साइकिल नहीं उठा सकी अंसारी का बोझ, अब करेंगे हाथी की सवारी

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लखनऊ. शिवपाल यादव के नज़दीकी कुख्यात मुख्तार अंसारी को अखिलेश यादव द्वारा अहमियत नहीं दिए जाने से नाराज़ अंसारी बंधुओं के बहुजन समाज पार्टी में शामिल होने की खबर है.

उल्लेखनीय है कि मुलायम और शिवपाल ने समाजवादी पार्टी में कौमी एकता दल का विलय करवाया था, लेकिन अखिलेश इसके खिलाफ थे. इसी के बाद मुलायम के कुनबे में घमासान मच गया था.

कौमी एकता दल नाम की पार्टी चलाने वाला और हत्या का आरोपी मुख्तार अंसारी और उसके भाई सिगबतुल्लाह अंसारी के बसपा में शामिल होने की खबर सोशल मीडिया पर हैं.

बताया जा रहा है कि मुख्तार को मऊ और सिगबतुल्लाह को मुहम्मदाबाद से टिकट दिया जा रहा है. हालांकि बसपा और अंसारी बंधुओं ने अब तक पुष्टि नहीं की है.

खबर है कि मऊ और मोहम्मदाबाद से बसपा ने अपने पूर्व घोषित प्रत्याशियों को हटा लिया है. इससे मुख़्तार और शिबगतुल्लाह अंसारी और मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी को बसपा की टिकट मिलने की अटकलें तेज़ हो गई हैं.

मुख्तार अंसारी पर हत्या और अवैध वसूली समेत कई आरोप हैं. उस पर भाजपा नेता कृष्णानंद राय की हत्या का आरोप है, जिसका केस दिल्ली की अदालत में चल रहा है.

बताया जा रहा है कि मायावती गुरुवार को अंसारी बंधुओं के बहुजन समाज पार्टी में शामिल होने की घोषणा करेंगी.

उल्लेखनीय है कि अखिलेश यादव को समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद जब अखिलेश ने चुनाव आयोग में अपने समर्थक विधायकों की सूची दी थी तो उस में सिगबतुल्लाह अंसारी का भी नाम था.

इसके बाद जब अखिलेश ने सपा टिकटों का ऐलान किया तो मउ सीट पर मुख्तार के खिलाफ अल्ताफ अंसारी को टिकट दिया और मुख्तार के भाई सिगबतुल्लाह की मोहम्मदाबाद सीट कांग्रेस को दे दी.

अखिलेश के इस कदम को अंसारी बंधुओं ने धोखेबाजी करार दिया. बता दें कि बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी पर हत्या, अवैध वसूली समेत कई आरोप हैं. मुख्तार 2005 से लखनऊ सेंट्रल जेल में क़ैद है.

उसने 2007 और 2012 का चुनाव जेल में रहते हुए ही लड़ा और जीता. साल 2012 में ही उसने कौमी एकता दल नाम की पार्टी बनाई थी, जिसका विलय शिवपाल यादव ने सपा में कराया था.

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