अभी इनको समझने में सालों लगेंगे आपको, बदलते नियमों में नहीं बदलती हवा में लगाइए अपना दिमाग

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बहुत पहले एक अंग्रेज़ी फिल्म देखी थी, नाम था Frozen. फिल्म की कहानी ज़िंदगी और मौत की लड़ाई में ज़िंदगी को हर हाल में जीत कर लाने की जिजीविषा पर थी.

तीन दोस्त बर्फीली पहाड़ियों पर बने एक पार्क में घूमने निकलते हैं… रात को पार्क बंद होने से पहले वे रोप वे में एक आख़िरी राउंड लगाने का सोचते हैं… हालांकि पार्क बंद होने का समय हो गया है फिर भी गार्ड इन तीनों की बात मान जाता है… ये तीन लोग अन्दर बर्फीले पार्क में रोप वे से बीच रास्ते पर पहुँचे हैं और आपस में बातें कर रहे हैं… अच्छा बताओ सबसे बुरी मौत कौन सी होती है… तीन दोस्तों में एक लड़की है और दो लड़के… उन दो में से एक का जवाब होता है सबसे बुरी मौत वो है जब आप ज़िंदा हो और कोई जानवर आपको ज़िंदा ही नोच नोच कर खा रहा है….

लड़की उसे झिड़क देती है… कि वो ऐसी डरावनी बात न करे….

उधर गार्ड की ड्यूटी बदलने का समय होने लगता है. नया गार्ड आता है तो वो उसे इत्तला दे देता है कि तीन लोग अभी पार्क में ही है… वो लोग लौट आये तो पार्क बंद कर देना..

इत्तफाक से तीन और लोग स्कीइंग करते हुए पार्क के गेट पर पहुँचते हैं तो गार्ड समझता है कि पहले वाला गार्ड इन्हीं तीनों के बारे में कह गया होगा… तो वो पार्क का मेन स्विच बंद कर बाहर से ताला लगाकर चला जाता है… अब चूंकि वीक एंड है तो पार्क अगले हफ्ते सोमवार को ही खुलेगा.. मतलब शनिवार रविवार बंद…

इधर मेन स्विच बंद होते ही रोप वे भी रुक जाता है…. रोप वे पर  बैठे तीनों दोस्त अपने गप्पों में लगे हैं… उन्हें लगता है किसी कारण से रुक गया होगा उनका झूला… लेकिन जब बहुत देर तक उनका झूला आगे नहीं बढ़ता तो वो चारों तरफ नज़र दौड़ाते हैं…. घुप्प अँधेरा और सन्नाटा… तब उन्हें डर लगना शुरू होता है कि कहीं कुछ तो गड़बड़ है…

वो खूब आवाज़ लगाते हैं… लेकिन उनकी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं होता वहां…. इस बीच ठण्ड बेहद बढ़ जाती है… एक दोस्त कहता है उसे ‘पी’ करना है… लड़की कहती है मुझे भी … कुछ देर कंट्रोल करने के बाद लड़का तो झूले से ही लघुशंका निवारण कर लेता है…. तब तक ये लोग आपस में हंसी ठिठोली ही कर रहे होते हैं… और लड़की से कहते हैं तुम भी कर लो…

लड़की कहती है, जी नहीं मैं कंट्रोल कर सकती हूँ…..

रात गहराने लगती है अब जंगल तरफ से जंगली जानवरों की आवाजें आने लगती है… तापमान तेज़ी से नीचे गिरने लगता है…. और इन तीनों की कुल्फी जमने लगती है…. अब इन लोगों को ये समझ आ जाता है कि गार्ड इन तीनों को भूल गया है और ये बर्फीली पहाड़ी पर मौत सी ठंडक में फंस गए हैं….

बहुत विचार करने के बाद भी वहां से निकलने का कोई उपाय इनको नज़र नहीं आता और इन लोगों की हालत डर और ठण्ड से बिगड़ने लगती है….
तभी तीनों में से एक कहता है मुझे ऊंचाई से कूदने की काफी प्रेक्टिस है… मैं एक काम करता हूँ.. यहाँ से नीचे कूद जाता हूँ और फिर गेट की तरफ जाकर किसी को मदद के लिए लेकर आता हूँ…

हालांकि झूला बहुत ऊंचा होता है फिर भी बहुत मना करने के बाद भी लड़का मानता नहीं…. और कूद जाता है…. नीचे धप्प की आवाज़ आती है…. बाकी दोनों नीचे झांककर देखते हैं तो नीचे कूदा हुआ लड़का लगभग रोते हुए बताता है कि ठण्ड और ऊंचाई के कारण घुटने उल्टी तरफ मुड़कर टूट गए हैं और वह अब हिल भी नहीं पा रहा…

नीचे उस अपाहिज की लाचारी पर रोने और अफ़सोस करने के अलावा ऊपर बैठे दोनों दोस्तों के पास और कोई चारा नहीं बचता….

