मंटो मेरा दोस्त मेरा दुश्मन

मंटो…… ये नाम आते ही जहन में तस्वीर उभरती है एक बेपरवाह, बेबाक, जमाने के साथ चलता जमाने से दूर, हाज़िरजवाब शख़्स की….. जितना ज़्यादा पढ़ती हूँ उसके करीब जाती हूँ. मैं इस्मत चुग़ताई नहीं जो हक़ से कह दे….. “मंटो मेरा दोस्त मेरा दुश्मन”, …. न उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’ जैसी उनकी रेडियो सहकर्मी कि लिख … Continue reading मंटो मेरा दोस्त मेरा दुश्मन