शकुन शास्त्र – 2 : अंधविश्वास कहकर हंसी में उड़ा देने से पहले ये ज़रूर पढ़ें

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अंधविश्वास कहकर किसी तथ्य को उड़ा देना एक बात है और उसमें सन्निहित सत्य का अन्वेषण दूसरी बात. ग्राम के लोग जानते हैं कि जब ग्राम में महामारी आनेवाली होती है, तो गोरैया पक्षी पहले से ही ग्राम को छोड़ देती है. उसी प्रकार दूसरे पशु-पक्षियों को भी आपत्ति का पूर्वज्ञान हो जाता है.

आपत्ति को सूचित करनेवाली चेष्टाएं भिन्न-भिन्न प्रकार की हैं, परन्तु पशु स्वभाव है कि उन्हें प्रसन्नता या आपत्ति की जो पूर्व सूचना अनुभव होती है, उसे वो प्रकट कर देते हैं.

जंगल में जब बाघ चलता है तो उसके साथ एक विशेष पक्षी चिल्लाते चलते हैं. बिल्ली या व्याध को देखकर पक्षी तथा गिलहरियाँ चिल्लाकर दूसरों को सावधान करती हैं. यह सब दूसरों को सूचित करने का उनका प्रयत्न नहीं है, अपितु यह उनका स्वभाव है. उनकी ऐसी चेष्टा क्यों हुई है, यह क्या सूचित करती है- यह जानना ही शकुन-ज्ञान है.

पशु-पक्षियों को यह सूक्ष्म ज्ञान कैसे होता है? इस प्रश्न का उत्तर यही है कि उनका मन प्रकृति से सहज प्रेरणा प्राप्त करने का अभ्यासी होता है. मनुष्यों में भी जो मन को अपने विचारों के प्रभाव से शून्य कर पाते हैं, वे प्रकृति की प्रेरणा ग्रहण करने लगते हैं. वे भविष्य का अनुमान करने में बहुत सफल होते हैं. विज्ञान के एक मध्यम कोटि के विद्वान की अपेक्षा एक अनपढ़ मल्लाह बिना किसी यन्त्र के नदी के जल की गहराई और आंधी का अनुमान ठीक-ठीक कर लेता है.

देखा गया है कि व्याध चाहे अच्छे वेश में अपने आखेट के साधनों को छोड़कर दूसरे ही काम से कहीं जाता हो, पर पक्षी उसे देखते ही रोष प्रकट करने लगते हैं. जो लोग पशु-पक्षियों को कष्ट नहीं देते, उनके पास पहुँचने तक अपरिचित पक्षी भी निश्चिन्त बैठे रहते हैं. जैसे पशु-पक्षी व्याध एवं सज्जन की मानसिक स्थिति का प्रभाव ग्रहण कर लेते हैं, वैसे ही दूसरे प्रभाव को भी जान लेते हैं.

फलित ज्योतिष और शकुन शास्त्र दोनों इस सिद्धांत पर स्थित है कि विश्व में जो कुछ होता है, वह पूर्व से निश्चित है. नवीन और अकस्मात् कुछ नहीं होता. ईश्वरीय सर्वज्ञता में भूत-भविष्य दोनों काल वर्तमान ही रहते हैं. घटनाएं तनिक भी इधर-उधर नहीं हो सकतीं. आप एक ज्योतिषी से कुछ प्रश्न करते हैं. वह आपसे एक पुष्प का नाम पूछता है और आपके प्रश्नों का उत्तर देता है. बात इतनी ही है कि आपने पुष्प का जो नाम बताया, उसने आपकी मानसिक स्थिति बतला दी.  ज्योतिषी जनता है कि उस समय आप दूसरे पुष्प का नाम बता ही नहीं सकते थे.

जब आपके जीवन की एक कड़ी मिल गयी तो फिर पूरा जीवन खुली पुस्तक हो गया. एक वस्त्र में से एक सूत मिल गया तो पूरे वस्त्र की रचना तक पहुँच जाना कठिन नहीं, क्योंकि रचनाक्रम तो निश्चित है. ज्योतिष शास्त्र में इसी सिद्धांत के आधार पर प्रश्न-कुण्डली बनती है.

– गीताप्रेस गोरखपुर की पुस्तक कल्याण के ज्योतिषतत्त्वांक में प्रकाशित डॉ श्री सुदर्शन सिंह जी “चक्र” के लेख से साभार

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