वैदिक प्लास्टर : विदेशी अपना रहे हैं हमारी भूली हुई तकनीकें

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दो प्रकार की सोच हैं दुनिया में-

1. मुझे तो बस धन कमाना है, ये दुनिया ये धरती जाओ भाड़ मे ये सोच पहले पश्चिमी सोच कहलाती थी लेकिन अब ये सोच बहुराष्ट्रीय न हो कर अंतर्राष्ट्रीय हो चुकी है.

2. मुझे तो बस धर्म कमाना है धन का क्या है. धर्म मतलब प्राणी मात्र की रक्षा. संपूर्ण जगत की रक्षा. ये सोच भारतीय सोच कहलाती थी जो अब लुप्त प्राय होती जा रही है.

यूरोपियन गोरे 15 वीं सदी में व्यापारी बन कर सारे विश्व में घूमने लगे थे. धीरे धीरे पूरे विश्व की उगंली पकड़ी, फिर पोहंचा पकड़ा ओर अंत में गर्दन पकड़ ली. फिर बनाना शुरु किया code of conduct जिसे हम नियम व कानून या वृहद् संदर्भ में संविधान कहते हैं. और वो code of conduct अमुमन पूरे विश्व में 15 वीं सदी से चली आ रही बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मन माफिक ही हैं.

चलो आज एक नियम, एक विषय पर्यावरण पर बात करते हैं. और एक बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अंतर्राष्ट्रीय हो चुके उत्पाद सीमेंट की चर्चा करते हैं.

सारा विश्व आज सीमेंट कंक्रीट में रहने पर विवश है. स्थानीय पर्यावरण की रक्षा करने वाली भवन निर्माण सामग्री सारे संसार से लुप्त प्राय हो चुकी. सीमेंट बनाने में जितना प्रदूषण होता है वह संसार के किसी भी उद्यम में नहीं होता. सीमेंट कैसे बनती है आप सबको पता है. कितना खनन, कितनी उर्जा, कितना कार्बन उत्सर्जन होता है ये हम सब को पता है.

सीमेंट फैक्ट्री के आसपास कोई भी वनस्पति जीवित नहीं रह पाती. इतना सब कुछ बर्बाद करने के बाद सीमेंट से जो भवन बनता है वो भी इंसान के रहने लायक नहीं बनता. वह भवन सर्दी में ठण्डी गुफा व गर्मी में गर्म भट्ठी बन जाता हैं. लेकिन हर देश में एक building code है, बड़े बड़े civil engineer हैं, नामी architect हैं. सब अंग्रेजी पढ़े लिखे विद्वान हैं.

तुझे क्या पता अणपढ़ जाट शिव दर्शन, सीमेंट का मकान नहीं तो बैंक का लोन नहीं. तू किसान अपने खेत से अपने जोहड़ से मिट्टी निकाल कर मिट्टी का घर बना लेगा या किसी नदी से रेत उठा लेगा तो तू पर्यीवरण के नियम तोड़ देता है. वो कंपनियां बड़े बड़े पहाड़ों का कचूमर निकाल कर रोड़ी, बजरी, क्रैशर व सीमेंट बना कर हवन कर रहीं हैं न कि कोई पर्यावरण प्रदूषण कर रही. वो कंपनियां तेरा विकास कर रही हैं मुरख जाट समझ ले.

बहुत सारी पर्यीवरण अनुकूल भवन निर्माण सामग्रियां है लेकिन उन के प्रयोग से साला पर्यावरण के नियमों का उलंघन हो जाता है.

है ना विचित्र लेकिन सत्य

खैर दुनिया को अब इस षडयंत्र का पता चल चुका है और अमेरिका जैसे विकसित देश में भी सीमेंट के खिलाफ आवाज उठने लगी है ओर लोग वहां Cob house व Thatched roof house को पसंद करने लगे हैं व status symbol मानने लगे हैं.

आज का विज्ञान earthen plaster व गौमेय के छुपे लाभों को जान चुका है ओर सीमेंट प्लास्टर के नुकसान भी. उन के  बारे में अगले लेख में लिखूंगा तब तक आप ये फोटो देखें.

– डॉ. शिव दर्शन मलिक
वैदिक भवन रोहतक (हरियाणा)

M- 9812054982

Website –
http://www.vedicplaster.com/

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