हमें खालिस्तानी सरकार नहीं चाहिए

हिंदुस्तानी मुसलमान की एक खासियत है… जहां बीजेपी मुकाबले में हो, वो किसी को जिताने के लिए वोट नहीं करता बल्कि बीजेपी को हराने के लिए वोट करता है.

वो मतदान से एक शाम पहले तय करता है कि भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ लड़ाई में कौन सबसे आगे है.

सपा है, कि बसपा, या फिर कांग्रेस…. जो सबसे मज़बूत है उसे वोट दे दो. किसी के प्रति कोई प्रतिबद्धता नहीं….

न कोई धार्मिक प्रतिबद्धता, न कोई जातीय प्रतिबद्धता, न राष्ट्र के प्रति…. विकास के एजेंडा से भी कोई मतलब नहीं….

वोट का एकमात्र उद्देश्य भाजपा को हराना… चुनावी लोकतंत्र में इसे Negative Vote कहा जाता है.

हिन्दू ऐसे वोट नहीं करता.

हम लोग अपने कैंडिडेट और अपनी पार्टी को जिताने के लिए वोट देते हैं.

मैं अक्सर लिखता हूँ, कि आखिर मोदी जी से हमारा क्या रिश्ता है? क्या जुड़ाव है?

हम यूपी के…. वो गुजरात के. हम ठाकुर, वो जात के तेली….

यूपी के यादवों का मुलायम अखिलेश से क्या जुड़ाव है?

सिवाय जातिवाद के, ऐसी कौन सी वैचारिक प्रतिबद्धता है जो यादवों को समाजवादी पार्टी से जोड़ती है?

और यूपी के सवर्ण, बाभन, ठाकुर, भुइंहार मोदी भक्त क्यों हैं?

इसके दो कारण है…. संघ की विचारधारा और मोदी जी का विकास का एजेंडा.

आजकल यूपी के सवर्ण, एक गुजराती तेली के भक्त हैं. एक ज़माना था जब कि हम पश्चिम के एक लोधी कल्याण सिंह के भक्त थे…. क्यों?

क्योंकि हम कल्याण सिंह की प्रशासनिक क्षमता के कायल थे. उनसे हमारा कोई जातिवादी जुड़ाव नहीं था.

कारण जो भी हों, हिन्दू आमतौर पे positive वोट करता है… अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए वोट करता है.

हिंदुओं द्वारा negative वोट की खबरें यदा-कदा इक्का-दुक्का ही आती हैं.

इस से पहले दिल्ली में जब विस चुनाव हुए तो कांग्रेस ने मोदी का विजय रथ रोकने के लिए अपना वोट AAP को डलवाया और 22% vote share से 8% पे आ गयी. नतीजा ये हुआ कि आप 67 सीटें जीत गयी.

आज पंजाब में हमारे सामने ये सवाल आन खड़ा हुआ है कि हम किसको वोट करें? अकाली भाजपा को जिताने के लिए वोट करें या फिर AAP को हराने के लिए वोट करें?

जिस आक्रामक तरीके से खालिस्तानी AAP का समर्थन कर रहे है और पिछले 10 दिनों में AAP ने पंजाब में बढ़त बनायी है, पंजाब में AAP के सत्ता में आने का खतरा पैदा हो गया है.

पंजाब एक बेहद संवेदनशील राज्य है, बॉर्डर स्टेट है, पाकिस्तान की सीमा से सटा राज्य है, पाकिस्तान की ISI के निशाने पे आज से नहीं बल्कि पिछले 35 साल से है….

इतने संवेदनशील सीमावर्ती राज्य में एक खालिस्तान समर्थक पार्टी का सत्ता में आना बेहद खतरनाक है.

कांग्रेस का रिकॉर्ड अन्य मामलों में बेशक खराब हो, पर यहां पंजाब में खालिस्तानी तत्वों को कुचलने और उन्हें पंजाब में पनपने न देने के मामले में उनका रिकॉर्ड साफ़ सुथरा है.

पंजाब में हमारे सामने 3 विकल्प हैं. अकाली-भाजपा, कांग्रेस या फिर AAP… हमारी रणनीति ये होनी चाहिए कि AAP को हराना है… चाहे जिसे वोट देना पड़े.

हमें खालिस्तानी सरकार नहीं चाहिए. पंजाब में AAP को हराने के लिए वोट दीजिये. बेशक कांग्रेस को देना पड़े.

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