Deepika Padukone : जैसे मन्दिर में हो एक जलता दीया

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1942 – ए लव स्टोरी, स्वर्गीय पंचम दा की अंतिम कृति

– एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा……
जैसे खिलता गुलाब,
जैसे शायर का ख्वाब,
जैसे उजली किरण,
जैसे बन में हिरण,
जैसे चाँदनी रात,
जैसे नरमी की बात,
जैसे मन्दिर में हो एक जलता दीया……………

क्या आप जानते हैं कि इस गीत की धुन स्वर्गीय पंचम दा एक भजन के लिए तैयार की गई थी? लेकिन, इस धुन में जावेद अख्तर साहब ने जो शब्द डाले हैं, वो मुझे किसी भजन के पवित्र शब्दों से कम नहीं लगते, क्योंकि मुझे लगता है यह गीत किसी प्रेमिका के लिए नहीं सिर्फ एक लड़की के लिए लिखा गया है जो एक बेटी भी हो सकती है, बहन भी, एक दोस्त या पत्नी भी.
कितनी पवित्र तुलना है…… जैसे मन्दिर में हो एक जलता दीया……………..

यदि हर लड़की खुद को इस गीत में ढालकर सुने, तो उसके मन में उतनी ही सुंदर भावनाएँ आएगी, जितनी सुंदरता से इसे लिखा गया है.

क्यों हर बार सिने तारिकाओं से तुलना कर अपने चेहरे या देह की सुंदरता की बात की जाए. क्यों न देह से परे मन की सुंदरता और पवित्रता की बात कर इसे मन्दिर में एक जलता हुआ दीया कहा जाए.

एक गीत और है – रोजा फिल्म का, दिल है छोटा-सा छोटी-सी आशा….. आपको पता है इस गाने में मेरी फैवरेट लाइन कौन-सी है?….अपनी चोटी में बाँध लूँ दुनिया…… महत्वाकांक्षा और स्वच्छंदता की इससे ऊँची उड़ान और क्या हो सकती है कि दुनिया को अपनी चोटी में बाँध लेने की ख्वाहिश जाग उठे.

और सिर्फ ख्वाहिश ही क्यों, मैंने आजकल की कुछ कन्याओं को जीवन को इतनी सरलता से लेते हुए भी देखा है कि वे मुझे जीवन की बगिया में उड़ती तितलियाँ-सी लगती हैं, जो जितनी अपनी प्राकृतिक सुंदरता से मन मोह लेती हैं, उतनी ही उनकी स्वच्छंद उड़ान के लिए. कहीं जीत कहीं हार होने के बावजूद, हर समय मुझे उनके चेहरे पर एक नई शुरुआत का जज्बा दिखाई देता है.

हाँ, लेकिन जहाँ गंभीरता की बात आई है, कई ने आज अपने स्वतंत्र अस्तिव की जंग जीतकर अपनी पहचान भी बनाई है, फिर चाहे बात किरण बेदी के व्यक्तित्व की की जाए, या सुष्मिता सेन की जिसने एक अविवाहिता होते हुए बेटी को गोद लेकर समाज में एक नई मिसाल कायम की है. या फिर दीपिका पादुकोण की जो कभी My Choice वीडियो की वजह से चर्चा में रहती है, कभी अपने प्रेम प्रसंगों की वजह से, तो कभी विदेश में किसी विदेशी फिल्म के लिए पब्लिसिटी के लिए बोले गए किसी डायलॉग की वजह से….

दीपिका पादुकोण एक ऐसी लड़की है जो चेहरे से ही बहुत संतुलित सी लगती है… जीवन के सारे उतार चढ़ाव से अनुभव लेते हुए चेहरे के साथ आत्मा की परिपक्वता ग्रहण करते हुए…
Vin Diesel के लिए बोले गए संवाद को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत करता मीडिया ये भूल जाता है कि अपने करियर के लिए समर्पित लड़की अन्य तारिकाओं की तरह ना फूहड़ बयानबाजी करती है ना फूहड़ प्रदर्शन….

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एक साधारण से सवाल का साधारण सा जवाब था वो जो मज़ाक में कहा गया कि – “But, it’s all in my head! So yeah, I mean in my head I think, like, we are together and we have this amazing chemistry, and we live together and we have these amazing babies! But it’s all in my head.”

पूरे संवाद के अंत में बहुत गंभीरता से वो कहती है… No, it’s not a crush… जिस पर कोई बात नहीं की जा रही… और ना ही इस बात पर कोई चर्चा की जा रही है कि कैसे फिल्मों में आने के लिए उसने अपने माता पिता से अनुमति ली, घरवालों से इस वादे के साथ अपना पोर्ट फोलियो बनाने के लिए पैसे उधार लिए कि एक दिन मैं आपको इसे लौटाऊंगी और आपको मुझ पर गर्व होगा…

ये वही आधुनिक लड़की है जो दुनिया को अपनी चोटी में बाँध लेने के सपने देखती है, इसलिए पहाड़ों और झरनों पर हिरनी सी कुलाचे मारती हुई आगे बढ़ती जा रही है… पारदर्शी साड़ी से झलकती देह वासना नहीं, प्राकृतिक सुन्दरता दर्शाती है…. विचारों की अभिव्यक्ति अपरिपक्व हो सकती है, झूठी ओढ़ी हुई नहीं….

सारे विवादों के बावजूद उस भारतीय संस्कृति में पली बढ़ी लड़की को देखकर कम से कम मुझे ये गीत याद आता है… जैसे मन्दिर में हो एक जलता दीया……………

दीपिका का वायरल वीडियो – 

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