सपा का नया ड्रामा : मुलायम को हटा खुद अखिलेश बने पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष

उत्तर प्रदेश के सियासी खेल में राजा को मात देते हुए वजीर को दूध से मक्खी की तरह निकाल बाहर किया गया… मोहरों को लग रहा है वो खुद खेल रहे हैं और जनता साफ़ देख पा रही है कि इस शतरंजी बिसात के दोनों ओर से चाल चलने वाला कोई और ही है…

ये तो भविष्य ही बताएगा कि उत्तर प्रदेश के इस सियासी खेल से उठ रहे प्रश्नों का उत्तर जनता क्या देगी… कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि कहीं ये मोहरे उठा पटक करते ही न रह जाए और उत्तर प्रदेश के हाल भी अरुणाचल प्रदेश की तरह हो जाए.

खैर समाचार यह है कि लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में रामगोपाल यादव ने घोषणा की है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं. विशेष अधिवेशन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि पार्टी में नेता जी (मुलायम सिंह) की भूमिका अहम बनी रहेगी.

लेकिन उन्होंने संदेह जताया कि नेताजी के करीबी लोग उन्हें गुमराह कर सकते हैं. अधिवेशन में इसके अलावा शिवपाल यादव को पार्टी के राज्य अध्यक्ष पद से हटाने की घोषणा के साथ अमर सिंह को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया.

मुलायम ने हालांकि पत्र जारी कर इस अधिवेशन को अवैध और असंवैधानिक करार दिया था. उन्होंने कहा कि अधिवेशन में शामिल होने वालों के खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्रवाई की जाएगी.

अधिवेशन में अखिलेश ने कहा कि वह पिता मुलायम का जितना सम्मान पहले करते थे, उससे कई गुना ज्यादा सम्मान आगे करेंगे. ‘अगर नेताजी के खिलाफ साजिश हो और पार्टी के खिलाफ साजिश हो तो नेताजी का बेटा होने की वजह से मेरी जिम्मेदारी बनती है कि ऐसे लोगों के खिलाफे हम खड़े हों।’

उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें ऐसी हैं जो चाहती हैं सपा की सरकार ना बनने पाये. लेकिन सरकार जब बनेगी और बहुमत आएगा तो सबसे ज्यादा खुशी नेताजी को होगी.

Agar Netaji ke khilaaf saazish ho toh Netaji ka beta hote huye meri zimmedari banti hai ki main saazish ko saamne laaon:Akhilesh Yadav pic.twitter.com/vktjyWHfiy

— ANI UP (@ANINewsUP) 1 January 2017

इससे पहले कार्यक्रम शुरू होने से ठीक पहले मुलायम सिंह यादव ने लेटर जारी कर इसे पार्टी संविधान के खिलाफ बताया उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे इसमें शामिल न हों. साथ ही किसी लेटर पर दस्तखत न करें. मुलायम ने फैसले से पहले शिवपाल यादव के साथ बैठक की थी.

अखिलेश ने सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को अधिवेशन में आने को कहा था. अखिलेश ने साबित कर दिया कि अब वो ही समाजवादी पार्टी हैं, इसलिए वो अपनी सभी बात मनवाने में सफल रहे हैं।सपा लगातार ये कह रही है कि वो राज्य की 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने को तैयार है.

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की ओर से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव की पार्टी में वापसी के ऐलान के बाद लगा कि यह झगड़ा खत्म हो गया है, लेकिन कुछ मांगों को लेकर अखिलेश खेमा अब भी अड़ा हुआ है.

State President(Shivpal Yadav) has been taking wrong decisions in the name of Netaji(Mulayam Singh Yadav): Ramgopal Yadav pic.twitter.com/zYqDJ7SUyU

— ANI UP (@ANINewsUP) 1 January 2017

गौरतलब है कि राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाने के लिए 40 फीसदी सदस्यों की मंजूरी लेनी होती है मगर अखिलेश के पास 40 फीसदी से ज्यादा का समर्थन हैं.

शनिवार सुबह अखिलेश द्वारा अपनी ताकत दिखाने के बाद पार्टी की वरिष्‍ठ नेताओं की मध्‍यस्‍थता में सुलह का रास्‍ता निकाला गया. नतीजतन इन दोनों नेताओं की 24 घंटे के भीतर ही पार्टी में वापसी हो गई. इस पूरी सियासी उठापठक में कहा गया कि शह-मात के खेल में अखिलेश यादव ने यह बाजी जीती और पार्टी में अपने विरोधियों को पछाड़कर मुलायम सिंह के बाद पार्टी के निर्विवाद रूप से सबसे बड़े नेता के रूप में अब स्‍थापित हो गए हैं.

Mulayam Singh Yadav writes letter to party workers, asks them not to attend National Executive meet called by Ramgopal Yadav pic.twitter.com/cigXo5sSn8

— ANI UP (@ANINewsUP) 1 January 2017

पार्टी से निष्‍कासन के बाद भी अखिलेश और रामगोपाल झुकने से इनकार करते हुए महाअधिवेशन बुलाने पर अड़े रहे थे. अब वापसी के बावजूद और पार्टी अध्‍यक्ष की इच्‍छा के बगैर इस तरह के कार्यक्रम को आयोजित करने से यही संदेश जा रहा है कि पार्टी में अब अखिलेश यादव को नजरअंदाज करना असंभव है.

सपा समर्थक अखिलेश को नई भूमिका में भी देखना चाहते हैं. कहा जा रहा है कि अगर पार्टी जीतती है तो सीएम अखिलेश ही बनेंगे. अखिलेश 403 सीटों पर उम्मीदवारों का एलान करने के लिए आजाद होंगे, साइकिल का चुनाव चिन्ह भी वही बाटेंगे और अखिलेश का विरोध करने वाले नेता हाशिए पर चले जाएंगे.

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