यूपी में भाजपा को लाना है तो डेटा इकट्ठा कीजिए

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शर्लक होम्स का एक डायलॉग आपको याद होगा- “Data! Data! Data! I can’t make bricks without clay.” यूपी में भाजपा को लाना है तो डेटा इकट्ठा कीजिए.

आँकड़े जुटाइये. कितने जन धन खाते खुले, पेंशन योजना से कितनों को लाभ हुआ, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत, बीमा योजना, कितनी सड़कें बनी, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया इत्यादि.

जातीय और मत-मजहब के समीकरण जो हैं सो हैं लेकिन ध्यान रखिये इस बार का वोटर युवा है. नमाजवादियों के झगड़े का सच और नौटंकी सबके सामने है. ये युवाओं को रिझाने की रणनीति थी.

युवा वर्ग को यह समझ में आना चाहिये कि भाजपा की सरकार आने का मतलब क्या होता है.

स्टाफ सेलेक्शन कमीशन 2012 का परिणाम दो साल में आया था. अब परीक्षाएं ऑनलाइन व समय पर होने लगी हैं.

हाल ही में कुछ महत्वपूर्ण पदों के लिए आयु सीमा 30 कर दी गयी है. नोटिफिकेशन मार्च में आयेगा.

पोस्ट ऑफिसों को बैंक बनाने की योजना 2012 से लटकी थी. मोदी सरकार ने फटाफट काम करते हुए 2016-17 से पोस्टल बैंक में अफसर वर्ग की भर्ती आरंभ करवा दी.

विमुद्रीकरण भी एक साहसी निर्णय था. वामपंथी गैंग की चाल देखिये.

आजकल एक दाढ़ी वाले प्रोफेसर खूब दिखाई दे रहे हैं. नाम है अरुण कुमार. जी हाँ जनेवि से ही रिटायर्ड हैं. इन्हें वामियों ने जमीन से खोद के निकाला है.

राज्यसभा टीवी और वेबसाइट्स पर विमुद्रीकरण के विरोध में खूब बोल रहे हैं. थोड़ी छानबीन की तो पता चला कि साहब विश्वनाथ प्रताप सिंह के करीबी रहे हैं जो भारत का सबसे लीचड़ प्रधानमंत्री था.

ऐसे लोगों को उत्तर कैसे दिया जायेगा?

यूट्यूब पर प्रो० नरेंद्र जाधव को सुनिये. आप रिज़र्व बैंक में अधिकारी रहे हैं और प्रसिद्ध दलित अर्थशास्त्री हैं. उन्होंने बड़े विस्तार से और डंके की चोट पर विमुद्रीकरण का समर्थन किया है.

अभी बेनामी सम्पत्तियां खुलेंगी तो बड़े बड़े नपेंगे. पाकिस्तान में जाली नोट बनाने के कारखाने बन्द हो गए हैं. कश्मीर में और नक्सलियों तक पैसा नहीं पहुँच रहा है.

ये सब बातें युवाओं तक पहुँचनी चाहिये. कृपया कोई मुझे विमुद्रीकरण पर व्यर्थ लेक्चर न दे, मैं इस विषय पर लम्बा चौड़ा आलेख लिख चुका हूँ.

आँकड़े जुटाइये और लेख के साथ में जो वीडियो लिंक है वह देखिये.

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