काले धन के खिलाफ पीएम की लड़ाई की साख दांव पर : करना होगी SP तिवारी की वापसी और मंत्री पाठक की विदाई

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मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने 500 करोड़ के हवाला कांड को उजागर करने वाले कटनी एसपी गौरव तिवारी का तबादला कर दिया. बताया जा रहा है कि इस काण्ड के सूत्र शिवराज मंत्रिमंडल में शामिल राज्य मंत्री संजय पाठक तक पहुंच रहे थे.

[ये है मामला : 500 करोड़ का घोटाला, आरोपी भाजपा नेता के करीबी, एसपी का ट्रांसफर, जनता ने किया शहर बंद]

भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ लड़ाई के प्रधानमंत्री के आह्वान पर भीषण परेशानियां झेलते हुए आम लोगों ने नोटबंदी का भरपूर समर्थन किया. ऐसे में इतने बड़े भ्रष्टाचार की जांच कर रहे अधिकारी की जांच के दौरान, अप्रत्याशित फुर्ती दिखाते हुए स्थानांतरित कर देने गंभीर सवाल खड़े कर दिए है.

इन्हीं सवालों के जवाब माँगने के लिए कटनी की जनता ने दो दिन से शहर बंद कर रखा है. कटनी एसपी के तबादले के फैसले ने समूचे राज्य ही नहीं बल्कि देश भर में संदेह का वातावरण बना दिया है.

चूंकि इस लड़ाई का आह्वान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है, ऐसे में उन्हीं की पार्टी का एक मुख्यमंत्री अपने मंत्री के कथित कारनामों को ढंकने के लिए जांच अधिकारी का तबादला कर दे तो निश्चित ही प्रधानमंत्री की साख पर आँच आती है. जानकारी के मुताबिक़ प्रधानमंत्री कार्यालय ने एसपी तिवारी के ट्रांसफर की जानकारी प्रदेश सरकार से मांगी है.

यहाँ यह बताना उचित होगा कि कटनी के एसपी गौरव तिवारी का यह छः महीने में दूसरी बार तबादला किया गया है. प्रदेश सरकार भले ही इस ट्रांसफर को सामान्य प्रक्रिया बता रही हो लेकिन आसानी से समझा जा सकता है कि सामानी प्रक्रिया में एक पुलिस अधीक्षक का तबादला इतनी जल्दी-जल्दी नहीं किया जाता, वो भी तब जब उस पर किसी किस्म का आरोप या अनियमितता का मामला न हो.

बेहद हड़बड़ी में किए गए इस तबादले से सहज ही यह निष्कर्ष निकाला जा रहा है कि चूंकि जांच की आंच सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम राज्यमंत्री संजय पाठक की ओर आ रही थी, इसलिए ही जांच अधिकारी को हटा दिया गया. इसी निष्कर्ष के चलते कटनी की जनता उद्वेलित हुई और दो दिन से शहर को ठप कर रखा है.

कटनी के इतिहास में यह पहली बार है जब जनता ने किसी पुलिस अधिकारी का तबादला रुकवाने के लिए शहर बंद रखा. सिर्फ एक आह्वान पर पूरे शहर में सन्नाटा पसर गया. व्यापारियों ने अपनी दुकानों के शटर तक नहीं खोले.

बंद का ऐसा नजारा तो राजनीतिक पार्टियों द्वारा बुलाए जाने वाले बंद के दौरान भी नहीं देखा जा ताहै. प्रदर्शन के दौरान कहीं पर भी कानून व्यवस्था बिगड़ने, जबरदस्ती दुकान बंद करवाने सहित उपद्रव आदि की स्थिति नहीं बनी.

हालांकि इस बीच कटनी के नागरिकों ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका के जरिए कटनी के एसपी गौरव तिवारी का तबादला आदेश निरस्त किए जाने की मांग की है. साथ ही 500 करोड़ रुपए के बहुचर्चित हवाला रैकेट की जांच भी पूर्ववत रखने जाने पर जोर दिया गया है. मामले की सुनवाई इसी सप्ताह हो सकती है.

होना तो यह चाहिए था कि संदेह के दायरे में आए राज्यमंत्री जांच पूरी होने और बेदाग़ साबित होने तक खुद ही त्यागपत्र दे देते या फिर मुख्यमंत्री खुद उनका इस्तीफा लेकर भ्रष्टाचार के खिलाफ पीएम की लड़ाई में सहयोग देने की इच्छाशक्ति दर्शाते. पर ऐसा हुआ नहीं और उलटा, जांच अधिकारी ही हटा दिया गया.

यहाँ यह भी बता देना उचित होगा कि पुश्तैनी कांग्रेसी रहे संजय पाठक को स्थानीय भाजपाइयों के असंतोष की कीमत पर भारतीय जनता पार्टी में शामिल किया गया था. खनन उद्योगपति पाठक उस समय कांग्रेस के विधायक थे.

दलबदल के बाद वे इस्तीफा देकर भाजपा की टिकट से चुनाव जीतकर विधायाक बने और जल्द ही उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया. दलबदल करके आए व्यक्ति को आननफानन में मंत्री बनाने पर भी कानाफूसी उभरी थी, पर प्रदेश के निर्द्वंद्व नेता बन चुके शिवराज ने सबको खामोश कर दिया.

पाठक के पिता स्व. सत्येन्द्र पाठक कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शुमार किए जाते थे. वे प्रदेश मंत्रिमंडल में भी शामिल रहे थे. जबकि संजय पाठक की माता जी कांग्रेस की तरफ से कटनी की महापौर रह चुकी हैं.

परिपाटी के मुताबिक़ राज्य मंत्री संजय पाठक इस प्रकरण में खुद को पाक साफ़ बता रहे हैं. प्रदेश सरकार भी अपने फैसले को सर्वथा उचित और नियमानुसार बता रही है, पर मामला अब ‘परसेप्शन’ का बन गया है. और जान्च में शक़ की सुई के अलावा लोगों में यही संदेश जा रहा है कि हवाला मामले के मुख्य आरोपी सरावगी बंधुओं को राज्यमंत्री की शह हासिल है.

ऐसे में अब ये देखना है कि मुख्यमंत्री खुद, जांच अधिकारी गौरव तिवारी का स्थानान्तरण रद्द कर पाठक का इस्तीफा लेते हैं या ऐसा प्रधानमंत्री के दखल के बाद किया जाएगा. शिवराज सिंह के खिलाफ प्रदेश लगातार धधक रहे असंतोष के बीच ऐसा निर्णय भारतीय जनता पार्टी की ‘चौथी बार लगातार’ की संभावनाओं के लिए नुकसानदेह साबित होगा, पर फैसला पार्टी आलाकमान को करना है.

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