अपने नमूनों से कैसे निबटती है फौज, जानिए एक फौजी की ज़ुबानी

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फौजियों की जिंदगी में और कुछ हो या ना हो, कहानियां भरपूर होती हैं. और अक्सर फ़ौज़ियों को कहानी सुनाने की आदत पड़ जाती है…

अब फेसबुक पर कहानियां ही सुनाने आता हूँ, पर फौज की ऐसी कोई कहानी मैंने नहीं सुनाई जिससे कहीं से थोड़ा भी नकारात्मक चित्र बनता हो… पर यह वाली सुना रहा हूँ… पहली बार… यह बताने के लिए कि फौज अपने नमूनों से कैसे निबटती है…

2000 की बात है. एक इंजीनियर रेजिमेंट का आरएमओ बन कर गया था टेम्पररी ड्यूटी पर. एकाएक 11 बजे एडजुटेंट का फ़ोन आया, सीओ ने कहा है 12 बजे तक ओपीडी ख़त्म करके हेडक्वार्टर पहुंचो, आज स्पेशल दरबार है… किसी को मिस नहीं करना है.

जैसे-तैसे काम निबटा कर भागा-भागा पहुंचा तो देखा, पूरी रेजिमेंट जैसे सजी धजी थी. खूब धूमधाम से पी टी ग्राउंड में दरबार लगा था.

वहां एक बन्दे को फौज से निकाला जाना था… बंदा नौकरी के दूसरे साल से शुरू हो गया था. कभी छुट्टी जाता तो बिना OSL (overstay of leave) के नहीं लौटता.

कभी दारू पीकर बवाल करता, कभी रात में रेजिमेंट से गायब हो जाता… (कहाँ जाता यह नहीं ही कहूँ)… कुल मिला कर जितनी नौकरी नहीं कि उतनी तो क्वार्टर गार्ड (सेना में दी जाने वाली एक सज़ा) में काट दी…

फिर भी फौज ने उसे ठोक बजा कर रखा, और 15 साल झेला… कि कम से कम पेंशन पक्की हो जाये, बीवी-बच्चे तो भूखे ना मरें…

बन्दे की पूरी नौकरी की एक-एक चार्जशीट सूबेदार मेजर साहब ने पढ़ कर सुनाई. फिर एडजुटेंट ने उसकी नौकरी से निकालने का आर्डर पढ़ कर सुनाया जो कमांड हेडक्वार्टर से आया था.

फिर सीओ साहब के पास मार्च करके गया जिन्होंने उसकी टोपी और बेल्ट उतारी, फिर कहा – सीएचएम साहब, इसे सामान के साथ गेट के बाहर तक छोड़ कर आइये… दुबारा यह रेजिमेंट के अंदर न आये…

तो बीएसएफ के जवान की पीठ थपथपाने से पहले पता कर लीजिए…. आप सही कर रहे हैं या वो सीओ साहब सही कह रहे थे… क्योंकि फौज में तमाशे करने वालों के लिए जगह नहीं है…

फिर भी फौज सबका ख्याल रखती है… इसे तो फिर भी वीआरएस दे रही है, वरना ऐसे धूमधाम से लात मारकर बाहर करती है…

फौज में हमारे सैनिकों को और अच्छी सुविधा मिलनी ही चाहिए, और बहुत से लोगों की इसकी जायज चिंता है… पर बहुत से लोग सिर्फ इस मौके का फायदा उठा कर खूब रायता फैला रहे हैं…

और शर्तिया कहता हूँ… इन्हें रोज आलू के पराठे और दाल मखनी भी मिले ना तो फौज में चार दिन नहीं टिकेंगे… बल्कि फौज ही ऐसे नमूनों को पिछवाड़े पर चार लात मार भगा देगी.

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