केस को प्रभावित करने की कोशिश हैं केजरीवाल के पूर्व प्रमुख सचिव के आरोप : CBI

नई दिल्ली. अरविंद केजरीवाल के पूर्व प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई आरोप-पत्र दायर कर चुकी है, का आरोप था कि सीबीआई ने उन्हें केजरीवाल को फंसाने के लिए ‘धमकाया’ था.

इस पर सीबीआई ने राजेन्द्र कुमार के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया है. सीबीआई ने कहा कि आरोप-पत्र दाखिल होने के बाद ‘बिल्कुल बेबुनियाद आरोप’ लगाना ‘विचाराधीन मामले को प्रभावित करने की कोशिश है.’

गौरतलब है कि सीबीआई ने कुमार एवं अन्य के खिलाफ दिसंबर 2015 में मामला दर्ज किया था. दिल्ली सरकार के जिन-जिन विभागों में कुमार तैनात थे, उन विभागों से मेसर्स एंडेवर सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड को सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े ठेके दिलाने में कंपनी को मदद करने का आरोप कुमार पर है.

सीबीआई ने पिछले महीने कुमार समेत 8 अफसरों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के मामले में चार्जशीट दायर की थी. सीबीआई के मुताबिक़ आरोपियों ने 2007 और 2015 के बीच कॉन्ट्रैक्ट दिए. इसमें अफसरों को 3 करोड़ रुपए से ज्यादा का फायदा और सरकार को 12 करोड़ रुपए का घाटा हुआ.

सीबीआई के प्रवक्ता ने यह प्रतिक्रिया तब जाहिर की जब कुमार ने यह आरोप लगाते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृति मांगी कि पूछताछ करने वाले एजेंसी अधिकारियों ने उन्हें बार-बार कहा कि वह मुख्यमंत्री केजरीवाल को फंसाएं.

उल्लेखनीय है कि केजरीवाल के पूर्व प्रधान सचिव राजेन्द्र कुमार ने वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृति) मांगने के लिए दिल्ली के मुख्य सचिव को एक पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने सीबीआई पर आरोप लगाए हैं.

दिल्ली के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में 1989 बैच के आईएएस अधिकारी कुमार ने कहा, ‘मुझे बार-बार कहा गया कि यदि मैं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को फंसाता हूं तो मुझे छोड़ दिया जाएगा.’

सीबीआई के प्रवक्ता के मुताबिक़, ‘सीबीआई मीडिया के कुछ हिस्सों में राजेंद्र कुमार, आईएएस के हवाले से प्रकाशित-प्रसारित बयान या खबर को पूरी तरह नकारती है.’

सीबीआई के प्रवक्ता आर के गौड़ ने कहा, ‘राजेंद्र कुमार के ये आरोप, जो संयोग से आरोप-पत्र दाखिल होने के बाद सामने आए हैं, बिल्कुल बेबुनियाद हैं और नकारे जाते हैं कि इस मामले में गवाहों-आरोपियों को सीबीआई अधिकारियों की ओर से धमकाया गया ताकि वे एक राजनीतिक पदाधिकारी को फंसाएं.’

सीबीआई प्रवक्ता ने कहा कि यदि कथित शारीरिक हमले का कोई वाकया हुआ था तो आरोपियों के पास मौका था कि वे न्यायाधीश के सामने पेश किए जाते वक्त अदालत को इस बारे में बताएं, लेकिन ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया गया.

गौड़ ने कहा, ‘सही समय पर ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया गया, सिवाय एक व्यक्ति के और जिन्होंने आरोप लगाया, उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका भी दाखिल की, लेकिन उन्हें तब यह वापस लेना पड़ा जब अदालत ने कहा कि वह व्यवस्था को खराब करना चाह रहे हैं और जांच एजेंसी को डराने की कोशिश कर रहा है. तीन मई 2016 को ये खबर मीडिया में प्रमुखता से आई थी.’

उन्होंने कहा कि इस वक्त ऐसे बेबुनियाद आरोप लगाना एक विचाराधीन मामले को प्रभावित करने की कोशिश है.

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