NDTV निदेशक ने कबूले अपने पाप

एनडीटीवी के निदेशक और कार्यकारी वाइस चेयरमैन के.वी.एल. नारायण राव ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के सामने NDTV का कच्चा चिट्ठा बयान कर दिया है. अपने 33 पन्ने के इकरारनामे में उन्होंने बताया है कि कैसे विदेशी निवेश के नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए काला धन बनाया. अपनी स्वीकारोक्ति में नारायण राव तफसील से बताते हैं, कि कैसे बेनामी कंपनियां बना कर एक से दूसरी, दूसरी से तीसरी कंपनी करके पैसों का हेर फेर किया.

मेरे ख़याल से यही काला चेहरा मीडिया की असलियत है. चाहे आप माने या ना मानें तथाकथित निष्कच्छ चौथा खम्भा, बीमार, बहुत बीमार हो चुका है. इस स्वीकारोक्ति के साथ ही एक दूसरे को बचाने की कोशिशों का वैसा ही दौर शुरू होगा जैसा बरखा ‘राडिया’ दत्त को बचाने के लिए हुआ था. ये ल्युटेंस दिल्ली में करोड़ों के बंगलों में रहने वाले पत्रकारों की ईमानदारी को फिर से सवालों के घेरे में ले आता है.

के.वी.एल. नारायण राव के बयान में उन्होंने बताया कि विदेशी निवेश के नियमों के मुताबिक समाचार चैनल चलाने पर सिर्फ 29% का विदेशी निवेश आ सकता है. इसलिए एन.डी.टी.वी. ने पहले तो ऐसी कंपनियां बनायी जो अपना मकसद मनोरंजन बताती थी. इनमें सौ फीसदी तक विदेशी निवेश लिया गया. इस तरह यूनाइटेड किंगडम में बनाई गई मनोरंजन के उद्देश्य वाली कंपनी एन.डी.टी.वी. नेटवर्क पीएलसी के जरिये पैसा आना शुरू हुआ.

2007-08 के दौरान जब अमेरिका के एक बड़ी मीडिया नेटवर्क, एन.बी.सी.यू. (जो उस वक्त जी.ई. की एक सब्सिडियरी थी) ने व्यापार में पैसे लगाने की बात की तो एन.डी.टी.वी. इस प्रस्ताव के लिए तैयार था. चूँकि लम्बी वार्ता के बाद कंपनी अपने डच व्यापार के जरिये निवेश करना चाहती थी इसलिए इस काम के लिए नीदरलैंड में कंपनी स्थापित की.

जब चिदंबरम वित्त मंत्री थे तो एन.डी.टी.वी. ने कूपन बांड के जरिये करीब 682 करोड़ रुपये का विदेशी संस्थागत निवेश जुटाया. ये निवेश करने वाली आठ कंपनियां थी. इन आठ में से तीन केमन आइलैंड और एक ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड की कम्पनी थी.

इसके बारे में राव का कहना है कि वो इन कंपनियों के प्रतिनिधियों से हांगकांग, लन्दन और न्यू यौर्क में मिले थे. इन फर्जी कंपनियों के बारे में राव कहते हैं कि उनको कुछ नहीं पता. वैसे अपनी 2006-07 की वार्षिक रिपोर्ट में एन.डी.टी.वी. ने घोषित कर रखा है कि वो मनोरंजन, लाइफस्टाइल, इत्यादि की कंपनी है.

बाकी अगर आप सोच रहे थे कि मनोरंजन करने वाले माइम, अपने रंगे-पुते चेहरे के साथ एक समाचार चैनल में क्या कर रहे हैं? तो जनाब आप बहुत गलत भी नहीं सोच रहे थे. जैसा कि हम अक्सर कहा करते हैं हुज़ूर, सब माया है!

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