खेल अधूरा छूटे ना..

शतरंज की बिसात बिछी हुई थी. श्वेत पक्ष की तरफ राजा के साथ एक हाथी, एक ऊंट, एक घोड़ा, तीन पैदल और स्याह पक्ष में राजा के साथ वजीर, एक हाथी, दो ऊंट, एक घोडा और 7 पैदल.

स्याह पक्ष के हाथी को श्वेत पक्ष का ऊंट मार सकता है लेकिन अगली ही चाल में उसका भी मारा जाना तय है ………..

अक्सर शतरंज में ऐसा होता है कि आपके पास सामने वाले का बड़ा मोहरा मारने का फायदेमंद विकल्प होता है लेकिन अपने एक महत्वपूर्ण मोहरे के बदले. कभी कभी ये छोटा सा लाभ आगे आपकी बड़ी हार में परिवर्तित हो सकता है .

उपरोक्त परिस्थिति में एक शातिर खिलाड़ी बिना अपने किसी महत्वपूर्ण मोहरे को शहीद किये सामने वाले को मात देने का जाल रचता है.

आपका “उपलब्ध बेहतर” खिलाड़ी 2014 से एक लगभग हारी हुई बाजी पूरी शिद्दत से खेल रहा है. शतरंज के खिलाड़ी को समर्थन में भी शांति और एक हलकी सी मुस्कुराहट ही दिखाई जाती है आलोचना की तो बात ही छोड़िये.
इसलिए आपने उसे अक्सर बस खेलते हुए ही देखा है इधर उधर देखते हुए नहीं. स्याह पक्ष का खिलाड़ी बार बार आपको उकसा रहा है, अपने ही बड़े बड़े मोहरे दांव पर लगा कर और आप भी उछल पड़ते हैं….

मारो !!

काटो !!!

इनसे ना हो पायेगा !!!!
???
ये शतरंज है भाई कबड्डी नहीं कि साहेब गए और सभी को साथ उठा लाये अपने पाले में.

थोड़ा समझिये, देखिये केवल मोहरे नहीं मारने है बल्कि मुक्कमल मात देनी है उन्हें मात.

मेरी पिछली कथा (Demonetization : विक्रमादित्य की अद्भुत कथापढ़ी होगी तो समझ ही गए होंगे कि अब यहाँ
हिंदुस्तान कौन है
मोदी कौन
श्वेत कौन और स्याह कौन
अख़लाक़, वेमुला, किरण राव कौन
बंगाल और केरल कौन??

यूपी चुनाव तय करेगा कि श्वेत पक्ष के पास अब बस यथासंभव हार को बचाने का ही विकल्प शेष है या “विजय” की पताका का ऊपरी भगवा भाग भी दिखने लगा है.

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