ओ मेरे सजना… लो मैं आ गयी….

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making india poem ma jivan shaifaly

ऐसे आओ
जैसे तपती धूप में
बारिश की पहली फुहार
ऐसे आओ
जैसे हहराते पतझड़ में
मदमाती वासंती बयार

ऐसे आओ
जैसे रेगिस्तानी झुलसन में
झूमती बरखा बहार

ऐसे आओ
जैसे रुकी हुई जिंदगी में
दरिया की ताज़ी धार

ऐसे आओ
जैसे ढ़लती आयु में
यौवन का श्रृंगार

ऐसे आओ
जैसे अँधेरे जीवन में
उजालों का संसार

ऐसे आओ
जैसे रिश्तों के बियाबान में
भरोसे का आधार

ऐसे आओ
जैसे बेगानों की भीड़ में
नेह का आगार

ऐसे आओ
जैसे जीवन के शोर में
संगीत का सितार

ऐसे आओ
जैसे बंजर जमीं पर
फूट पड़े फ़सलें अपार

ऐसे आओ
जैसे गूँगों के देश में
वाणी का उपहार

ऐसे आओ
जैसे निर्जन भटकन में
अपनों की पुकार

ऐसे आओ
जैसे चिर वियोग के बाद
मिले हों पहली बार
दसों दिशाओं में
गूँज उठे राग-मल्हार

ऐसे आओ
जैसे छेड़ता आए
कोई संवेदनाओं के तार
जिसका स्पर्श पाते ही
पोर-पोर में बज उठे
चेतना की झंकार

ऐसे आओ
जैसे महक उठे हों
समग्र धरती-संसार
न कोई अपना,न बेगाना
हर तरफ दिखे
बस प्यार ही प्यार

ऐसे आओ
जैसे………………

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