नुक्कड़ कहानी : स्क्रैप, कबाड़ीवाला और पुराना आदमी

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“कबाड़ी…… कबाड़े वाला… जूना पुराना बर्तन, ताम्बा, पीतल, लोहा, टूटा सोफा… पलंग, कूलर पंखा कांच कचरा वाला…”

उफ़ ये कबाड़ी भी सुबह सुबह… सोने भी नहीं देते…. पता नहीं चार बजे ही घर से निकल जाते हैं .. क्या ब्लडी फूल्स. एक तो वैसे ही रात भर नींद नहीं आती. आए भी कहाँ से …. पैंतालीस साल तक रात में करवट लेने पर भी जो औरत पूछती थी कुछ चाहिए, क्या तबियत तो ठीक है, वो दुनिया छोड़कर चली गयी है…..

“कबाड़ी टूटा फूटा बर्तन, जूना पुराना…”

अरे चला जा नामाकूल.. तुझे मेरा ही घर मिला है क्या टेर लगाने को. क्या पता एक आध झपकी और आ जाए तो सर कुछ हल्का हो जाए. न जाने क्या हो गया है. रात भर दिमाग़ में सिनेमा सा चलता रहता है. जिस बेटे को ऊंगली पकड़कर चलना सिखाया वही कहता है, “पापा अब आपका दिमाग़ और शरीर दोनों आउट डेटेड हो चुके हैं. अपने ये उलटे-सीधे सजेशन देकर मेरे बिज़नस और परिवार का भट्ठा मत बिठाइये प्लीज़. रिटायर होकर हर चीज़ में टांग फंसाएंगे तो…!!!

“कबाड़ी…. कबाड़ी वाला…. जूना पुराना….”

कमबख्त टल क्यों नहीं जाता. पहले ही सर दर्द से फटा जा रहा है. तनिक खांसी क्या हो गयी, बहू ने बच्चों को मिलने से रोक लिया है. कल ही तो सुना-सुनकर कह रही थी, “न जाने कौन-कौन-सी बीमारी पाल लेते हैं. बच्चों को इन्फेक्शन लग गया तो…”

ठंडा बासी खाना नौकरानी के हाथ कमरे में भिजवा देती है बस. ऐसे जीने से तो मौत भली.

“कबाड़ी जूना, पुराना, ताम्बा, पीतल “…..

“अरे… अरे क्यूं शोर मचा रखा है. सोने भी नहीं देते. क्या-क्या खरीदते हो? चोरी-चकारी के चक्कर में हो क्या?”- वे छड़ी लेकर बाहर को लपके.

“कबाड़ी है साब, पुराना बर्तन, लोहा पलंग, कूलर, सोफा…”

चुप रहो. लोहा बर्तन कूलर…. हल्ला मचा रखा है. सुबह-सुबह जूना पुराना कबाड़… अरे कबाड़ तो हर चीज़ बन जाती है एक दिन, ….जाओ यहाँ से. पुराना सामान खरीदेंगे…. कूलर पलंग और आदमी???… अगर आदमी हो जाए जूना, पुराना, कबाड़? स्क्रैप बन जाए आदमी तो उसको भी खरीदते हो? अचानक उनका स्वर आद्र हो गया.

कबाड़ी ने गौर से पॉश कॉलोनी के उस शानदार मकान को देखा, फिर सिलवट भरे मैले कपड़े और हफ्ते भर की बड़ी हुई दाढ़ी और उलझे बालों वाले उस बूढ़े आदमी को देखा. कुछ क्षण सोचता सा रहा और धीरे से बोला, “खरीदता है साब! जूना पुराना आदमी भी लेता है साब!!

“बकवास बंद करो, पुराना आदमी खरीदेगा, अच्छा बता क्या देगा थके हारे स्क्रैप हो गए आदमी का??

“दो वक़्त की इज्जत की रोटी देगा साब.”

उस दिन के बाद वो दोनों ही उस मोहल्ले में किसी को दिखाई नहीं दिए.

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