उप्र परिवर्तन रैली : संयुक्त परिवार के संस्कारों को मजबूत करने में लगे हैं प्रधानमंत्री

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हमारा देश उस घर की तरह है जिसमें संयुक्त परिवार की परम्परा की तरह सब एक साथ रहते हैं. सबके अलग अलग कमरे होने के बावजूद एक दूसरे के कमरे में आने जाने पर कोई पाबंदी नहीं है.

अलग अलग पंथ की दीवारें ज़रूर लोगों ने अपनी सुविधानुसार बना ली है लेकिन इसकी नींव में सनातन हिन्दू धर्म के संस्कार और संस्कृति की मजबूत जड़ें हैं. और उसी नींव पर यह संयुक्त परिवार वाला घर खड़ा है.

देश की प्रजा कई बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों को देखकर अचंभित होती हैं. बिलकुल वैसे ही जैसे घर की नई पीढ़ी को पुराने लोगों की नीतियाँ दकियानूसी लगती है. लेकिन घर के बड़े जानते हैं कि मौसम की मार से दरकती दीवारों की समय समय पर मरम्मत करना आवश्यक है.

और उन्हें ये भी पता है कि यदि नींव मजबूत है तो घर की दीवारें संभली रहेगी. और उन्हें इस बात का भी एहसास है कि नींव और दीवारों के लिए सबसे ज़रूरी है छत.

तो तीन बातें आप समझ लीजिये… सबसे पहली बात भगवा झंडा उठाये फिर रहे हिन्दुओं से, कि मोदीजी जानते हैं कि भारत की नींव में सनातन धर्म के संस्कार है, जिसे उन्हें किसी भी हालत में तटस्थ रखना है. यदि वो दीवारों पर ध्यान दे रहे हैं तो इसलिए क्योंकि वो नींव की मजबूती पर दृढ़ विश्वास है.

दूसरी बात सर्वधर्म समभाव पर यकीन रखने वालों के लिए हैं कि अलग अलग पंथ, मज़हब की दीवारों को मजबूती देने से ही घर सुरक्षित रहेगा… कोई एक दीवार भी दरक गयी तो पूरे घर का नक्शा बदल जाएगा. इसलिए समय समय पर मोदी जी का हर मज़हब के लोगों के प्रति उदारता और उनकी उन्नति के लिए प्रयास किसी तुष्टीकरण की नीति नहीं है… उस घर की दीवारों को मजबूती देने का प्रयास है…

तीसरी बात उन लोगों के लिए जो मोदीजी की विदेश यात्राओं और विदेश नीतियों को लेकर उन पर आरोप लगाते हैं… तो ये समझिये घर केवल नींव और दीवारों से नहीं बनता, उसके लिए एक सुरक्षात्मक छत की भी आवश्यकता होती है, जो गर्मी, बरसात, ठंड, आपदा सब चीज़ों से आपको बचाती है…

सर पर छत होगी, मजबूत होगी तो घर के सदस्यों को पता भी नहीं चलेगा… कब बारिश हो गई और कब तूफ़ान आया और कब आग के ओले पड़े….

यकीन न हो तो सीरिया, इराक या बलूचिस्तान के लोगों से पूछो जिनकी छत से जब तब लहू टपकता रहता है…

आज की लखनऊ परिवर्तन रैली में सबसे अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने इन्हीं बातों का ज़िक्र करते हुए कहा- बाकी दलों के लिए ये चुनाव अपने अपने दल बचाने का, हार जीत का चुनाव हो सकता है लेकिन भारतीय जनता पार्टी के लिए यह चुनाव जिम्मेवारी का चुनाव है… साम्प्रदायिक सद्भावना की जिम्मेवारी का वास्ता देते हुए उन्होंने सबका साथ सबका विकास का नारा बुलंद किया….

वो जानते हैं कि वोट बैंक की राजनीति के आगे यदि कोई सीना तान कर दृढ़ विशवास के साथ खड़ा हो सकता है तो सबका साथ सबका विकास का नारा जिसके लिए मोदीजी कृतसंकल्पित है… और यदि 14 साल बाद भाजपा सरकार उत्तर प्रदेश में आती है तो यह “राम” के वनवास से लौट आने का समय भी होगा…

बाकी समझदारों के लिए इशारा ही काफी है….

– माँ जीवन शैफाली

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