उखाड़ फेंकते हैं सारे PDs को

Modesty Blaise (मोडेस्टी ब्लैज़) नाम किसी को याद है? 1963 में इस कॉमिक कैरेक्टर का सृजन हुआ था. उसे जासूसी के तहत खतरनाक कामों को अंजाम देने वाली महिला कमांडो कहा जा सकता है लेकिन जेम्स बॉन्ड जैसे अद्भुत शस्त्र उसके पास नहीं थे. दिमाग, चापल्य और निर्मम कर्तव्यनिष्ठा यही उसके लक्षण थे और शस्त्रास्त्र प्रयोग में महारत.

उसका एक सहकर्मी होता था विली गार्विन (Willie Garvin) – उसके लिए वो बहुत कुछ है, लेकिन प्रियकर नहीं. दोनों अनेक बार एक-दूसरे के लिए अपनी जान को भी खतरे में डालते है लेकिन एक दूसरे के प्रेमी नहीं हैं. रिश्ता अलग है, बिना कोई नाते का. खैर, लेकिन बात PD की है.

Modesty Blaise को ले कर 2002 तक 11 उपन्यास लिखे गए. किस उपन्यास में यह प्रसंग पढ़ा था यह तो याद नहीं, लेकिन विली गार्विन का किसी शत्रु एजेंट के साथ कटार से द्वंद्व युद्ध होता है. बीच में कोई नहीं हस्तक्षेप कर सकता. सिर्फ देख सकते है कि कौन किसकी जान लेगा.

इस वक़्त मोडेस्टी ज़रा भयभीत सी है क्योंकि उसे पता है कि विली गार्विन एक बार इसी आदमी के हाथों मरते मरते बचा है. विली के मन में उसका खौफ है जिसे मोडेस्टी PD याने psychological dominance कहती है. उसे डर है कि यह PD के कारण आज गार्विन मरेगा. वो तैयार बैठी है कि ऐसे होते ही वो उस आदमी को खत्म करेगी चाहे उसके साथ बाद में जो भी सलूक हो.

द्वंद्व जैसे आगे आगे बढ़ता है तो उसे अपना डर सत्य होते दिखने लगता है, वो अपने पिस्तौल पर हाथ कसती है. गार्विन परेशान और आतंकित दिख रहा है और शत्रु विजयी हास्य करता दिखता है. मोडेस्टी लगभग पैंतरा ले कर बैठ जाती है.

उसी क्षण विजय को अपने नजदीक पा कर खुश हुए शत्रु का ध्यान क्षण मात्र के लिए विचलित होता है और सजग गार्विन उसी वक़्त वार करता है. वार घातक नहीं होता लेकिन शत्रु हड़बड़ा जाता है.

मानसिक रूप से लगभग हार चुके गार्विन में अभी तक जीतने की ज़िद है, यह बात उसे हिला देती है, वो मानसिक रूप से इस बात को स्वीकार नहीं कर सकता. उसकी मनोदशा उसके चेहरे पर स्पष्ट दिखती है, गार्विन भी यह देख लेता है .

वही क्षण निर्णायक होता है उस द्वंद्व का. गार्विन के मन में उस शत्रु का PD – खौफ चकनाचूर हो जाता है. वह समझ जाता है कि वो हार भूतकाल थी, वर्तमान उसके हाथ में है, और अब वो जो करेगा उससे भविष्य का निर्णय होगा.

या तो भविष्य में गार्विन रहेगा या वो शत्रु. PD से मुक्त हो कर गार्विन शत्रु के वार का विश्वास से प्रत्युत्तर देता है.

मोडेस्टी की रुकी हुई सांस लौट आती हैं. वो अब रिलैक्स होती है. अब उसे पता है कि गार्विन दबाव के नीचे नहीं है और विश्वास है कि जीतेगा. चंद क्षणों में वही होता भी है.

इतनी कहानी क्यों बताई? क्योंकि हम भी ऐसे ही कई PD से पीड़ित हैं जिन्हें बनाए रखने में कांग्रेस के आशीर्वाद से वामी-कसाई-इसाइयों ने कोई कसर नहीं छोड़ी.

देखते हैं कैसे –

वामियों ने हमेशा हमें हमारी कमियां ही दिखाईं. अगर न थीं तो झूठी कमियां गढ़ीं. वो इस बात को दृढ़ता से मानते हैं कि अगर किसी देश या समाज के इतिहास को बिगाड़ सको तो उसका भविष्य भी बिगड़ेगा. यही काम उन्होने हमारे समाज के साथ किया है.

कसाइयों ने हमारे साथ खौफ की राजनीति की – मूर्तिभंजन इसी का दृश्य स्वरूप ही तो है. तुम्हारे ‘भगवान’ को हम तोड़ सकते हैं और वे हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते तो तुम हमारा क्या बिगाड़ सकोगे – उनके द्वारा मूर्तियाँ तोड़ने का यही संदेश था. हम मूर्तिपूजक थे, तो इस करतूत का समान जवाब नहीं दिया जा सका. हिन्दू भी कहीं कोई मस्जिद या मजार तोड़ते तो सही संदेश चला जाता.

इसाइयों ने हमें मानसिक रूप से कमतर बताया. अपनी शिक्षा पद्धति हम पर लाद कर, उसके तहत हमें हमेशा अपने पिछड़े होने का अहसास कराते रहे, हालांकि हमें पिछड़े रखने में भी वे अपना भरपूर योगदान देते रहे.

हमारी शिक्षा की डोर अपने हाथों में ली और सब से पहला काम ये किया कि हमें हमारी संस्कृति से अलग किया. तदुपरान्त जब हमें हमारी संस्कृति का ज्ञान न रहा तब हमें यह सिखाया कि तुम्हारी संस्कृति ऐसी है कि जिस पर तुम्हें शर्म आनी चाहिए, और हमें उसकी पूरी विकृत छवि पेश की.

उनका किया हुआ नुकसान सब से भारी है और देश अभी भी इस से उबरा नहीं है और इसके लिए वामियों के सहारे वे पूरी तरह प्रयासरत है कि यही स्थिति बनी रहे.

खैर, कोई और संस्कृति होती तो कब की मिट चुकी होती, अगर हम मिटे नहीं तो यह भारत माता का हमें आशीर्वाद है, इस देवभूमि को अभी भी हम से आशा है.

उखाड़ फेंको यह सभी PD, अब भारत बदल रहा है! देश के शत्रुओं का विनाश हो!

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