ऐसे विश्व रैंकिंग में पिछड़ते हैं भारतीय IIT : भाग 1

2009 में भारत की IIT ने Harvard, MIT, Princton, Oxford, Cambridge को पीछे छोड़ दिया था. मामला था कि कोई संस्थान अपने यहाँ से कितने Enterpreneur तैयार करता है, कितने start-up देता है.

ये एक बड़ी चोट थी Ivy League के इन संस्थानों के लिए… इसके बाद तुरन्त इन्होंने लिस्ट और रैंकिंग बनाने की पद्धति में बदलाव किया कि इन start-up और enterpreneur तैयार कर कौन सी संस्था ज्यादा फण्ड इकट्टा करती है.

इसमें IIT ने पांचवा स्थान हासिल किया. इसमें भी University of California, MIT, Cornell, Oxford, Cambridge पीछे छूट गया….

अब फिर से रैंकिंग के मामले में चोट लग गई…. इस रैंकिंग में IIT कानपुर, दिल्ली, मुम्बई, रुड़की, खड़गपुर और मद्रास के डाटा को लेकर लिस्ट तैयार की गई थी….

इसके बाद खेल और हुआ…. लिस्ट में सारी IIT जो कि अभी पिछले वर्ष ही खुली हैं और जिनका पहला बैच निकला नहीं बल्कि अभी पहला वर्ष ही हुआ है, उसको भी शामिल कर लिया गया….

फिर कहा गया कि सिर्फ उन enterprenuer और start up को माना जाएगा जो कि कैलिफ़ोर्निया के सिलिकॉन वैली में चालू हुई हैं…. अब IIT को पिछड़ना ही था… रैंक आ गयी 16…

2009 की रैंकिंग के समय Wall Street Journal ने हैडलाइन छापी थी… “Why India’s best tech schools produce more entrepreneurs than the Ivy League.”

अब इस नयी रैंकिंग के बाद Wall Street Journal ने हैडलाइन छापी… “How Could India’s IITs Do so Badly in a Global Ranking of Engineering Schools?”

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