भगतजी, घातक तो अंध विरोध है, ना कि अंध समर्थकों का देश प्रेम

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आज एक दैनिक समाचारपत्र में चेतन भगत के लेख ‘मोदी को अंध भक्त कैसे चोट पहुंचाते हैं‘ पढ़ा… इसलिए नहीं कि वो मेरे पसंदीदा लेखक हैं… मैंने तो उनकी लोकप्रियता में फंस कर उनका कोई उपन्यास तक नहीं पढ़ा है, और इसका कारण है उनका हल्का लेखन.

चूंकि यहाँ वो बात मोदी और उनके अंध समर्थकों की कर रहे थे तो पढ़ने की उत्सुकता जागी. मगर यहाँ भी उन्होंने निराश किया. फिर वही हल्कापन. हल्का इसलिए कि कोई गहराई नहीं. गहराई इसलिए नहीं क्योंकि कोई ज़मीनी विश्लेषण नहीं, कोई चिंतन नहीं, सत्यता की कोई परख नहीं.

वह यह नहीं समझ पाए कि आखिरकार युवा और पढ़ा-लिखा वर्ग मोदी का इतना बड़ा समर्थक क्यों है? उनका वो समर्थक, जिसे वो अंध कहना चाह रहे हैं, सिर्फ इसलिए है कि वो पिछले काफी लंबे समय से लेकर वर्तमान तक की तमाम व्यवस्थाओं से दुखी है.

वो आक्रोशित है और इसमें बदलाव चाहता है और बदलाव की कोशिश में उसे आज सिर्फ मोदी नजर आते हैं. वो अर्थशास्त्री और बडी-बड़ी शैक्षणिक संस्थाओं से पढ़े हुए तथाकथित बुद्धिजीवियों से अधिक व्यवहारिक रूप से अनुभवी और समझदार है, वो नोटबंदी के प्रयास और उसके फायदे को ज़मीनी स्तर पर जान रहा है, जिसे चेतन भगत जैसे नहीं समझ सकते.

चेतन भगत यह नहीं समझ पा रहे कि एक आम भारतीय के पास अधिक से अधिक कितने 500 और 1000 के नोट हो सकते थे? जबकि जिनके पास बोरियों में भरे रखे थे उनकी हालत क्या थी, वो टीवी और एयर कंडीशन में बैठे लोगों को नही पता.

मगर सड़क के आदमी ने देखी है. इसलिए वो इस नोट बंदी से होने वाली छोटी-मोटी मुश्किलों को झेलने के लिए तैयार रहा. वर्ना पूर्व में अनेक बार इन्ही अंध समर्थकों का दबाव रहा है, जब मोदी को अपने फैसले बदलने पड़े.

शायद चेतन भगत इन घटनाओं से अनभिज्ञ हैं जहां इन्ही अंध समर्थकों ने मोदी को अपने रास्ते बदलने के लिए मजबूर किया. और ये सभी फैसले राष्ट्र और समाज से सम्बन्धित थे.

असल में इन तथाकथित अंध समर्थकों में अधिकांश राष्ट्र भक्त हैं. इन लोगों को मोदी का अंध भक्त की जगह अंध देश भक्त कहा जाना चाहिए. ये अंध देश भक्त जब देखते हैं कि मोदी देश हित में अपने फैसले भी उनके दबाव में बदल देता है तो वो मोदी के समर्थन में और अधिक आ जाते हैं.

इस मानसिकता को अधिकांश नहीं समझ पा रहे और वही गलती चेतन भगत ने की. चेतन भगत यह नहीं समझ पाए कि आखिरकार ये लोग आपातकाल तक के लिए क्यों तैयार हैं?

चेतन भगत इसके पीछे वर्तमान व्यवस्था के प्रति उनके गुस्से को नहीं देख पाए. उनके देश प्रेम को नहीं समझ पाए, जहां वो अपने समाज के उत्थान के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं, कोई भी कष्ट झेलने के लिए भी.

चेतन भगत से अनुरोध है कि वो अंध विरोधियों का पहले अध्ययन करें, उनकी मानसिकता का विश्लेषण करें और देखे कि असल में ये लोग तो मोदी विरोध में देश और समाज का नुकसान तक करने को राजी हो जाते हैं.

ऐसे में अंध विरोध देश और समाज के लिए कितना घातक हो सकता है, यह चिंता का विषय होना चाहिए, ना कि अंध समर्थकों का देश प्रेम.

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