उम्मीद है ये भी समझ गए होंगे पहले पंजे का असर

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पुराने ज़माने की बात है. कहते हैं जब राजा अन्यायी हो तो राज्य में सूखा-अकाल ज्यादा पड़ते हैं. भारत में भी चर्च का इनक्वीजीशन (inquisition) चल रहा था, फिरंगी शासन था तो कहीं सूखा कहीं अकाल!

अब गावों से लोग तो शहरों की तरफ पलायन कर ही रहे थे, पेट-परिवार पालने के लिए सर पर मल ढोने जैसा काम भी स्वीकार कर रहे थे, वहीँ जंगलों में भी बुरा हाल था.

इंसानों जैसा पलायन भी जानवरों के लिए आसान ना था. जंगल सूखने से हिरणों और अन्य शाकाहारी पशुओं की आबादी तेजी से कम होने लगी. उनके कम होने से शिकारी पशुओं के लिए भी शिकार करना आसान नहीं रहा.

शेर को भी खाने की कमी पड़ने लगी, भेड़िया और लोमड़ी को तो और आफत हो गई. वो जरा कमजोर भी थे, तो उनके लिए शिकार ढूंढना और मुश्किल था.

अब लोमड़ी थी चतुर, तो वो पहले तो गई भेड़िये के पास. उसने भेड़िये को सिखाया कि अगर हम मिलकर शिकार करें तो एक ही शिकार में हम सबका काम भी हो जायेगा. जो शिकार मारने में आसानी होगी सो अलग.

तो दोनों पहुंचे शेर के पास और उसे अपनी योजना समझाई. शेर ने भी कहा ठीक है और तीनों मिलकर शिकार करने चल पड़े. एक तरफ से भेड़िये ने घात लगाया, एक तरफ लोमड़ी छुपी और एक ओर शेर.

जैसे ही लोमड़ी और भेड़िये ने हिरणों के झुण्ड को खदेड़ा शेर के हाथ आसानी से एक शिकार लग गया. अब मारे गए हिरण के बंटवारे की बात आई तो शेर ने भेड़िये को बंटवारे के लिए कहा.

भेड़िया बोला लोमड़ी ने भाग दौड़ की है तो हिरण की पतली टांगे उसकी, आप राजा हो तो सर आपका, बाकी जो धड़ बचा, वो मैं खा लूँगा. शेर को समझ आ गया ये बाकि को भूखा रखकर खुद मौज उड़ाने के फेर में है.

उसने एक पंजा भेड़िये को धर दिया. जैसे ही भेड़िया निपटा तो शेर ने कहा, लोमड़ी तुम बंटवारा करो अब. भेड़िये का हाल देख कर लोमड़ी समझदार हो गई थी.

उसने कहा हुज़ूर अब सिरमौर आप हैं, तो सर आपका, हमारा पेट आप पालते हैं, इसलिए पेट भी आपका, प्रजा के लिए आपको भागदौड़ करनी होगी, तो आपकी टाँगे मजबूत होनी चाहिए इसलिए टाँगे भी आपकी. मेरा क्या है ? मैं भेड़िये से काम चला लेती हूँ !

इधर जिन्हें मुस्लिम देश कहते हैं उन्होंने, खुद कभी किसी शरणार्थी को मुसलमान होने के नाम पर मदद नहीं दी.

सीरिया के शरणार्थी बह रहे थे तो भी उन्हें लेने से इंकार कर दिया. लेकिन अपने लिए उन्हें गैर मुस्लिम, बल्कि मुसलमानों के हर दर्द का जिम्मेदार अमरीका में ही शरण चाहिए, जो कि अपने आप में ही एक दोहरापन है.

ऐसी उल्टी बात का समर्थन करने चले थे नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रम्प के अटॉर्नी जनरल सेल्ली येट्स. तो जनाब पहला पंजा उन्हें ही पड़ गया है.

बाकी एक हमारे प्रधानमंत्री भी हैं, बिलकुल शुरू में ही अपने इरादे स्पष्ट कर देना क्या होता है, वो इस घटना को देखकर, उम्मीद है उन्हें भी समझ आया होगा

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