शराबबंदी के बाद अब बिहार में बनेगी भी नहीं शराब, फैक्टरियों के लाइसेंस नहीं होंगे रिन्यू

पटना. बिहार की नितीश सरकार ने राज्य में लागू पूर्ण शराबबंदी के मद्देनज़र आगामी वित्त वर्ष में राज्य में चल रही सभी शराब फैक्टरियों के लाइसेंस का नवीनीकरण (रिनुअल) न करने का फैसला लिया है. इसका मतलब यह हुआ कि प्रदेश की सभी शराब और बीयर फैक्टरियां एक अप्रैल को बंद हो जाएंगी.

पिछले साल अप्रैल में राज्य में लागू पूर्ण शराबबंदी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए यह कदम उठाया जा रहा है. मंगलवार को राज्य कैबिनेट की हुई बैठक में यह निर्णय लिया.

दरअसल शराबबंदी के बाद से ही राज्य सरकार पर प्रदेश की शराब और बीयर फैक्टरियों को बंद करने का दबाव था.

शराबबंदी के बाद इन कंपनियों में शराब और बीयर तो बनती थी, लेकिन उसकी बिक्री राज्य के बाहर होती थी. डिजिटल लॉक्ड वाहनों से इन्हें राज्य के बाहर भेजा जाता था.

कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इन फैक्टरियों के लाइसेंस का रिनुअल तभी किया जायेगा, जब वे शराब और बीयर की जगह दूसरे पेय पदार्थों का उत्पादन करेंगी.

कैबिनेट के प्रधान सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने कैबिनेट की बैठक के बाद बताया कि राज्य में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध के बाद भी वर्तमान में भारत निर्मित विदेशी शराब की 12, ईएनए की छह और बेवरेजेज की तीन फैक्टरियां हैं.

मेहरोत्रा ने कहा, लाइसेंस का नवीकरण नहीं होने से ये सभी प्लांट बंद हो जायेंगे, लेकिन यदि ये प्लांट यहां काम करना चाहते हैं, तो वे दूसरे पेय पदार्थ का निर्माण कर सकते हैं, तभी उन्हें लाइसेंस भी दिया जायेगा.

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