सपा के गढ़ में मोदी की आवाज जिन्दा है, इसलिए सेक्युलर बहुत शर्मिंदा है

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परसो बच्चो को लेकर झारसुगुड़ा (ओडिशा )के मनमोहन ग्राउंड के मेले में गया था, छोटे से ग्राउंड में दो सौ से अधिक छोटे बड़े स्टाल, ग्राउंड के एक हिस्से में ओड़िया कल्चरल प्रोग्राम चल रहा था, दस रुपये से लेकर हजार तक के सामानों की बिक्री धड़ल्ले से चल रही थी.

सभी झूलो में बच्चो की लाइन, खाने वाले दुकानों पर भयंकर भीड़, इस बीच एक पॉकेटमार भी पब्लिक के हाथो चढ़ गया. मेले से बहार निकलने में पसीने छूट गए. रस्ते भर सोचता रहा, ये नोटबंदी का असर इस मेले पर क्यों नहीं दिखा? इतनी भीड़ जो दनादन खरीदारी कर रही थी वो परेशान क्यों नहीं है? भागलपुरी चादर बेचने वाला दुकानदार मस्ती में क्यों है?

हमको लगता है कमोबेश यही हाल पूरे देश का है, सेक्युलर मीडिया और सेक्युलर नेता बेचैन है और भ्रामक दुष्प्रचार में लगे है लेकिन पब्लिक है ये सब जानती है. लुटेरे नेताओं को हुए नुकसान से और उसकी तड़प में चिल्लाते नेताओं को देख जनता खुश है.

वी पर IBN7 पर प्रतीक यादव आज मैनपुरी में था, अखिलेश अखिलेश के नारे कुछ लोग लगाए, लेकिन उसी में मोदी मोदी कहने वाले भी चले आये, सब्जी मार्किट में आलू 20 रुपये का सात किलो, पाँच रुपये किलो टमाटर बेचने वाला भी मोदी भक्त निकला, सपा के गढ़ में मोदी की आवाज जिन्दा है. इसलिए सेक्युलर बहुत शर्मिंदा है.

ये शुभ संकेत है, बिपच्छ जितना नोटबंदी के खिलाफ बोलेगा, जनता की प्रतिक्रिया उतनी ही तेज होगी. बीजेपी यूपी जीत चुकी है.

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