समग्र वित्‍तीय प्रदर्शन बनाए रखने प्रोत्साहित किया जाए राज्‍यों का अच्छा वित्‍तीय प्रदर्शन : आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17

नई दिल्ली. आज संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 में अर्थव्‍यवस्‍था के समग्र स्‍वास्‍थ्‍य को बनाए रखने के लिए केन्‍द्र तथा राज्‍यों की वित्‍तीय समझदारी पर प्रकाश डाला गया है.

सर्वेक्षण के अनुसार केन्‍द्र का वित्‍तीय दायित्‍व तथा बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम की छवि राज्‍यों में अपनाए गए वित्‍तीय दायित्‍व विधेयकों को प्रतिबिंबित करती हैं.

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में राज्‍यों की वित्‍तीय स्थिति में सुधार हुआ है. औसत राजस्‍व घाटा समाप्‍त हो गया है, जबकि औसत वित्‍तीय घाटा जीएसडीपी के 3 प्रतिशत से कम पर ला दिया गया है. जीएसडीपी अनुपात की तुलना में औसत ऋण में भी गिरावट आई है.

लेकिन वित्‍तीय प्रगति के कारण एफआरएल लागू होने का अर्थ यह नहीं कि प्रगति का सारा योगदान एफआरएल को मिले. वित्‍तीय परिवर्तनीयता में सुधार के लिए निम्‍नलिखित बिन्‍दु आवश्‍यक हैं :

घाटे में कमी काफी सीमा तक अनुकूल विदेशी कारणों से आई है (आंकडा 1 देखें) :

सामान्‍य जीडीपी विकास में वृद्धि (2005 के बाद औसतन 6 प्रतिशत अंक) से राज्‍यों का राजस्‍व लगभग जीएसडीपी का 1 प्रतिशत बढ़ा है.

13वें वित्‍त आयोग की सिफारिशों तथा केन्‍द्र सरकार के राजस्‍व में वृद्धि के कारण केन्‍द्र से अंतरण में जीएसडीपी का लगभग 1 प्रतिशत वृद्धि.

केन्‍द्र द्वारा ऋण ढांचे को नया रूप देने से जीएसडीपी का 0.9 प्रतिशत ब्‍याज भुगतान में कमी.

केन्‍द्रीय प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत सामाजिक क्षेत्र के प्रमुख व्‍ययों को केन्‍द्र द्वारा अपने ऊपर लेने से राज्‍यों द्वारा व्‍यय की आवश्‍यकता में कमी-जीडीपी का लगभग 1.2 प्रतिशत अनुमानित.

आंकड़ा 1 : राज्‍यों के एफआरएल के पहले और बाद में वित्‍तीय प्राथमिक तथा राजस्‍व

घाटे में कमी का विभाजन

राज्‍यों का वास्‍तविक योगदान संभवत: फिजूल खर्ची से बचना और मुट्ठी को बंद रखना रहा है. राजस्‍व में वृद्धि के बावजूद गैर-ब्‍याज राजस्‍व व्‍यय जीएसडीपी का केवल 0.4 प्रतिशत बढ़ा.

बजट से अलग के व्‍यय में कमी स्‍पष्‍ट गारंटी प्रवाह और लोक कार्यों के लिए ऋण में कमी आने से हुई.

बजट के कर राजस्‍व अनुमान और वास्‍तव में हासिल कर राजस्‍व के बीच का अंतर एफआरएल से पहले वास्‍तविक (आशान्वित अनुमान) के औसतन 5.9 प्रतिशत से घटकर एफआरएल के बाद वास्‍तविक के -0.6 प्रतिशत के स्‍तर पर आ गया है.

ये सभी सकारात्‍मक संकेतक बाद के वर्षों में कमी दिखाते हैं, उदाहरण के लिए वित्‍तीय घाटे एफआरएल के बाद औसतन 10 वर्षों में 3 प्रतिशत की सीमा के अंदर हैं. (देखें आंकड़ा 2)

आंकड़ा 2 : एफआरएल अपनाने से संबंधित वर्षों में राज्‍यों का औसत वित्‍तीय घाटा (जीएसडीपी के प्रतिशत रूप में)

आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 स्‍पष्‍ट करता है कि वेतन आयोग की सिफारिशों और उदय बांड से बढ़ते भुगतान दबाव के कारण राज्‍यों के लिए वित्‍तीय चुनौतियां बढ़ी हैं. इसलिए इस बात की समीक्षा आवश्‍यक है कि वित्‍तीय कार्य प्रदर्शन को किस तरह पटरी पर रखा जाए.

अच्‍छे वित्‍तीय कार्य प्रदर्शन को प्रोत्‍साहित करने की आवश्‍यकता है. इसलिए नहीं कि राज्‍य केन्‍द्र के दायित्‍वों को पूरा कर रहे हैं बल्कि इसलिए कि राज्‍यों के प्रदर्शन को प्रोत्‍साहित करने से केन्‍द्र को ठोस वित्‍तीय प्रबंधन का उदाहरण बनने की आवश्‍यकता होगी.

source : pib.nic.in

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