यह हैं असली नायिकाएँ : किवदन्तियाँ नहीं, आज भी हर भारतीय नारी में जीवित

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भंसाली का कहना है कि पद्मावती एक काल्पनिक पात्र है. इतिहास की अगर बात की जाए तो राजपूताना इतिहास में चित्तौड़ की रानी पद्मिनी का नाम बहुत ही आदर और मान सम्मान के साथ लिया जाता है.

भारतीय इतिहास में कुछ औरतें आज भी वीरता और सतीत्व की मिसाल हैं जैसे सीता, द्रौपदी, संयोगिता, और पद्मिनी. यह चारों नाम केवल हमारी जुबान पर नहीं आते बल्कि इनका नाम लेते ही जहन में इनके चरित्र कल्पना के साथ जीवंत हो उठते हैं.

रानी पद्मिनी का नाम सुनते ही एक ऐसी खूबसूरत वीर राजपूताना नारी की तस्वीर दिल में उतर आती है जो चित्तौड़ की आन बान और शान के लिए 16000 राजपूत स्त्रियों के साथ जौहर में कूद गई थीं. आज भी रानी पद्मिनी और जौहर दोनों एक दूसरे के पर्याय से लगते हैं. इतिहास गवाह है कि जब अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ के महल में प्रवेश किया था तो वो जीत कर भी हार चुका था क्योंकि एक तरफ रानी पद्मिनी को जीवित तो क्या मरने के बाद भी वो हाथ न लगा सका.

लेकिन भंसाली तो रानी पद्मिनी नहीं पद्मावती पर फिल्म बना रहे हैं. बेशक उनके कहे अनुसार वो एक काल्पनिक पात्र हो सकता है लेकिन जिस काल खण्ड को वह अपनी फिल्म में दिखा रहे हैं वो कोई कल्पना नहीं है. जिस चित्तौड़ की वो बात कर रहे हैं वो आज भी इसी नाम से जाना जाता है. जिस राजा रतनसिंह की पत्नी के रूप में रानी पद्मावती की ” काल्पनिक कहानी” वे दिखा रहे हैं वो राजा रतन सिंह कोई कल्पना नहीं हमारे इतिहास के वीर योद्धा हैं.

और ‘लास्ट बट नौट द लीस्ट ‘ जो अलाउद्दीन खिलजी आपकी इस फिल्म में पद्मावती पर फिदा है उसके नाम भारतीय इतिहास का सबसे काला पन्ना और खुद मुग़ल इतिहास में सबसे क्रूर शासक के नाम से दर्ज है.

तो सोचने वाली बात यह है कि यह कैसी काल्पनिक कहानी है जिसका केवल ‘एक’ ही पात्र काल्पनिक है? कोई भी कहानी या तो कल्पना होती है या सत्य घटना पर आधारित होती है. भंसाली शायद भूल रहे हैं कि यदि अतीत की किसी सत्य घटना में किसी कल्पना को जोड़ा जाता है तो इसी को ‘तथ्यों को गलत तरीके से पेश करना’ या फिर ‘इतिहास से छेड़छाड़ करना’ कहा जाता है.

चलो मान लिया जाए कि रानी पद्मावती एक काल्पनिक पात्र है लेकिन भंसाली शायद यह भी भूल गए कि काल्पनिक होने के बावजूद रानी पद्मावति एक भारतीय रानी थी जो किसी भी सूरत में स्वप्न में भी किसी क्रूर मुस्लिम आक्रमण कारी पर मोहित हो ही नहीं सकती थी.

हमारे इतिहास की यह स्त्रियाँ ही हर भारतीय नारी की आइकान हैं. रानी पद्मिनी जैसी रानियाँ किसी पटकथा का पात्र नहीं असली नायिकाएँ हैं, वे किवदन्तियाँ नहीं हैं आज भी हर भारतीय नारी में जीवित हैं.

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