मप्र के दो बार मुख्यमंत्री रहे सुंदरलाल पटवा का निधन, प्रदेश में 3 दिन का राजकीय शोक

भोपाल. अविभाजित मध्य प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे सुंदरलाल पटवा (92) का बुधवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से भोपाल में निधन हो गया. वह 92 वर्ष के थे.

उनके निधन की खबर मिलते ही सीएम शिवराज सिंह चौहान अस्‍पताल पहुंचे. बुधवार शाम 4 बजे अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को भोपाल स्थित बीजेपी ऑफिस में रखा गया है.

देर शाम उनके पार्थिव शरीर को नीमच भेजा जाएगा, जहां गुरुवार दोपहर 2 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. पटवा के निधन पर मध्यप्रदेश में 3 दिन का राजकीय शोक का ऐलान किया गया है.

सुंदरलाल पटवा का जन्म मंदसौर जिले के कुकड़ेश्वर गांव में 11 नवंबर 1924 को हुआ था. वह पहली बार 20 जनवरी, 1980 से 17 फरवरी 1980 तक सीएम रहे. इसके बाद वे 5 मार्च, 1990 से 15 दिसंबर 1992 तक दूसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने.

पटवा 1941 से इन्‍दौर राज्‍य प्रजा मण्‍डल एवं 1942 से राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ से जुड़े. उसके बाद 1947 से 1951 तक संघ प्रचारक एवं 1948 से संघ आंदोलन में सात माह जेल यात्रा भी की.

1951 में जनसंघ की स्‍थापना के साथ ही इसके सक्रिय कार्यकर्ता रहे. 1957 से 1967 तक विधान सभा सदस्‍य एवं विरोधी दल के मुख्‍य सचेतक रहे. 1967 से 1974 तक जिला सहकारी बैंक के अध्‍यक्ष रहे.

1975 में म.प्र. जनसंघ के महामंत्री बने. आपातकाल के दौरान 27 जून, 1975 से 28 जनवरी, 1977 तक मीसा बंदी के रूप में जेल में रहे. उसके बाद 20 जनवरी, 1980 से 17 फरवरी, 1980 तक कुल 29 दिन पहली बार मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री बने.

उसके बाद सन 1990 के विधान सभा चुनाव में सदस्‍य निर्वाचित एवं 5 मार्च 1990 से 15 दिसंबर 1992 तक कुल 1017 दिन मुख्‍यमंत्री रहे. 1993 में पुन: विधान सभा सदस्‍य के लिए निर्वाचित हुए. 1997 में छिंदवाड़ा से लोकसभा उपचुनाव में विजयी और वाजपेयी सरकार में दो साल मंत्री भी रहे.

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