बजट से क्यों डर रहे हैं विपक्षी : जेटली

नई दिल्ली. विधानसभा चुनावों से पहले आम बजट पेश करने के विरोध में विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से मुलाक़ात की. वहीं केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने विपक्षियों पर निशाना साधते हुए पूछा कि एक तरफ तो वे नोटबंदी को अलोकप्रिय फैसला बताते हैं, तो फिर वे इससे भयभीत क्यों हैं.

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने संवाददाताओं से कहा, ‘ये वे राजनीतिक दल हैं, जो कहते हैं कि नोटबंदी की लोकप्रियता बहुत कम है. तो फिर वे आम बजट से डर क्यों रहे हैं?’

वहीं मुख्य निर्वाचन आयुक्त डॉ नसीम ज़ैदी ने बताया कि ‘एक राजनैतिक दल’ ने कहा है कि केंद्र सरकार को चुनाव संपन्न होने से पहले आम बजट 2017-18 पेश करने से रोका जाना चाहिए.

जेटली से जब पूछा गया कि वर्ष 2012 में उत्तर प्रदेश सहित दूसरे राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद मार्च में बजट पेश किया गया था, तो उन्होंने कहा, यह कोई हमेशा की प्रथा (जिसका पालन किया जाए) नहीं रही.

उन्होंने कहा, ‘लोकसभा चुनावों से ठीक पहले अंतरिम चुनाव पेश किया जाता है. किसी ने उसे तो नहीं रोका. 2014 में भी आम चुनाव से कुछ ही दिनों पहले अंतरिम बजट पेश किया गया था. यह एक संवैधानिक जरूरत है.’

बता दें कि अगले वित्तवर्ष के पहले दिन से ही लोक कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च शुरू करने को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने फरवरी के अंतिम दिन बजट पेश की वर्षों पुरानी प्रथा को खत्म कर इस साल 1 फरवरी को आम बजट पेश करने का फैसला किया है.

वहीं चुनाव आयोग ने बुधवार को यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में 4 फरवरी से चुनाव शुरू कराने का ऐलान किया है.

ऐसे में कांगेस, लेफ्ट, सपा और बसपा जैसी पार्टियों ने इस कदम को लेकर आपत्तियां जताई हैं. उनका मानना है कि इस बजट में लोकलुभावन घोषणाएं कर वोटरों को प्रभावित किया जा सकता है.

हालांकि अरुण जेटली का कहना है कि आम बजट को पहले पेश करने का एक मकसद विभिन्न मदों में खर्चे को जल्द शुरू करना है, क्योंकि इससे पहले के वर्षों में यह मानसूनी महीने के बाद ही शुरू हो पाता था.

उन्होंने कहा, ‘ये वास्तविक खर्चे आधा साल बीत जाने की बजाय मानसून शुरू से पहले अप्रैल में ही शुरू हो जाने चाहिए. केंद्र के इस कदम का असल मकसद यही है और हम उस पर अडिग हैं.’

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY