तब वे मूर्तियां तोड़ते थे, आज पुलिस स्टेशन जलाते हैं!

तब वे मूर्तियाँ तोड़ते थे, आज पुलिस स्टेशन जलाते हैं.

तब हिन्दू मूर्ति में अपना संरक्षक देखता था इसलिये मूर्ति तोड़ी जाती थी कि देखो, हम ने आपके रक्षणकर्ता का क्या हाल बना दिया, वो आपको हम से बचा नहीं सकता, हम से डरो…

आज इसी लॉजिक के तहत पुलिस स्टेशन तोड़े-जलाए जा रहे हैं.

हमें यह दिखाने की कोशिश हैं कि ये रहे तुम्हारे बचाने वाले, हम से बच के भाग निकल रहे है.

यह नही बताते कि हिन्दू विरोधी राजनेता जो राज्य की सरकार चला रहे हैं, भीड जमा होने की जानकारी होते हुए भी वहां पर्याप्त पुलिस बल या RAF को नही भेज रहे है, और उग्र भीड पर फायरिंग का हुक्म नही दे रहे है…

अफजल खाँ ने तुलजा भवानी की मूर्ति तोड़ी, शिवाजी महाराज उस वक्त खून का घूँट पी कर रह गये…

लेकिन वक्त आने पर उन्होंने उसी अफजल खाँ का सर काट कर तुलजा भवानी के चरणों में रख दिया.

महापुरुषों से हमें सीख लेनी चाहिए, मोमिन उनके रसूल का अनुकरण करते हैं.

‘Quranic Concepts Of War’ या उसका हिन्दी अनुवाद – ‘कुरान में युद्ध की अवधारणाएं’ अवश्य पढिये, बात समझ में आ जाएगी।

बोलो छत्रपति शिवाजी महाराज की जय!

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