because of their gradual weakening due to the significant increase in the stature of our country at world level. So, worry not and move on with the full faith that the countrymen have reposed on you. But one and only request to you is act impartially without any cast and creed. Dare to take severest action against those who commit the blunder and spread hatred in our unique society and later on feel sorry.
    Jai Hind Jai Bharat.
    Thanks.

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