भंसाली… दम है तो ‘कफूर-खिलजी : एक अमर प्रेम’ फिल्म बनाओ

यह संजय भंसाली क्या पिटा कि सारे तथाकथित सेक्युलर, बुद्धिजीवी, कलाकार और फ़िल्मी जमात ‘सृजनात्मकता का अधिकार’, सिनेमेटिक क्रिएटिविटी का झंडा बुलन्द किये कूद पड़े है. इन्हें ऐतिहासिक चरित्रों को तोड़-मोड़ कर, गाने अफसानों से थाली पर सजा कर जनता को पेश करने की आज़ादी चाहिए है. इन्हें हिंदुत्व के प्रतीकों से छेड़खानी करने का … Continue reading भंसाली… दम है तो ‘कफूर-खिलजी : एक अमर प्रेम’ फिल्म बनाओ