मोदी प्रेम तो आप छलकाते रहे, गुजरात में 2002 से लेकर 2014 में अमेरिका तक

0
87

कभी ना कभी, धीरे से ही सही, सच जुबान पर आ ही जाता है. आज राजदीप सरदेसाई भी अपने लेख ‘राज्यों के चुनाव से तय होगी मोदी की राह‘ के कम से कम शुरू और आखिर में सच कह गए. मगर यह अधूरा है.

पूरा सच है कि हिंदुस्तान में राजनीति कुछ एक परिवार के धारावाहिक सीरियल की तरह ही है जिसे टीवी परोसता रहता है और उसकी टीआरपी से की गयी कमाई का मोटा हिस्सा आप जैसे लोग खाते हैं.

अब आप को क्या नाम दिया जाए, यह मैं आप पर छोड़ता हूँ. जहां तक रही लेख के अंतिम भाग के सच की बात… तो बोरिया बिस्तर सिर्फ चुनावी विश्लेषकों का ही नहीं बंध रहा है, बल्कि विश्वसनीयता आप जैसों ने भी पूरी तरह खो दी है.

बाकी बीच के लेख में कुछ विशेष नहीं, सिर्फ आप का मोदी प्रेम (???) है जो साफ़ झलक रहा है, जो विशेष है. यह प्रेम इतना विशेष है कि उसे आप गुजरात में 2002 से लेकर 2014 में अमेरिका की सड़कों तक पर छलकाते रहे हो.

मोदी प्रेम में लोग आप को पागल ना कहने लगें इसलिए अब उसका इजहार आप बड़े नपे तुले और सधे हुए शब्दो में करते हैं. मगर वो फिर भी आप की ‘बिटवीन द लाइन’ में पढ़ा जा सकता है.

किस चुनाव से तय होगी मोदी की राह, यह तो कोई भविष्यवक्ता भी दावे से नहीं कह सकता, मगर इतना तय है कि उस राह पर आप ने कांटे बिछाने की हर बार कोशिश जरूर की, वो भी पूरे षड्यंत्र के साथ, मगर हर बार नियति मोदी की राहों में फूल परोसती रही.

और आप पीछे-पीछे अपने दामन में उन काँटों को समेटते रहे. ऐसा करने में आप इतने मशगूल रहे कि आप को यह भी होश नहीं की उन्ही काँटों से आप के कपड़े तार-तार हो रहे हैं और आप दुनिया की नज़रों में निवस्त्र होते चले गए.

यूं तो आप के पास दिखाने के लिए कोई बौद्धिकता कभी थी ही नहीं, मगर जो आप का मेकअप था, वो उतर गया और आप की कुरूपता सामने खुल कर आयी.

असल प्यार तो आपका एक परिवार से है जिसके आप दरबारी रहे हैं, मगर दुर्भाग्य से अगली पीढी का राजकुमार कोई जंग जीत नहीं पा रहा तो आप व्याकुल हैं. और आप ने अपना सारा दांव इसी राज परिवार के दत्तक पुत्र पर लगा दिया.

याद है कैसे आप के चैनल ने क्रांतिकारी… बहुत क्रांतिकारी कह कर उसी दत्तक पुत्र को स्थापित किया था. और आज आप एक बार फिर उसी दत्तक पुत्र को मात्र एक चुनाव जीतने पर भारत में स्थापित करने की बात कर रहे हैं.

यूं तो आप की भविष्यवाणी पर किसी को कोई विश्वास नहीं रहा मगर फिर भी देश के उन वरिष्ठ राजनेताओं का क्या दोष, जो पूरी जिंदगी अनेक चुनाव अपने-अपने राज्य में कई बार जीत चुके और उन्हें आप कभी भी मोदी के खिलाफ खड़ा करने का प्रयास नहीं करते. शायद वो आपकी कीमत चुकाने में सक्षम नहीं.

बहरहाल आप के गोवा मिशन का क्या हुआ जो आप अपने पसन्दीदा दत्तक पुत्र का सेनापति बन कर लड़ने वाले थे? शायद वो राह आप को आसान नहीं लगी होगी!

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY