बुर्के से ही नहीं, प्यार, मोहब्बत, शादी से भी डर लगता है उन्हें

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दसवीं शताब्दी तक विश्व पटल पर दो सभ्यताएं अपने दबदबे के लिये लड़ रही थीं, मुस्लिम और क्रिश्चियन। अरब का दबदबा कम हो रहा था, उस समय तुर्की में उस्मान ने ऑटोमन डायनेस्टी की नींव डाली, जो आगे चल कर इस्लामी ताक़त का केंद्र बना और खिलाफत अरब से निकल कर तुर्कों के हाथ में आ गयी.

ऑटोमन एम्पायर के ही सुल्तान मैमथ ने कॉन्स्टेन्टाइन-6 को हरा कर कांसेटेंटिनोपल पर कब्ज़ा किया था, ये वो सपना था जो खुद प्रोफेट मोहम्मद ने देखा था.

इसी डायनेस्टी के दसवें सुलतान सुलेमान को सुलेमान द मेग्नीफिशियेन्ट और सुलेमान ‘कानूनी’ नाम से भी जाना जाता है, मतलब कानून देने वाला.

सुलेमान ने अपने शासन में इस्तांबुल को दुनिया के सबसे शानदार शहरों में शुमार करवा दिया.

कुल मिला कर ऑटोमन एम्पायर के इस काल को इस्लामी तारीख का गोल्डन पीरियड माना जाता है.

पर तारीख़ में सुलेमान को याद किये जाने की वहज और भी थी.

सुलेमान को अपनी ‘हरम’ की एक रशियन मूल की गुलाम रोक्सलेना से प्यार हो गया और परम्पराएं तोड़ते हुए सुलेमान ने रोक्सलेना से शादी कर ली.

ये इस्लामिक वर्ल्ड के लिये एक क्रांतिकारी क्षण था. सदियों पुरानी हरम की परंपरा को तोड़ा गया था. सभी मुस्लिम सुल्तान हरम में हज़ारो गुलाम औरतें रखते थे और इन्ही से पैदा हुये बच्चों में से अगला सुल्तान निकलता था.

देखने में ये क्रूर परंपरा लग सकती है पर एम्पायर को इसके फायदे थे.

यूरोपीय या अन्य जगहों पर युवराज ना होने पर डायनेस्टी के बिखरने का ख़तरा बना रहता था.

हरम सुल्तान पैदा करने की फैक्ट्री थे, कई ऑप्शन के बीच सुल्तान अपना वारिस चुन सकता था.

और इसी परंपरा ने ऑटोमन डायनेस्टी को लगातार दस महान सुल्तान दिये.

इस परंपरा तो तोड़ सुलेमान ने मुस्लिम समाज में भूचाल ला दिया. लोग कहने लगे रोक्सलेना ने जादू टोना करके सुल्तान को वश में किया हुआ है.

असल में लोग समझ ही नहीं पा रहे थे कि आखिर हज़ारों औरतों के हरम को छोड़कर कोई सुल्तान क्यों किसी एक औरत के साथ जीवन बिताना चाहेगा.

सुलेमान ने पहले अपनी औलाद मुस्तफ़ा, फिर बेजीद और चार औलादों को विद्रोह के जुर्म में मरवा दिया और रोक्सलेना का बेटा सलीम गद्दी पर बैठ अगला सुल्तान बना.

और इस दौर के बाद ऑटोमन एम्पायर कभी वो ऊंचाइयां नही देख पाया, धीरे धीरे दरकता रहा और प्रथम विश्व युद्ध के बाद, टर्किश नेशनलिस्ट लीडर मुस्तफ़ा कमाल पाशा के समय खिलाफत और सुलतान की पदवियाँ खत्म करने के साथ इस डायनेस्टी का अंत हो गया.

मुसलमान आज भी वो दौर याद करते हैं जब वो स्पेन तक राज किया करते थे और इस्तांबुल दुनिया के व्यापार का केंद्र होता था.

दुनिया की सबसे बड़ी ताकत से बदहाली तक पहुंचने की वजह आज भी बहुत से मुस्लिम समाज में सुलेमान का रोक्सलेना से प्यार और शादी करने के फैसले को मानते हैं और वो रोक्सलेना को कभी माफ नही कर पाये.

कल किसी खिलाड़ी ने अपनी पत्नी के साथ एक फोटो डाल दी, और लोग उबल पड़े. बहस हिजाब पर होने लगी.

असल में शादी, पत्नी, अर्धांगिनी, बेटर हाफ का कॉन्सेप्ट ही उनकी दुखती रग है जो जाने अंजाने में दुःख जाती है और दर्द झलक जाता है.

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