जिन्हें पॉपकॉर्न खाते हुए सिर्फ फिल्म देखने से मतलब है वो इसे बिलकुल ना पढ़ें

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आप आशु परिहार को जानते हैं? नहीं जानते होंगे… क्योंकि, आप किसी डॉक्टर नारंग को भी नहीं जानते, न ही आप किसी कमलेश तिवारी को जानते हैं.

आप लाखों कश्मीरियों को नहीं जानते, उन सैकड़ों बंगालियों को नहीं जानते, असम, नगालैंड, पूर्वात्तर भारत के हज़ारों आदिवासियों को नहीं जानते, जो अब आपका हिस्सा नहीं रहे हैं.

आप अपने धर्मग्रंथों को नहीं जानते, अपने रीति-रिवाजों से अनभिज्ञ हैं, आपको अपनी परंपराओं पर शर्म आती है.

आप लव-जेहाद को नहीं जानते, जबरन धर्म-परिवर्तन को नहीं जानते और आप एकतरफा होनेवाले अन्याय-अत्याचार को तो बिल्कुल ही नहीं जानते.

आप रामायण-महाभारत को नहीं जानते, गीता-उपनिषद को नहीं जानते, आप जानते हैं कि ये कपोल गाथाएं हैं…

आप अपने महानायकों को नहीं जानते, अपने पुरखों को नहीं जानते, अपनी माटी को नहीं जानते.

आप नहीं जानते, क्योंकि आप ‘सेकुलर’ हैं.

आप संजय लीला भंसाली को पड़नेवाले थप्पड़ को जानते हैं, हाजी आमिर की बीवी के डर को जानते हैं…

सुशांत सिंह राजपूत अपनी जाति को जानते हैं, आप असहिष्णुता को जानते हैं, आप सैकड़ों बार दुहराये गए झूठ को जानते हैं.

आप शार्ली एब्दो को नहीं जानते, आप मुहम्मद के बनाए फोटो को नहीं जानते, आप एम एफ हुसैन को नहीं जानते, जो आपकी मां की नंगी तस्वीरें बना कर अमर हो गया, पर अपनी मां और फातिमा को जिसने सिर से पांव तक कपड़ों में ढंके रखा.

आप चौतरफा हो रहे प्रहार को नहीं जानते, क्योंकि आप सिनेमा में डूबे हैं, पीके और बजरंगी भाईजान से दंगल तक किस subtle तरीके से आपसे आपके अतीत को छीना जा रहा है, यह भी आप नहीं जानते, क्योंकि आप इन फिल्मों को करोड़ों रुपए कमा कर देने में व्यस्त हैं.

आप तसलीमा को नहीं जानते, सलमान रुश्दी को नहीं जानते, लेकिन आप यू आर अनंतमूर्ति को जानते हैं, आप उस कलबुर्गी की हत्या को लेकर जरूर बैकफुट पर आ जाते हैं, जिसकी हत्या से आपको कोई लेना-देना नहीं है.

आप आशु परिहार को भी नहीं जानते… क्योंकि वह 20-22 वर्ष की एक युवा ‘हिंदू’ लड़की है, जो बंगाल में हो रहे दंगों पर, अपने भाई-बहनों की हत्या पर और उस पर सरकारी चुप्पी पर आहत थी.

अपने गुस्से को उसने कविता का स्वरूप दिया, जिसमें उसने मुहम्मद का भी उल्लेख किया.

यही उसका कसूर था. इसके बाद हज़ारों मोहम्मडन ने उसकी वॉल पर जाकर भद्दी-भद्दी गालियां और धमकियां दीं. कई जगह उसपर मुकदमे किए गए.

उसकी मां और बहन से अवैध संबंध कायम करने (गलीज से गलीज भाषा में) की धमकी वाले पेज भी बना दिए गए (थोड़ा गूगल करिए, दिख जाएगा), यहां तक कि घबराकर लड़की ने माफी भी मांग ली.

राष्ट्रवादी सरकार महाराष्ट्र की पुलिस उसे खोजती दिल्ली आ गयी. उसे खुलेआम बलात्कार और हत्या की धमकी देनेवाले मोहम्मडन को कुछ नहीं कहा गया, पर……..

आप अब क्या करेंगे? लंबी सांस लेंगे या मुझे गरिया देंगे – कम्युनल एनटाइसिंग के लिए.

शाम को पॉपकॉर्न के साथ बैठकर कोई हिंदी फिल्म देखेंगे (पीके टाइप), जहां आपके आराध्यों का मज़ाक उड़ाया जाएगा, आपके भगवानों की खिल्ली उड़ेगी और आप हंसते हुए पॉपकॉर्न खाएंगे…

है न….???

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