हक और न्याय की लड़ाई में लक्ष्मी को चाहिए सबका साथ

यह तस्वीर लक्ष्मी देवी पुत्री चरन सिंह, गांव बेरिया, थाना केला खेड़ा, जिला उधमसिंह नगर, उत्तराखंड और दिलीप सिंह पुत्र धरम सिंह, निवासी बेरिया, जिला उधमसिंह नगर, उत्तराखंड की है.

लक्ष्मी और दिलीप दोनों ही दलित जाति से हैं और लक्ष्मी का परिवार बेहद गरीब है, तिस पर पिता घोषित शराबी. जबकि दिलीप का परिवार अपेक्षाकृत सम्पन्न और सामर्थ्य वाला है.

आप सोच रहे होंगे कि मैं इन दोनों की कहानी आपको किस लिए सुना रहा हूँ! आइये पूरी कथा ही न सुनिये बल्कि मेरी मदद भी कीजिये, आज आप सभी से सहयोग की अपील कर रहा हूँ. आर्थिक नहीं, सामाजिक धर्म की.

दिलीप साल 2011 में लक्ष्मी के संपर्क में आया और दोनों में प्रेम संबंध कायम हो गए. बिना माँ, एक मजदूरी करने वाले भाई और शराबी पिता के बिसात वाली लड़की की मुहब्बत बिना रोक-टोक दिलीप के साथ 2014 तक आगे बढ़ती रही.

चूंकि दिलीप आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत था इसलिए लड़की ने भी अपने परिवार की स्थितियों को देखते हुए, शादी की शर्त पर संबंध आगे बढ़ाते हुए अपने सुखद भविष्य के सपने बुनने शुरू कर दिए. बिरादरी एक थी इसलिए सामाजिक भय भी जाता रहा.

कहानी में मोड़ आया साल 2014 की जनवरी में, जब लड़की के पिता और भाई ने उसका रिश्ता कहीं और तय कर दिया. लक्ष्मी ने यह खबर दिलीप को देते हुए दबाव बनाया कि वह उसके घर वालों से बात करे और कहे कि वो शादी करेगा.

लेकिन लड़के ने उसे सही वक्त का हवाला देते हुए चुप करा दिया. लड़की के लगातार दबाव बनाने पर उसने लक्ष्मी को झांसे में लेते हुए घर से भाग जाने को तैयार कर लिया और शादी के कुछ दिनों पहले ही लक्ष्मी को घर से एक शाम भगा कर गांव के नजदीकी रेलवे स्टेशन बेरिया दौलतपुर ले गया. जहां ट्रेन के इंतजार की बात कह कर लड़की को प्लेटफार्म की एक बेंच पर बैठाया और वहां उसे छोड़ के गायब हो गया.

पूरी रात एक हॉल्ट स्टेशन पर अपने प्रेमी और भावी जीवनसाथी की प्रतीक्षा करने के बाद छली गयी लक्ष्मी, वापस अपने घर पहुंची तो जरूर, लेकिन उसने पिता द्वारा तय की गयी शादी करने से इंकार कर दिया और दिलीप की खोज में जुट गयी.

जानते हैं! दिलीप तो मिला, लेकिन लक्ष्मी को नहीं, उसकी अपने प्यार, धोखे और शोषक की तलाश आज भी जारी है. थाने, कोर्ट, हाईकोर्ट से लेकर ऊपर वाले की चौखट तक.

दिलीप मिला, लेकिन जानते हैं कहां? उत्तराखंड के एक हॉल्ट स्टेशन से अपनी प्रेमिका को बेंच पर लावारिस छोड़ कर फरार हुआ दिलीप, अफ्रीका के देश घाना में बरामद हुआ.

दिलीप अपने रिश्तेदारों (जिनमें उसका जीजा देवी सिंह, आयकर उपायुक्त, मुख्य संरक्षक है) की मदद से घाना में न सिर्फ व्यवसाय कर रहा है बल्कि एक संपन्न जीवन जी रहा है.

दिलीप ने अपने जीजा, आयकर अधिकारी देवी सिंह, की अवैध कमाई को घाना के व्यवसाय में न सिर्फ लगाया है बल्कि उसे मैनेज भी कर रहा है.

आइये लौटते हैं लड़की यानी लक्ष्मी पर. लक्ष्मी ने दिलीप पर शादी के नाम पर शारीरिक, मानसिक और सामाजिक शोषण के आरोपों को लेकर पुलिस में एफआईआर करवा कर अपने हक और न्याय की लड़ाई शुरू की, लेकिन समर्थ और संपन्न दिलीप और उसके रिश्तेदारों ने उत्तराखंड, उधमसिंह नगर की पुलिस को कायदे से ‘समझा’ लिया और लड़की को निराशा के अलावा कुछ भी हासिल नहीं हुआ.

लड़की ने हार नहीं मानी और कुछ सामाजिक लोगों की मदद और सहयोग से मामले को जिला और फिर नैनीताल हाईकोर्ट तक ले गयी.

आज पीड़िता के पक्ष में आरोपी दिलीप के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट है, टिप्पणियां और आदेश है, लेकिन दिलीप अब भी लक्ष्मी, उत्तराखंड पुलिस, कोर्ट की पहुंच से हजारों मील दूर घाना में खुशहाल है.

घाना के एक समारोह में दिलीप

बीते दो महीने पहले ही दिलीप ने भारत में चल रहे इस मुकदमे और मसले के बाद घाना में ही दूसरी शादी कर ली है और देश छोड़ने के निर्णय के हिसाब से वहीं स्थाई तौर पर बसने की तैयारी में है.

तस्वीर में दिख रही अफ़्रीकी लड़की वह नहीं जिससे आरोपी दिलीप ने शादी की. यह गुप्त तौर से किसी समारोह में ली गयी तस्वीर है.

मैं आप सभी से अपील करूँगा इस मामले में विदेश मंत्रालय और आदरणीया सुषमा स्वराज जी तक इस पीड़िता की आवाज पहुंचाने में हमारी मदत करिये.

मेरे ट्विटर हैंडल @Kr Awanish पर जाइये या https://twitter.com/KrAwanish/status/814366584718430210 लिंक से इस विषय के मेरे ट्वीट को आदरणीया मंत्री जी, पीएमओ को टैग करते हुए न केवल खुद रीट्वीट कीजिये बल्कि लोगों से अधिक से अधिक रीट्वीट कराइये.

सोशल मीडिया एक पीड़िता की जिस रूप में मदद कर सकता है, उसे निभाइये. इसे एक सामाजिक आंदोलन बनाइये और नागरिक धर्म का निर्वहन करिये.

इस पूरे मामले को उठाने और लंबे समय से पीड़िता के साथ न्याय की खातिर संघर्ष के लिए अफ्रिका से देश तक झंडा बुलंद करने वाले मित्र Santosh Kumar Singh और विधिक सहयोग के लिए… वकील मित्र Chegvewara Raghuvanshi जी को मैं सलाम करूँगा और इस नागरिक-सामाजिक संघर्ष में उनका बिसात भर साथ देने का वचन दूंगा. आप सभी से लेख को साझा (शेयर) करने के सहयोग की अपेक्षा रहेगी.

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