श्रद्धांजलि : एक बेहतरीन कलाकार जो ज़िन्दादिल इंसान भी था, लेकिन…

om puri

26 अगस्त 2012 राम लीला मैदान..

देश भर में अन्ना हजारे की आंधी चल रही थी. इससे बॉलीवुड भी अछूता नहीं था. कई फिल्मी कलाकार रामलीला मैदान आकर अन्ना के जनलोकपाल के प्रति अपना समर्थन जता चुके थे. बॉलीवुड के मंझे हुए कलाकार ओमपुरी भी रामलीला मैदान पहुंचे थे और अन्ना के समर्थन में जमकर हुंकार भरी थी. भ्रष्ट राजनेताओं को उन्होंने खूब भला-बुरा कहा.

मंच से उनको इतना जोश आ गया कि उन्होंने मीडिया जगत की एक बड़ी हस्ती पर सीधे-सीधे टिप्पणी कर डाली. यह हस्ती भी कोई ऐसी वैसी नहीं हैं, बल्कि एनडीटीवी की मैनेजिंग एडिटर बरखा दत्त हैं. चुटकी लेते हुए ओमपुरी बोले कि कहां हैं बरखा दत्त. सुना है कि कनाडा के वैंक्यूर चली गई हैं और एक जैपनिज से शादी भी कर ली है. वहां रेस्टोरेंट भी खोल लिया है. ओमपुरी अभी कुछ और बोलना ही चाह रहे थे कि तभी अन्ना की कोर टीम के एक सदस्य ने उनसे माइक लेकर कहा कि यह अन्ना का मंच है, इसलिए यहां से इस प्रकार की बातें नहीं होनी चाहिए.

तो ये था ओमपुरी जैसे बेहतरीन कलाकार के अंदर का सनकपन, और इसी सनकपन में दिए गए उदगार ने उसको इस्लामिस्तान बन चुके बॉलीवुड में कचरा बना दिया, खानों और पाकिस्तानी कलाकारों के कब्जे वाले बॉलीवुड में ओमपुरी को फिल्मे मिलना बंद हो गयी, घर की आर्थिक स्थिति गड़बड़ हो गयी, बीबी झगड़े करने लगी, बेरोजगार बेटा भी मुश्किल में फस गया.

मरता क्या नहीं करता, अपनी जीविका को फिर से पटरी पर लाने के लिए ओमपुरी गद्दारों की भाषा बोलने लगे, सेना पर अनाप शनाप बयान दे दिया, इस उम्मीद से की हरी चादर वाले उनकी झोली में दो चार फिल्मो की सौगात डाल देंगे, लेकिन उनको हरी चादरों वालो ने मायूस किया, और एक बेहतरीन कलाकार जो जिंदादिल इंसान भी था ज़लील, बदनाम होकर दुनिया को छोड़ गया.

रावण को मारने के बाद भी प्रभु राम ने उसका अंतिम संस्कार पूरी तरह मर्यादित और सम्मान से करने का आदेश दिया, अपने अंग वस्त्र से उसके शव को ढँक कर लंका भेजा .

सनातन धर्म के अपने संस्कार ख़त्म मत कीजिये, खानों, पाकिस्तानियों की फिल्मों का पुरजोर बहिष्कार करें वरना बहुत से हिन्दू कलाकार या तो गुमनामी में या ज़लील होकर मर जाएंगे.

भगवान इस महान कलाकार की आत्मा को शांति दे.

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