क्यों जीएसटी के दायरे से बाहर हैं पेट्रोल और डीज़ल

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हर कुछ दिनों के बाद पेट्रोल और डीज़ल के दामों में बदलाव किया जा रहा है. हम हर बार इस पर सरकार को कोसते हैं. पेट्रोल और डीज़ल कंपनियाँ हर बार अपने घाटे की दुहाई देती हैं. आइये इसके सच भी को जानिए.

पहले सरकार कच्चे तेल का आयात करती थी और उस पर कर लगा कर उसके दाम तय कर देती थी. यह नियम 2010 से पहले तक चलता था और 2010 में सरकार ने पेट्रोल के दामों पर से अपना नियंत्रण हटा लिया.

उस समय के बाद से पेट्रोल की कीमत का निर्णय मात्र तेल कंपनियाँ ही करती हैं. यही प्रक्रिया अब 2014 से डीज़ल के लिए भी हो रही है. परंतु सरकार का निर्णय अब सिर्फ पेट्रोल इत्यादि पर लगने वाले कर तक सीमित है.

शायद आप यह समझें कि सरकार पेट्रोल में कर लगा कर अपने आयात के खर्चे को पूरा करेगी, पर सच इसके अतिरिक्त है.

इसी कर से सरकार अपना दूसरा घाटा पूरा कर रही है यानि fiscal deficit को कम करने के लिए ही यह सब किया जाता है.

अब तेल कंपनियों के खर्चे और पेट्रोल की कीमत के अवयवों को समझें.

तेल अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में बैरल इकाई में मिलता है. एक बैरल में 44 गैलन तेल होता है जो लगभग 166 लीटर के बराबर होता है.

अब अंतर्राष्ट्रीय मानकों से एक गैलन कच्चे तेल से जो निकलता है वह है :

72.5 लीटर पेट्रोल

35 लीटर डीज़ल

14.5 लीटर हवाई ईंधन

6.5 लीटर रसोई गैस

47 लीटर Kerosene Heating oil, Furnace oil इत्यादि निकलता है.

अब इसके आर्थिक पहलू को विचारें तो – 42% पेट्रोल, 16% डीज़ल और 15% हवाई ईंधन 5% गैस और बाकी सब लगभग 22% कीमत का निकलता है.

यदि मात्र पेट्रोल डीज़ल और हवाई ईंधन का ही आर्थिक पक्ष समझें तो 1 जनवरी 2017 तक के हिसाब से Rs 3970 का एक बैरल तेल होने के कारण लगभग 31.70 का एक लीटर पेट्रोल/ डीज़ल/ हवाई ईंधन आएगा. यदि रसोई गैस और दूसरे उत्पाद की कीमत समझें तो पेट्रोल की कीमत लगभग 25 रुपये आएगी.

इसके उपरांत लगभग 5 रुपये की Refinery cost, transportation आदि लगने के बाद यह पेट्रोल या डीज़ल 30 रुपये का refinery के बाहर आएगा.

अब इस पर कर लगाने की प्रक्रिया शुरू होती है. पेट्रोल पर उत्पाद कर 21.48 और डीज़ल पर 17.33 रुपये का लगता है. डीलर को पेट्रोल पर 2.58 रुपये और डीज़ल पर 1.65 रुपये मिलता है. पेट्रोल पर 15.0 रुपये VAT और डीज़ल पर रुपये 8.51 लगता है. इन सब को जोड़ कर लगभग 70 रुपये का पेट्रोल और 57 रुपये का डीज़ल हमें मिलता हैं.

इस सब में सरकार की प्रत्यक्ष भूमिका नगण्य है परंतु परोक्ष रूप से सरकार कर का निर्धारण करती है. अब आप समझें कर का सरकार क्या करती है?

देश लगभग 90 लाख करोड़ लीटर पेट्रोल, डीज़ल, हवाई ईंधन और गैस प्रतिवर्ष खर्च करता है. इसमें लगभग 50 लाख करोड़ का तो मात्र पेट्रोल है जिसके कर से सरकार 160 लाख करोड़ की रकम जुटाती है.

अब सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल को derugalate कर दिया तो सरकार इस पैसे से बजटीय घाटा पूरा करती है.

अब आप समझ सकते हैं कि क्यों पेट्रोल और डीज़ल जीएसटी के दायरे से बाहर रखे गए हैं. और क्यों कोई भी प्रदेश सरकार इस उत्पाद पर GST लगने के पक्ष में नहीं है.

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