घोर कम्युनल आदमी थे जी प्रदीप!

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ए भाई. ‘जागृति’ फिल्म कब बनी थी जी? भला हुआ जो 1954 में ही बन कर निपट गयी, उस समय ही प्रदीप ने यह घोर सांप्रदायिक गीत लिख दिया.

अच्छा हुआ, जो संघियों द्वारा दिए गए विभाजन का घाव अभी ताज़ा ही था, तो चाचा नेहरू भी बहुत उछलकूद नहीं कर पाए.

यह भी अच्छा था कि सेकुलरिज्म (Sic.) का बुखार बहुत अधिक नहीं चढ़ा था. आज की तारीख में अगर ये फिल्म बनती और ये सांप्रदायिक गीत लिखा जाता, तो पक्का था कि अनुराग कश्यप चला जाता, जंतर-मंतर पर फरहान अख्तर, सोनम कपूर, जैसे दो-चार फटे-चिटे कलाकारों को लेकर अनशन करने.

जरूर कोई रामगोपाल वर्मा, हिंदुओं के डर से देश बदल लेता, हाजी आमिर की बीवी मुल्क बदल लेती, सुशांत सिंह राजपूत अपना नाम बदल कर हाजी सुल्तान मियां पीर कर लेता…

अब देखिए जरा कितना कम्युनल गीत है…

देखो मुल्क मराठों का यह यहाँ शिवाजी डोला था
मुग़लों की ताकत को जिसने तलवारों पे तोला था
हर पर्वत पे आग जली थी हर पत्थर एक शोला था
बोली हर-हर महादेव की बच्चा-बच्चा बोला था
शेर शिवाजी ने रखी थी लाज हमारी शान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की

गीत में हर-हर महादेव?? राम-राम (सॉरी, नारा-ए-तकबीर)! अल्ला-हू-अकबर क्यों नहीं? ये, शिवाजी तो पहाड़ी चूहा था न, उसका सेनापति मोहम्मडन था, औरंगजेब सेकुलर शासक था, उसका सेनापति हिंदू (उसका नहीं था, कोई बात नहीं, अकबर का तो था न) था… जजिया-फजिया तो बस दिखावे की बात थी, वो तो मंदिरों को दान देता था… तो यानी, प्रदीप ने यह गीत सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने के लिए लिखा…

इतने पर बस कहां? उन्होंने तो ऐतिहासिक तथ्य भी डिस्टॉर्ट किए हैं… भरोसा नहीं होता, तो महान उपन्यासकार ‘इरफान हबीब’ से पूछिए. ये लाइन ज़रा देखिए-

ये प्रताप का वतन पला हैं आज़ादी के नारों पे
कूद पड़ी थी यहाँ हज़ारों पद्मिनियाँ अंगारों पे
बोल रही है कण कण से कुरबानी राजस्थान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की

बताइए, अकबर जैसे सेकुलर के बराबर प्रताप जैसे हिंदू, कम्युनल फैनेटिक को खड़ा कर दिया. संघी साजिश का भी जवाब नहीं.

और ये पद्मिनयां कौन हैं? Bullshit… there is no reference of Padminiyan… ये जब तक कोई लालमुंह वाला गोरा बंदर नहीं कहेगा, हम नहीं मानेंगे…

हां, नहीं तो….

ज़्यादा बोलिएगा तो दो-तीन महान उपन्यासकारों, रोमिला बी, विपिन दा आदि को भी बुला लेंगे.

संघी सब कहीं का…. माय फुट!

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