तभी नीचे घायल पड़े लड़के के आसपास जंगली सियार मंडराने लगते हैं…. ऊपर से दोनों लोग अपने साथ लाई चीज़ें नीचे फेंकते हैं लेकिन उसका कोई असर सियारों पर नहीं होता….

इधर घायल लड़के पर जंगली सियार झूम जाते हैं और वो चिल्ला चिल्ला कर लड़की को कहता है तुम नीचे बिलकुल मत देखना… मैंने कहा था ना सबसे खतरनाक मौत क्या होती है… मुझे नहीं पता था मैं अपनी ही मौत के बारे में बता रहा हूँ…

लड़की उसको देख देख कर खूब रोती है लेकिन अपने दोस्त को बचा नहीं पाती… दूसरा लड़का उसकी आँखों पर हाथ रख उसे संभालने की कोशिश करता है…. नीचे से लड़के की आवाज़ आना बंद हो जाती है और जंगली सियार मुंह पर जीभ फेरते हुए लौट जाते हैं…

दोनों दोस्त सहमे सहमे से पूरी रात बिताते हैं…. सुबह धूप निकलती है लेकिन उनकी त्वचा अब फटने लगी है उससे खून निकलने लगा है…. दोनों आपस में दार्शनिक सी बातें करते हुए समय बिता रहे हैं…

इस बीच लड़के की आँख लग जाती है… रात भर से लघुशंका के दबाव को कंट्रोल किये बैठी लड़की की नियंत्रण सीमा ख़त्म हो जाती है और वो रोते हुए वहीं झूले पर अपनी पतलून में ही पेशाब कर देती है….

शायद उस लड़के को सियार द्वारा ज़िंदा खाया जाना भी मेरे अन्दर उतनी करुणा नहीं उपजा पाया था जितनी करुणा इस लड़की के पतलून गीला कर देने पर उपजती है…

दूसरे दिन दूसरा लड़का बड़ी मुश्किल से झूले से उतर पाता है लेकिन रात तक वो लौट कर नहीं आता….

आपको क्या लगता है ये इतनी लम्बी कहानी मैंने किसी फिल्म की समीक्षा करने के लिए सुनाई? नहीं जी… इस कहानी को आप नोटबंदी और cashless India के विरोधियों को ध्यान में रखते हुए पढ़िए….

अब पुराने नोट बंद हो गए…. कुछ लोग अपना धन बचाने के लिए झूले से ही कूद पड़े… ना नए नोट हाथ में आये, ना पुराने का कुछ हो पाया… उनको अपना ही काला धन जंगली सियार की तरह नोच नोच कर खा गया…

कुछ ऐसे भी हैं जो बैंक तक तो पहुँच गए लेकिन उसके आगे उनका क्या हश्र हुआ होगा हम अंदाजा लगा सकते हैं….

तीसरी बची वो लड़की… बहुत कंट्रोल किये रही… पूरी रात… लेकिन सुबह होते से ही बेचारी की पतलून गीली हो गयी…  फेसबुक पर आज भी जो नोटबंदी के विरोध में ऊलजलूल कहानियाँ और पोस्ट डाल रहे हैं ये वही लोग हैं जो खुद को बहुत नियंत्रित किये हुए बैठे थे…. लेकिन उनकी हर बात से उनकी फेसबुक वॉल गीली दिखाई देती है….

फिल्म में ये लड़की बहुत हाथ पैर मारती रही… बड़ी मुश्किल से झूले से उतर पाती है….  अपने दूसरे दोस्त की लाश भी देखी उसने जिस पर अभी तक सियार झूमे हुए थे…  सियारों से बचकर गेट तक आ पाती है…
फिर जैसे तैसे सड़क तक पहुँचती है… तो एक गाड़ी उसके पास आकर रुकती है… उसे उठाकर गाड़ी में बिठाया जाता है… उसकी जान बच जाती है…

अब भी समय है …. जान बचा लो… ये जो नोटबंदी को लेकर बार बार नियम बदले जा रहे हैं… वो आप ही के लिए हैं… उनका मज़ाक बनाने के बजाय… मौकों का सदुपयोग कर लो…..  …. ये मोदीजी हैं…. ये गांधीजी के चश्मे से लोगों से स्वच्छता अभियान भी चलवाते हैं… और यही मोदीजी है जो शिवाजी की मूर्ति के लिए पानी में भी नींव बना आते हैं….

अभी इनको समझने में आपको 20-25 साल और लगेंगे… इसलिए अपना दिमाग बदलते नियम में नहीं बदलती हवा में लगाइए….  क्योंकि मेरा देश बदल रहा है आगे बढ़ रहा है……

– माँ जीवन शैफाली

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