एक ज्योतिषी की भविष्यवाणी : तुम्हरी गत मत तुम्हीं जानी, नानक दास सदा कुर्बानी

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ज्योतिषियों के विषय में लोगों में जो सबसे बडी गलतफहमी है वो ये है कि लोग उन्हें त्रिकालज्ञ मानते हैं और ऐसा सोचते हैँ कि जैसे ही उसने कोई कुण्डली उठाई वैसे ही वह उस कुण्डली का भूत, वर्तमान और भविष्य सब देख लिया. पर वास्तव में ये सम्भव ही नहीं है. सबसे पहली बात, किसी जन्मपत्री को दस मिनट में देखी ही नहीं जा सकती. प्रत्येक कुण्डली में इतनी गहराई होती है कि जिंदगी भर उसे देखा जाये फिर भी वो पूरी नहीं होती है.

आज इस विषय पर इसलिए लिख रहा हूँ कि कुछ समय पहले दो बहुत दुखद घटना मेरे सामने से गुजरी. मैं प्रोफेशनल ज्योतिषी नहीं हूँ पर इस विषय पर वर्षों शोध किया हूँ, ज्योतिष की एक नहीं अनेकों विधाओं पर काम किया हूँ. जल्दी किसी की कुण्डली नहीं देखता पर जब देखता हूँ घंटों डूबकर देखता हूँ. इस कारण मेरे मित्र और परिचित, अपनी कुण्डली चाहे कहीं दिखाएं, उनकी हार्दिक इच्छा होती है कि भाई एक बार कन्फर्म कर दे तो पक्का हो जाए.

इन्हीं कारणों से अंकित भाई भी मेरे पास आये थे कि IAS/PCS में होगा या नहीं कन्फर्म कर दीजिए. मैंनें घंटों मगजमारी करके कहा कि – Your success is as certain as death. अर्थात आपको सफलता अवश्य मिलेगी. उसके बाद उनसे बहुत दिनों से मेरा सम्पर्क नहीं रहा. अभी तीन-चार दिन पहले एक मित्र ने बताया कि अंकित भाई का UP में SDM में सेलेक्शन हो गया था पर एक महीना बाद ही वे कैन्सर से मर गए. मैं तब से बहुत विचलित हूँ.

मैं दुखी हूँ मित्र कि आप मेरे सामने बैठे थे और मैं ये देख नहीं पाया कि आप अल्पायु हैं. लेकिन यही सच्चाई है कि कोई ज्योतिषी एक बार में एक ही दिशा में गहराई मे उतर सकता है. एक ज्योतिषी से जब हम कोई सवाल करते हैं और वह उसका ईमानदारी से जवाब देता है वहीं उसकी जिम्मेदारी खत्म हो जाती है. हर प्रश्न के लिए उसे नये सिरे से कुण्डली में डूबना होता है, उसे भविष्य के अनंत प्रश्नों के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि कोई भी ज्योतिषी भगवान नहीं होता.

अंत में सबसे महत्वपूर्ण बात कि यदि किसी अटल भावी को ईश्वर न दिखाना चाहे तो किसकी मजाल है कि उसे देख ले. भगवान ने जब अर्जुन को अपना विराट रूप दिखाया, तो उसने अनेकों महारथियों को मरके भगवान के मुँह में समाते हुए देखा. लेकिन वह अपने लाडले पुत्र अभिमन्यु को ईश्वर के मुँह में जाते हुए नही देख पाया क्योंकि भगवान ने उसे देखने ही नहीं दिया. यदि वह देख लेता तो युद्ध करने से मना कर देता.

तुम्हरी गत मत तुम्हीं जानी,
नानक दास सदा कुर्बानी.

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