एयरसेल-मैक्सिस मामले में पूर्व टेलिकॉम मंत्री मारन आरोप-मुक्त

नई दिल्ली. एयरसेल-मैक्सिस मामले में पूर्व केंद्रीय टेलिकॉम मंत्री दयानिधि मारन को उनके भाई व अन्य आरोपियों सहित एक स्थानीय अदालत ने आरोप-मुक्त कर दिया.

दयानिधि मारन के साथ उनके उद्योगपति भाई कलानिधि मारन एवं अन्य को एयरसेल-मैक्सिस करार के मामलों, जिनकी जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से की गई थी, से आरोप-मुक्त कर दिया.

अदालत ने कहा कि उन पर सरकारी फाइलें गलत पढ़कर, अटकलबाजियों और शिकायतकर्ता की शंका के आधार पर आरोप लगाए गए थे .

विशेष सीबीआई न्यायाधीश ओ पी सैनी ने कहा कि रिकॉर्ड पर लाई गई सामग्रियों के आधार पर किसी भी आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया ऐसा कोई मामला नहीं बनता जिससे उनके खिलाफ आरोप तय किए जा सकें.

मनी लॉनड्रिंग मामले के बाबत अदालत ने कहा कि चूंकि आरोपियों को सीबीआई की ओर से दर्ज अनुसूचित अपराध के मामले में आरोप-मुक्त कर दिया गया, इसलिए ईडी की ओर से दर्ज मामला आधारहीन हो गया और अब इसमें कुछ नहीं बचा.

न्यायाधीश ने कहा, मैं संतुष्ट हूं कि (सीबीआई का) पूरा मामला सरकारी फाइलों को गलत पढ़ने, गवाहों के विरोधाभासी बयानों, अटकलबाजियों और शिकायतकर्ता सी. शिवशंकरन की शंकाओं पर आधारित है. मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं कि प्रथम दृष्टया किसी आरोपी के खिलाफ कोई ऐसा मामला नहीं बनता कि उनके खिलाफ आरोप तय किए जाएं.

ईडी के मामले में आरोपियों को आरोप-मुक्त करते हुए न्यायाधीश ने कहा, अनुसूचित अपराध के मामले में आरोपियों के आरोप-मुक्त कर दिए जाने के मद्देनजर मैं संतुष्ट हूं कि यह मामला आधारहीन हो गया और इसमें अब कुछ नहीं बचा. लिहाजा, सभी आरोपियों को आरोप-मुक्त करने का आदेश दिया जाता है और वे आरोप-मुक्त हैं.

उल्लेखनीय है कि सीबीआई ने वर्ष 2014 में दयानिधि मारन, उनके मीडिया मुगल कहे जाने वाले भाई कलानिधि मारन तथा मलेशियाई बिज़नेसमैन टी. आनंद कृष्ण पर एयरसेल पर काबिज होने में मैक्सिस की मदद के लिए मिलीभगत करने का आरोप दायर किया था.

उस समय चेन्नई की कंपनी एयरसेल के मालिक सी. शिवशंकरन थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि टेलीकॉम मंत्री के रूप में दयानिधि मारन ने दबाव बनाने के लिए उनकी कंपनी को दी जाने वाली अहम मंज़ूरियों को तब तक रोककर रखा था, जब तक उन्होंने कंपनी को वर्ष 2006 में मैक्सिस को बेच नहीं दिया.

सीबीआई का कहना है कि सौदा हो जाने के बाद 700 करोड़ रुपये ‘गैरकानूनी तुष्टीकरण’ के रूप में सन समूह के ज़रिये मारन बंधुओं को दिए गए, जो एक टीवी चैनलों और सैटेलाइट टीवी सेवाएं देने वाला मीडिया ग्रुप है, और जिसके मालिक दयानिधि मारन के अरबपति भाई कलानिधि मारन हैं.

मारन बंधुओं तथा मैक्सिस के मालिक के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र रचने का भी आरोप लगाया गया था. इन तीनों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने मनी-लॉन्डरिंग के लिए अलग से केस दर्ज किया था.

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