मनमोहन सरकार की नाक में दम कर देने वाले राय बने BCCI चीफ

नई दिल्ली. यूपीए शासन के दौर में उसके हर घोटाले पर कड़ी नज़र रखने वाले पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय को बीसीसीआई का नया मुखिया बना गया है.

लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को मानने में आनाकानी करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई चीफ अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को पद से हटा दिया था.

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में जन्में विनोद राय ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में मास्टर डिग्री हासिल की है. उन्होंने यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार के दौरान कई घोटालों का पर्दाफाश किया था.

राय ने ही यूपीए- 2 की सरकार के दौरान कोयला घोटाले और 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले को उजागर किया था. इस घोटाले में कई कंपनियों को निजी फायदे के लिए गलत तरीके से कोल ब्लॉक का आवंटन किए गए थे.

उम्मीद है कि राय बीसीसीआई को पटरी पर लाने की कोशिश करेंगे. हो सकता है कि बीसीसीआई का कोई बड़ा घोटाला ही उजागर कर दें.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के संचालन की कमान पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय के नेतृत्व वाले प्रशासकों की समिति को सौंप दी. यह समिति ही क्रिकेट की इस धनाढ्य संस्था में सुधार के लिये न्यायालय द्वारा मंजूर न्यायमूर्ति आर एम लोढ़ा समिति की सिफारिशें भी लागू करेगी.

राय के साथ बीसीसीआई प्रशासकों में क्रिकेट के इतिहासकार रामचंद्र गुहा, आईडीएफसी के प्रबंध निदेशक विक्रम लिमये और भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान डायना एडुल्जी को शामिल किया गया है जो इस संस्था के कामकाज के बारे में बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल जौहरी से बातचीत करेंगे.

विक्रम लिमये और अमिताभ चौधरी BCCI की ओर से आईसीसी की बैठक में शामिल होंगे, साथ ही बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी भी इस बैठक में शामिल होंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने इस कमेटी में खेल मंत्रालय के सचिव को शामिल करने की मांग नहीं मानी है. कोर्ट ने आदेश दिया कि बीसीसीआई के संयुक्त सचिव अमिताभ चौधरी और विक्रम लिमये आईसीसी में प्रतिनिधित्व करेंगे.

प्रशासकों के चार सदस्यीय पैनल के प्रमुख भारत के पूर्व नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) विनोद राय ने खुद को ‘नाइटवॉचमैन’ करार देते हुए कहा कि उनका काम यह सुनिश्चित करना होगा कि बीसीसीआई के निर्वाचित पदाधिकारियों के चुनाव में कोई परेशानी नहीं आये.

राय ने कहा, ‘उच्चतम न्यायालय से मिले इस तरह के किसी भी सम्मान को किसी को भी स्वीकार करके अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ प्रयास करने चाहिए.’

उन्होंने कहा, ‘मैं क्रिकेट के खेल का सच्चा प्रशंसक हूं. मेरी भूमिका इस संदर्भ में नाइटवॉचमैन की होगी कि हमें सुशासन, अच्छी व्यवस्था और बेहतर ढांचा तैयार करने की जरूरत है जिससे पदाधिकारियों का सुचारू तरीके से निर्वाचन सुनिश्चित हो सके जो भविष्य में बीसीसीआई में अच्छा प्रशासन लेकर आएंगे.’

राय ने कहा, ‘खेल को इसकी (अच्छे प्रशासन) जरूरत है. खिलाड़ियों को इसकी जरूरत है और विशेषकर लोगों को इसकी जरूरत है जो इस खेल के दीवाने हैं.’

भारत में भ्रष्टाचाररोधी अभियान के प्रतीक रहे राय ने कहा कि क्रिकेट को सुशासन की जरूरत है लेकिन वह अपना पद संभालने के बाद ही बीसीसीआई पर किसी तरह की टिप्पणी करने की स्थिति में होंगे.

उन्होंने कहा, ‘अभी कोई टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी क्योंकि मुझे उस बारे में ज्यादा पता नहीं है और बीसीसीआई के कामकाज से परिचित नहीं हूं. लेकिन किसी भी संस्थान को सुशासन सुनिश्चित करना चाहिए. क्रिकेट के खेल को सुशासन की जरूरत है.’

राय से पूछा गया कि बीसीसीआई को ढर्रे पर लाने में उन्हें और उनकी टीम को कितना वक्त लगेगा. उन्होंने कहा, ‘मुझे इसका पता नहीं है. कुछ पता चलने पर ही मैं इस बारे में बता सकता हूं.’

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