दलित महिला की बदकिस्मती कि ‘सेकुलर-सहिष्णु’ राज्य में जलाई गई ज़िंदा

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प्रतीकात्मक चित्र

बिहार के मुजफफरपुर में लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के नेता ने एक दलित महिला को खटिया में बांध कर ज़िन्दा जला दिया.

अगर आप खोज रहे होंगे कि सारे दलितों के ठेकेदारों को… तो आपको बता दूं कि अभी तो किसी के मुंह से डकार भी नहीं निकलेगी!

सोशल मीडिया के दलित (दल-हित) चिन्तक चुप है, रविश ‘कौन जात’ कुमार की प्राईम टाइम नौटंकी नहीं होगी… ध्यान से देखिए मीडिया के कलमचोर भांडों की अंतरात्मा वहीं कहीं कूड़ेदान में पड़ी हुई दिखाई देगी…

दलित (पूर्व बसपा नेताओं के अनुसार – दौलत) की बेटी मायावती का एक दौरा बिहार का बनता है… जरा जाकर नितीश-लालू की सरकार के खिलाफ कम से कम एक बार तो बोलें.

मृतक महिला महा दलित थी…. या फिर इन्हें सिर्फ यूपी के दलित ही बेचने हैं, यूपी के दलितों के वोट और उसके दम पर कमाए नोट काफी हैं पेट भरने के लिए…. या फिर बिहार जाकर बोलने पर 1992 जैसा काण्ड (गेस्ट हाउस काण्ड) दोहराए जाने का डर है…

मृतका भी प्रताड़ित-शोषित दलित थी… उसकी बदकिस्मती थी कि उसकी हत्या किसी भाजपा शासित राज्य में नहीँ, किसी सेंट्रल यूनिवर्सिटी में भी नहीँ, बल्कि एक ‘सेकुलर-सहिष्णु’ सरकार वाले राज्य बिहार में हुईं. वरना यॆ ख़बर दुनिया में बिजली की तरह फैला दी जाती और भारत को फिर से एक असहिष्णु देश घोषित किया जा चुका होता.

रोहित वेमुला जैसे फर्जी दलित का प्रोफाइल पिक रखने वाले पता नहीं किस नशे में धुत्त हैं. इस पराजित लड़के की तथाकथित आत्महत्या पर पैनल पर पैनल बैठाने वाली मीडिया का दम घुट चुका है, आवाज़ दबी है और अंतरात्मा मर चुकी है…

वैसे हुआ क्या, ये पता न हो तो जान लीजिए कि बिहार के मुजफ्फरपुर जिला के कांटी थाना अंतर्गत टरमा गांव की एक दलित बस्ती में बीती रात एक महिला को खाट में बांध आग लगा कर हत्या कर दी गयी.

मृतक महिला का नाम राजकली देवी (45) है और वह बिंदेश्वर चौधरी की पत्नी है. मृतका के पुत्र ने अपनी मां की हत्या में स्थानीय पूर्व पार्षद का हाथ होने का आरोप लगाया है.

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