‘राहुल जी, ये तो बताओ कि हेलिकॉप्टर घोटाले में मोटा माल किसने खाया’

नई दिल्ली. नोटबंदी के मुद्दे पर आक्रामक होने की कोशिश करते राहुल गांधी को हर बार भाजपा तीखे सवाल पूछ कर निरुत्तर कर देती है. इस बार भी राहुल ने कांग्रेस के स्थापना दिवस पर बजाय अपनी पार्टी पर बोलने के, नोटबंदी और प्रधानमंत्री पर पाने भाषण को केंद्रित रखा.

[नकारात्मक राजनीति की मिसाल हैं राहुल गांधी : भाजपा]

फिर क्या था, भाजपा को मौका मिला कांग्रेस के पिछले दस साल के कुकर्मों को याद दिलाने का. भाजपा ने पलटवार करते हुए कांग्रेस और राहुल पर भ्रष्टाचारियों से सांठगांठ होने का आरोप लगाया.

इसके साथ ही भाजपा ने यूपीए के शासनकाल में हुए भ्रष्टाचार के मामलों की याद दिलाते हुए पूछा, ‘यूपीए में घोटालों का माल किसने खाया?’

भाजपा प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने देश छोड़कर बाहर रह रहे कारोबारी विजय माल्या को कांग्रेस का दोस्त करार दिया. साथ ही पूछा कि माल्या को किसने और क्यों बेल आउट पैकेज दिया?

राहुल पर भ्रष्टाचारियों से सांठगांठ का आरोप करने का आरोप लगाते हुए शर्मा ने कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष जनता को गुमराह कर रहे हैं. शर्मा ने कहा कि राहुल गांधी जहरीली जुबान बोलते हैं और पीएम पर काफी वक्त से निराधार और तर्कहीन आरोप लगा रहे हैं.

श्रीकांत शर्मा ने राहुल पर तीखा हमला करते हुए कांग्रेस की तुलना आम आदमी पार्टी से कर डाली और कहा कि कांग्रेस का केजरीवालकरण हो गया है. शर्मा के मुताबिक, राहुल चोरों का साथ दे रहे हैं, लेकिन देश झूठ बोलने वालों का साथ नहीं देता.

शर्मा ने कहा कि राहुल गांधी आरोपों में घिरे हुए हैं और उससे ध्यान हटाने के लिए बीजेपी को घेरने की कोशिश कर रहे हैं. श्रीकांत शर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मौतों पर राजनीति करती है.

श्रीकांत शर्मा ने कहा, राहुल गांधी आरोपों में घिरे हुए हैं और उससे ध्यान हटाने के लिए बीजेपी पर आरोप लगा रहे हैं. राहुल को बताना चाहिए कि चॉपर स्कैम में मोटा माल किसने खाया. चॉपर घोटाले की जांच राहुल गांधी के घर तक पहुंची है.

उन्होंने कहा कि नोटबंदी से हुई मौतों पर दुख है लेकिन कांग्रेस लोगों की मौत पर राजनीति करती है. कांग्रेस के शासन में ढाई लाख से ज्यादा किसानों ने खुदकुशी की, जबकि हम देश के किसान को सुरक्षा कवच दे रहे हैं.

उन्होंने राहुल से सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 2012 में कांग्रेस ने काले धन पर एसआईटी क्यों नहीं बनाई. अब लोगों के बीच राहुल गांधी की विश्वसनीयता नहीं बची है.

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