विपक्षी मंसूबों पर पानी फिरा, एक फरवरी को ही आएगा आम बजट, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

नई दिल्ली. इस साल से आम बजट एक फरवरी को प्रस्तुत करने के सरकार के फैसले पर हाय तौबा मचाने वाली कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को मायूसी हाथ लगी है. इस साल का आम बजट अपनी पूर्व निर्धारित तारीख यानी 1 फरवरी को पेश करने के केंद्र के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगा दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर आम बजट टालने की मांग वाली जनहित अर्जी खारिज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर सोमवार को सुनवाई हुई जिसमें कोर्ट ने यह फैसला किया.

कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने भी 1 फरवरी को बजट पेश किए जाने का विरोध किया. उनका कहना था कि लोकलुभावन बजट पेश करके केंद्र चुनावों पर असर डाल सकता है इसलिए बजट को 1 फरवरी के बाद पेश किया जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आम बजट पेश किए जाने से राज्य चुनावों में मतदाताओं का निर्णय प्रभावित होगा, इस बात के समर्थन में कोई उदाहरण देखने को नहीं मिलते. लिहाजा सुप्रीम कोर्ट ने पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर आम बजट टालने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी.

कोर्ट ने कहा है कि केंद्र का बजट केंद्रीय होता है इसका राज्यों से कोई लेना-देना नहीं है. आप ये भी नहीं बता पाए कि यह कौन से कानून या संविधान के प्रावधान का उल्लंघन है.

कोर्ट ने कहा- याचिकाकर्ता एक उदाहरण देकर बताए कि केंद्र के बजट से किसी राज्य के नागरिक के मन में चुनाव के हिसाब से क्या असर पड़ सकता है? ऐसे तो आप कहेंगे कि राज्य के चुनाव हैं तो केंद्र सरकार ही नहीं होनी चाहिए क्योंकि इससे लोगों के मन में यह होगा कि इसी पार्टी की केंद्र में सरकार है और इस पार्टी को वोट देंगे तो राज्य को फायदा होगा. ऐसे ही बजट को आगे बढ़ाते रहे तो बजट कब आएगा. हर महीने राज्यों में चुनाव आते रहेंगे.

दायर याचिका में यह भी मांग की गई थी कि भाजपा से उसका चुनाव चिह्न ‘कमल’ छीनने का भी निर्देश दिया जाए. क्योंकि उसने कथित रूप से आचार संहित का उल्लंघन किया है. याचिका में कहा गया है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद बजट पेश करना संविधान की धारा-112 का उल्लंघन है.

पिछली सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश खेहर ने याचिकाकर्ता से सवाल किया था कि आप बताइए कि सरकार ने इस मामले में कौन से कानून का उल्लंघन किया है? संविधान के कौन से प्रावधान का उल्लंघन है? आप इस बारे में तमाम तैयारी कर कोर्ट को बताएं. अगर हमें कोई ग्राउंड मिलता तो नोटिस जारी कर सकते थे.

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