आपकी भावनाओं से आपके ही दिमाग का शिकार

0
101

इसे ठीक से समझ लीजिये. आपकी उदारवादी सोच कल को एक और अलगाववादी को मुम्बई में बड़ा कलाकार बनाएगी, और पाकिस्तान परस्ती जारी रहेगी.

उसे सरल सी, भोली-भाली, चुलबुली अपनी ‘बालिका’ मत समझ बैठो. घुटी-घुटाई, ऊंची चीज़ है. वह आपके दिमाग से खेल रही है.

उसका इतिहास खुद देखो. रिकॉर्ड मौजूद है –

1. पहले ये अपने फेसबुक पर कई भारत विरोधी पोस्ट करती रही है.

2. अलगाववादियों के समर्थन में भी पोस्ट करती रही है, कश्मीर में इन्टरनेट न चलने के लिए भारत को दोषी बताती रही है. वहाँ उसकी भाषा ‘भारत’ ऐसे है जैसे वह किसी दूसरे देश की नागरिक हो.

3. पिछले दिनों जम्मू के वेव सिनेमा में वह अपनी ही फिल्म को अपने साथियों के साथ देखने गई थी. सबको पता ही है कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि, हर फिल्म से पहले भारत का राष्ट्रगान बजेगा और सबको राष्ट्रगान के सम्मान में खड़ा होना होगा.

वेव सिनेमा में मौजूद सभी लोग खड़े हुए, पर यह और इसके साथ आए लोग राष्ट्रगान के लिए खड़े नहीं हुए… और इस बात की पुष्टि वेव सिनेमा जम्मू के मैनेजर ने भी की है.

4. लाख कोशिश के बाद भी फिल्म पिट गई है. अब झूठा ढिंढोरा पीटकर किसी तरह वे चर्चा में बने रहना चाहते हैं. एजेंसियो से प्राप्त सूचनाओं के अनुसार फिल्म औसत से भी काफी कम कमा पाई है.

अब हमारे पास उसके रिकॉर्ड और आंकड़े भी उपलब्ध हैं इसलिए वे कुछ बड़ी कमाई का राग भी अलापें तो भी कोई फ़र्क नहीं पड़ता.

हाँ! मठ-मीडिया एक बड़े वर्ग मे अपनी साख जरूर खो बैठेगा, वैसे वह बचा ही कितना है. मठ-मीडिया के सहारे अब फ़िल्में नहीं चला करतीं.

आमिर शुरू से ही बड़ी चतुराई से अल-तकिया के तहत ऐसे लोगो का बढ़ावा देता रहा है. उसकी हरेक फिल्म की टीम का अध्ययन करें….

एक खास वर्ग को वह चर्चा में लाने का काम करता है. बड़े सधे तरीके से वह चुन-चुन कर मीडिया पर्सनलिटी में बदल देता है. वह दूर-दराज से खोज लाता है.

मीडिया का भी शिकार करता है वह. वे उसके चूज़ों को चर्चा में लाते हैं. यही उसका टारगेट भी होता है.

आपको ‘राष्ट्र-भक्ति’ बेचकर वे आपकी ही भावनाओ से दिमाग का शिकार करते हैं, आपको पता भी नहीं चलता.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY