PM Modi Live : कुछ तो बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र के नाम संदेश दे रहे हैं. माना जा रहा है कि मोदी मिडिल क्लास और किसानों के कर्ज को लेकर कोई अहम एलान कर सकते हैं. 30 दिसंबर को 500-1000 के पुराने नोट बैंक में जमा करने का आखिरी दिन था. 8 नवंबर को मोदी ने देश के नाम संदेश में 500 और 1000 के नोटों को बंद करने का एलान किया था.

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मोदी ने कहा, हमारे राष्ट्र जीवन और समाज जीवन में भ्रष्टाचार, कालाधन और जाली नोटों के जाल में ईमानदार को भी घुटने टेकने को मजबूर कर दिया था.

उसका मन स्वीकार नहीं करता था लेकिन उसे परिस्थितियों को सहना-स्वीकार करना पड़ता था। दीपावली की घटना के बाद यह सिद्ध हो चुका है कि करोड़ों देशवासी ऐसी घुटन से मुक्ति के लिए प्रयास कर रहे थे.’

ईश्वरदत्त मानव स्वभाव अच्छाई से भरा रहता है. लेकिन बुराइयों के चलते वह घुटन महसूस करता है. घुटन से बाहर निकलने के लिए वह छटपटाता रहता है.

नई उमंग, नया जोश, नए सपने लेकर नववर्ष का स्वागत करेंगे. दीपावली के तुरंत बाद हमारा देश ऐतिहासिक शुद्धि यज्ञ का गवाह बना है. सवा सौ करोड़ देशवासियों के प्रयत्न से ये जो शुद्धि यज्ञ चला, आने वाले वर्षों में यह अहम भूमिका निभाएगी.

चाहे 1962 की लड़ाई हो, 1965 की लड़ाई हो, कारगिल की लड़ाई हो, हमने भारत की जनता की शक्तियों के दर्शन किए हैं. कभी-न-कभी बुद्धिजीवी वर्ग इसकी चर्चा जरूर करेगा कि देश के कोटि-कोटि नागरिक अपने ही देश के भीतर घर कर चुकी विकृतियों-बुराइयों के खिलाफ लड़ाई लड़ने उतरते हैं तो वह घटना हर किसी को नए सिरे से सोचने के लिए प्रेरित करती है.

दीपावली के बाद लगातार देशवासी दृढ-संकल्प अप्रतिम धैर्य के साथ त्याग की परिकाष्ठा करते हुए, कष्ट झेलते हुए बुराइयों को पराजित करने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. जब हम कहते हैं कि कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी… इस बात को देशवासियों ने जीकर दिखाया है…..

कभी लगता था कि सामाजिक जीवन की बुराइयां-विकृतियां जाने-अनजाने, इच्छा-अनिच्छा से हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गई हैं लेकिन 8 नवंबर के बाद की घटनाएं हमें दोबारा विचार करने के लिए मजबूर करती हैं…..

8 नवंबर के बाद काल के कपाल पर अंकित हो चुका है कि जनशक्ति का सामर्थ्य क्या होता है. उत्तम अनुशासन किसे कहते हैं. सत्य को पहचानने की विवेक किसे कहते हैं। गरीबी से बाहर निकलने को आतुर जिंदगी क्या-कुछ नहीं कर सकती. देशवासियों ने जो कष्ट झेला है, वह भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए त्याग की मिसाल है. सवा सौ करोड़ देशवासियों ने संकल्पबद्ध होकर उज्ज्वल भविष्य की आधारशीला रखी है. जब आंदोलन होते हैं तो सरकार और जनता आमने-सामने होती है। ये इतिहास की ऐसी मिसाल है, जिसमें सचाई और अच्छाई के लिए सरकार और जनता दोनों मिलकर कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ रहे हैं…..

मैं जानता हूं कि आपको परेशानी हुई. घंटों लाइनों में लगना पड़ा. मुझे चिट्ठियां मिलीं. अपना दर्द भी साझा किया. इन सबमें एक बात अनुभव की कि आपने मुझे अपना मानकर बातें कहीं. भ्रष्टाचार, कालाधन, जाली नोट के खिलाफ लड़ाई में आप एक कदम भी पीछे नहीं रहना चाहते.

आपका ये प्यार आशीर्वाद की तरह है. अब प्रयास यह है कि नववर्ष में हो सकते उतना जल्दी बैंकों को सामान्य स्थिति की ओर ले जाया जाएगा. खासकर ग्रामीण इलाकों और दूरदराज वाले इलाकों में प्रो-एक्टिव होकर कमियों को दूर किया जाए ताकि गांव के नागरिकों की कठिनाई खत्म हो जाएं….

हिंदुस्तान ने जो कर दिखाया, वैसा दुनिया में कोई और उदाहरण नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में 500 और 1000 के नोट सामान्य रूप से कम और पैरेलल इकोनॉमी में ज्यादा चल रहे थे. हमारे समकक्ष देशों की इकोनॉमी में भी इतना कैश नहीं होता.

हमारी इकोनॉमी में ये नोट महंगाई, कालाबाजारी बढ़ा रहे थे और देश के गरीब से उसका अधिकार छीन रहे थे. अर्थव्यवस्था में कैश का अभाव तकलीफदेह है लेकिन हम ये भी ना भूलें कि कैश का असर और तकलीफदेह होता है. हमारा प्रयास है कि इसका संतुलन बना रहे….

इन दिनों करोड़ों देशवासियों ने जिस धैर्य, अनुशासन अौर संकल्प शक्ति के दर्शन कराए हैं. अगर आज लाल बहादुर शास्त्री, जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया या कामराज होते तो देश को अाशीर्वाद देते.
ये देश के लिए शुभ संकेत हैं कि नागरिक मुख्यधारा में वापस आना चाहते हैं. लोगों ने कानून का पालन किया है. ये अप्रत्याशित है. और सरकार इसका स्वागत करती है.

हम कब तक सच्चाइयों से मुंह मोड़ते रहेंगे. मैं आपके सामने जानकारी साझा करना चाहता हूं. इसे सुनने के बाद आप या तो हंस पड़ेंगे या गुस्सा फूट पड़ेगा. आपको जानकर हैरानी होगी कि देश में सिर्फ 24 लाख लोग ये स्वीकारते हैं कि उनकी आय 10 लाख रुपए सालाना से ज्यादा है. क्या किसी देशवासी के गले ये बात उतरेगी?

आप भी अपने आसपास बड़ी-बड़ी कोठियां-गाड़ियां देखते होंगे. किसी एक बड़े शहर में आपको सालाना 10 लाख से अधिक आय वाले लाखों लोग मिल जाएंगे. देश की भलाई के लिए ईमानदारी के आंदोलन को अधिक ताकत देने की जरूरत है….

पूरी दुनिया में सत्य है कि आतंकवाद से जुड़े लोग, काली कमाई करने वाले कालेधन पर निर्भर रहते हैं. हमारे एक निर्णय ने इस सब पर गहरी चोट पहुंचाई है. अगर हम जागरुक रहे तो अपने बच्चों को हिंसा के रास्ते पर जाने से बचा पाएंगे.

इस अभियान की सफलता इस बात पर भी है कि अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जो धन बाहर था, वह वापस आ गया है. पिछले कुछ दिनों की घटना से यह साबित हो चुका है कि चालाकी करने वालों के लिए आगे के रास्ते बंद हो चुके हैं. आदतन बेईमान लोगों को भी टेक्नोलाॅजी के कारण मुख्यधारा में आना होगा….

बैंक कर्मियों ने दिन-रात एक किया है. महिलाओं ने काम किया है. आपके इस अविरत प्रयास के बीच कुछ बैंकों में कुछ लोगों के गंभीर अपराध भी सामने आए. कहीं-कहीं सरकारी कर्मचारियों ने गंभीर अपराध किए हैं और आदतन फायदा उठाने का निर्लज्ज प्रयास हुआ है. इन्हें बख्शा नहीं जाएगा.

देश के बैंकिंग सिस्टम के लिए यह स्वर्णिम अवसर है. मैं देश के सभी बैंकों से आग्रहपूर्वक एक बात कहना चाहता हूं कि इतिहास गवाह है कि हिंदुस्तान की बैंकों के पास इतनी बड़ी मात्रा में इतना धन का भंडार पहले कभी नहीं आया था. बैंकों की स्वतंत्रता का आदर करते हुए कहना चाहता हूं कि बैंक परंपरागत तरीकों से बाहर निकलते हुए वे गरीब, निम्न मध्यमवर्ग और मध्यमवर्ग को ध्यान रखकर काम करे. बैंक हो सके उतना जल्दी लोकहित में उचित निर्णय करें और उचित कदम उठाएं….

हम कब तक सच्चाइयों से मुंह मोड़ते रहेंगे। मैं आपके सामने जानकारी साझा करना चाहता हूं। इसे सुनने के बाद आप या तो हंस पड़ेंगे या गुस्सा फूट पड़ेगा. आपको जानकर हैरानी होगी कि देश में सिर्फ 24 लाख लोग ये स्वीकारते हैं कि उनकी आय 10 लाख रुपए सालाना से ज्यादा है.

क्या किसी देशवासी के गले ये बात उतरेगी? आप भी अपने आसपास बड़ी-बड़ी कोठियां-गाड़ियां देखते होंगे। किसी एक बड़े शहर में आपको सालाना 10 लाख से अधिक आय वाले लाखों लोग मिल जाएंगे. देश की भलाई के लिए ईमानदारी के आंदोलन को अधिक ताकत देने की जरूरत है…

कानून अपना काम करेगा. पूरी कठोरता से करेगा. सरकार के लिए यह भी प्राथमिकता है कि ईमानदारों को मदद और सुरक्षा कैसे मिले. ईमानदारी की जिंदगी बिताने वालों की कठिनाई कैसे कम हो. ईमानदारी अधिक प्रतिष्ठित कैसे हो. ये सरकार सज्जनों की मित्र है और दुर्जनों को सज्जनता के रास्ते पर लाने के लिए उपयुक्त वातावरण बनाने के पक्ष में है. ये भी कड़वा सच है कि लोगों को सरकार की व्यवस्था, सरकार के अफसरों और लालफीताशाही के चलते कड़वे अनुभव होते हैं. इस बात से कौन इनकार कर सकता है कि नागरिकों से ज्यादा जिम्मेदारी सरकार में बैठे अफसरों की है…..

गांव, गरीब, किसान, शोषित, वंचित और महिलाएं जितनी सशक्त होंगी, आर्थिक रूप से पैरों पर खड़ी होंगी, देश उतना ही मजबूत बनेगा और विकास होगा. सबका साथ, सबका विकास. इस ध्येय वाक्य काे चरितार्थ करने के लिए नववर्ष की पूर्व संध्या पर देश के सवा सौ करोड़ देशवासियों के लिए सरकार कुछ नई योजनाएं ला रही है.

स्वतंत्रता के इतने साल बाद भी देश में लाखों गरीबों के पास अपना घर नहीं है. जब अर्थव्यवस्था में कालाधन बढ़ा तो मध्यमवर्ग की पहुंच से घर दूर हो गया था. गरीब, निम्न मध्यमवर्ग और मध्यमवर्ग घर खरीद सकें इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरों में इस वर्ग को नए घर देने के लिए दो नई स्कीम बनाई गई हैं.

इसके तहत 2017 में घर बनाने के लिए 9 लाख रुपए तक के कर्ज पर ब्याज में 4 प्रतिशत की छूट मिलेगी और 12 लाख रुपए तक के कर्ज पर ब्याज में 3 प्रतिशत की छूट दी जाएगी. सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गांवों में बनने वाले घरों की संख्या को भी बढ़ा दिया है. पहले जितने घर बनते थे, उनसे 33 प्रतिशत ज्यादा घर बनाए जाएंगे. गांव में रहने वाले जो लोग 2017 में अपना घर बनाना चाहते हैं या पुराने घर में एक-दो कमरे या मंजिल बनाना चाहते हैं, उन्हें दो लाख रुपए तक के कर्ज में तीन प्रतिशत ब्याज की छूट दी जाएगी…..

देश में माहौल बना था कि खेती नहीं हो रही. लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में रबी की बुवाई में 6 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. फर्टिलाइजर भी 9 प्रतिशत ज्यादा उठाया गया है. किसानों को दिक्कत ना हो, ये ध्यान रखा गया. किसान भाइयों के हित में और अहम निर्णय लिए गए हैं.

डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक और प्रायमरी सोसायटी से जिन किसानों ने बुवाई के लिए कर्ज लिया था, उस कर्ज के 60 दिन का ब्याज सरकार वहन करेगी और किसानों के खातों में ट्रांसफर करेगी। इनसे और ज्यादा कर्ज किसानों को मिल सके, उसके लिए उपाय किए हैं। नाबार्ड ने पिछले महीने 21 हजार करोड़ की व्यवस्था की थी। सरकार इसे दोगुना करते हुए इसमें 20 हजार करोड़ रुपए और जोड़ रही है। इसे नाबार्ड कम ब्याज पर लोन देगा और नाबार्ड को होने वाले नुकसान को सरकार वहन करेगी। सरकार ने यह भी तय किया है कि अगले तीन महीने में तीन करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड को रुपे कार्ड में बदला जाएगा। किसान क्रेडिट कार्ड में एक कमी यह थी कि पैसे निकालने के लिए बैंक जाना पड़ता था। अब जब किसान क्रेडिट कार्ड को रुपे कार्ड में बदला जाएगा तो किसान कहीं पर भी अपने कार्ड से खरीद-बिक्री कर पाएगा…

जो कारोबारी साल में दो करोड़ रुपए तक का कारोबार करते हैं, उनके टैक्स की गणना 8 प्रतिशत आय को मानकर की जाती थी। अब वे डिजिटल लेनदेन करेंगे तो 6 प्रतिशत आय मानी जाएगी। इस तरह उनका टैक्स काफी कम हो जाएगा।

एमएसएमई यानी लघु, मध्यम उद्योगों का भी खेती जैसा महत्व है। सरकार ने तय किया है छोटे कारोबारियों के लिए क्रेडिट गारंटी 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर दो करोड़ रुपए की जाएगी। भारत सरकार एक ट्रस्ट के जरिए बैंकों को यह गारंटी देती है कि आप छोटे व्यापारियों को लोन दीजिए, गारंटी हम लेते हैं। एक करोड़ रुपए तक का लोन कवर किया जाता था। अब दो करोड़ रुपए तक का लोन क्रेडिट गारंटी से कवर होगा। नाॅन बैकिंग फाइनेंशियल कंपनियों से दिया गया लोन भी कवर होगा। इससे छोटे दुकानदार, छोटे उद्योगों को मिलेगा। गारंटी का खर्च केंद्र वहन करेगा, इसके चलते कर्ज पर ब्याज दर भी कम होगी। सरकार ने बैंकों काे यह भी कहा है कि छोटे उद्याेगों के लिए कैश क्रेडिट लिमिट 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करें। डिजिटल ट्रांजैक्शन पर वर्किंग कैपिटल लोन 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने को कहा गया है। नवंबर में इस सेक्टर से जुड़े बहुत लोगों ने कैश डिपॉजिट किया है। बैंकों से यह संज्ञान लेने को कहा गया है।

सरकार का मुद्रा योजना को डबल करने का इरादा है। मैं माताओं-बहनों से भी कहना चाहता हूं कि गर्भवती महिलाओं के लिए देशव्यापी योजना की शुरुआत की जा रही है। देश के सभी 650 से ज्यादा जिलों में सरकार गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में डिलिवरी, टीकाकरण और पौष्टिक आहार के लिए छह हजार रुपए की मदद देगी। ये राशि सीधे उनके खाते में जमा होगी। देश में माता मृत्यु दर को कम करने में इस योजना से बड़ी सहायता मिलेगी। अभी सिर्फ चार हजार रुपए की मदद 53 जिलों में महिलाओं को दी जा रही है।

सरकार वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी एक स्कीम शुरू करने जा रही है। बैंक में ज्यादा पैसा आने पर अक्सर डिपॉजिट पर ब्याज घट जाता है। वरिष्ठ नागरिकों पर इसका प्रभाव न हो। इसके लिए साढ़े सात लाख रुपए की राशि पर 10 साल के लिए सालाना आठ प्रतिशत ब्याज सुरक्षित किया जाएगा। ब्याज की यह राशि नागरिक हर महीने प्राप्त कर सकेंगे….

अब वक्त आ गया है कि सभी नेता और दल जनता के आक्रोश को समझें और ईमानदार लोगों का आदर करें। ये बात सही है कि राजनीतिक दलों ने समय-समय पर सार्थक प्रयास किए हैं। सभी दलों ने स्वेच्छा से अपने ऊपर बंधनों को स्वीकार किया है। आज आवश्यकता है कि सभी राजनेता और सभी राजनीतिक दल हॉलियर दैन काऊ से अलग हटकर भ्रष्टाचार और कालेधन से राजनीति को मुक्त कराने में कदम उठाएं। आम लोगों से राष्ट्रपतिजी तक सभी ने साथ-साथ चुनाव कराने को कहा है। आए दिन चल रहे चुनावी चक्र और उससे उत्पन्न बोझ से मुक्ति पाने की बात कही है। अब इस पर सार्थक बहस करने का वक्त आ गया है……

 

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