बंगाल के लिए कुछ कीजिए, वरना पराई हो जाएगी विवेकानंद की धरती

यदि नए साल के जश्न की दारू का नशा उतर गया हो और बिना टिकट वाली समाजवादी नौटंकी का भरपूर आनंद उठा चुके हों तो कुछ बंगाल की भी बात हो जाय!

सच पूछिए तो हम सबको बंगाल, बंगालियों के लिए नहीं अपने लिए चाहिए… वृहद हिन्दू समाज के लिए चाहिए… माँ कालिका के दर्शन के लिए चाहिए… गंगासागर के पवित्र जल के लिए चाहिए.

इसलिए, बंगाली हिन्दुओं की सभी बुराइयों को मानते और जानते हुए भी हमें बंगाल में उनकी रक्षा करने के लिए आगे आना ही होगा…

सोचिए यदि यही हाल रहा तो… कुछ वर्षों पश्चात, हमें चार-धाम की यात्रा में गंगासागर जाने के लिए भी वीज़ा लेना पड़ेगा.., कलकत्ते की माँ कालिका का दर्शन यूँ सुलभ नहीं रहेगा… विवेकानंद की धरती पराई हो जाएगी.

एक बार शांतिदूतों का पूर्ण राज्य स्थापित हो गया तो हो सकता है कि यह गंगासागर और कलकत्ता की काली जैसे स्थान सिर्फ इतिहास की पुस्तकों में सिमट जाएं… हम अपने बच्चों को पुस्तकों में दिखाएँ… या हो सकता है कि वह भी संभव न हो…

आप में से कितने लोग अब हिंगलाज माता के दर्शन हेतु पाकिस्तान जा पाते हैं…. भगवान राम के पुत्र लव का नगर ‘लाहौर’ कितनों ने देखा है?

ननकाना साहिब का गुरुद्वारा जाना अब कितना मुश्किल है? पेशावर के प्रसिद्ध शिव मंदिर में अब कौन जाता है?

‘हम सनातन हैं, हमारा कभी अंत नहीं होगा’… ऐसे वाक्यों द्वारा, हम अपनी दयनीयता को छिपाते हैं, अपनी दुर्दशा को झुठलाने का असफल प्रयास करते हैं.

यह वाक्य भी हमारा नहीं है…. यह भी इकबाल से उधार लिया हुआ है… वही इकबाल जिसे पाकिस्तान के प्रमुख निर्माताओं में गिना जाता है.

‘कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी’ से ज्यादा भ्रामक और छल भरा वाक्य दुनिया में कोई और हो ही नहीं सकता.

अपने मुँह मियां मिट्ठू बनते रहिये पर सच यह है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में हिन्दुत्व की लाश सड़ांध मार रही है और देश के भीतर कश्मीर में अपने अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा कर रही है.

यही समय है, बंगाल को कश्मीर बनने से रोकना होगा. आगे आइये… जो जहाँ भी हैं वहीँ से कुछ करे… मोर्चे निकालें… हस्ताक्षर अभियान चलायें… सोशल मीडिया पर अभियान चलाएं…

मै अपने हिस्से का काम कर रहा हूँ… यदि आप सच में हिन्दू हैं तो अपने हिस्से के गंगासागर के लिए, अपने पुरखों के उस पवित्र जल में तर्पण हेतु आगे आइये और अपने हिस्से का विरोध दर्ज कीजिए…

जय श्री राम…. जय महाकाल

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जन्म : 18 अगस्त 1979 , फैजाबाद , उत्त्तर प्रदेश योग्यता : बी. टेक. (इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग), आई. ई. टी. लखनऊ ; सात अमेरिकन पेटेंट और दो पेपर कार्य : प्रिन्सिपल इंजीनियर ( चिप आर्किटेक्ट ) माइक्रोसेमी – वैंकूवर, कनाडा काव्य विधा : वीर रस और समसामायिक व्यंग काव्य विषय : प्राचीन भारत के गौरवमयी इतिहास को काव्य के माध्यम से जनसाधारण तक पहुँचाने के लिए प्रयासरत, साथ ही राजनीतिक और सामाजिक कुरीतियों पर व्यंग के माध्यम से कटाक्ष। प्रमुख कवितायेँ : हल्दीघाटी, हरि सिंह नलवा, मंगल पाण्डेय, शहीदों को सम्मान, धारा 370 और शहीद भगत सिंह कृतियाँ : माँ भारती की वेदना (प्रकाशनाधीन) और मंगल पाण्डेय (रचनारत खंड काव्य ) सम्पर्क : 001-604-889-2204 , 091-9945438904

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