कारनामा-ए-कैलेंडर : दो बार पैदा हुए सर आइज़ैक न्यूटन

0
63

25 दिसंबर एक विशेष दिवस होता है. दरअसल 21 दिसंबर को उत्तरी गोलार्द्ध में दिन का प्रकाश सबसे कम समय के लिए होता है. इसे अयनांत या Solstice कहते हैं. 25 दिसंबर से दिन बड़ा और रात छोटी होने लगती है. इसीलिए भारत में इसे बड़ा दिन कहते हैं.

परन्तु कभी कभी कुछ चीज़ें हो के भी नहीं होतीं. जैसे कि 25 दिसंबर को सर आइज़ैक न्यूटन का जन्मदिन हो के भी नहीं था. दरअसल उनके समय दो कैलेंडर प्रचलित थे: पुराना जूलियन कैलेंडर और नया ग्रेगोरियन, जो आज हम इस्तेमाल करते हैं.

जूलियन और ग्रेगोरियन कैलेंडर में 10 दिनों का अंतर आता है. पुराने कैलेंडर के हिसाब से न्यूटन का जन्म क्रिसमस के दिन 1642 को हुआ था लेकिन जब इसे ग्रेगोरियन में बदलेंगे तो 4 जनवरी 1643 हो जायेगा.

मने एक आदमी 2 दिन ही नहीं बल्कि 2 साल पैदा हुआ. है न मजेदार! ये बिल्कुल वैसे ही है जैसे कुछ लोग अपना जन्मदिन साल में दो बार मना लेते हैं. एक हिंदी तिथि से घरवालों के साथ और दूसरा ग्रेगोरियन कैलेंडर से गर्लफ्रेंड के साथ!

भौतिकी इस ब्रह्माण्ड के सारे क्रियाकलापों को समझने की विधा है. जो कुछ भी हम देख सुन अथवा छू कर महसूस कर सकते हैं उसकी गणितीय व्याख्या भौतिकशास्त्र में की जाती है.

भौतिकी को ऐतिहासिक रूप से classical और modern physics में विभाजित किया गया है. Classical physics की शुरुआत न्यूटन के दिए नियमों से होती है.

ये थ्योरी रोजमर्रा की हर घटित होने वाली घटनाओं को समझा सकती है जिसमें बड़े द्रव्यमान वाली चीज़ें परस्पर क्रिया करती हैं एक दूसरे को प्रभावित करती हैं. इसमें साइकिल चलने से लेकर समुद्र में ज्वार भाटा तक शामिल है.

गुरुत्वाकर्षण भी बड़ी अजीब चीज़ है. न्यूटन के सर पे सेब गिरने की कथा तो आपने सुनी ही होगी. इस कहानी की कोई प्रामाणिकता नहीं है लेकिन प्राचीन भारत के विद्वान ब्रह्मगुप्त और आर्यभट द्वारा ग्रहों और धरती में मौजूद गुरुत्व नामक बल की चर्चा साफ़ तौर पर की गयी है.

न्यूटन ने कैलकुलस की खोज भी की थी. लेकिन ये खोज तो लिबनिट्ज़ ने भी स्वतन्त्र रूप से लगभग उसी समय की थी. बाद में पता चला कि 1114 AD में भास्कराचार्य ने पहली बार तात्कालिक गति (instantaneous velocity) का न सिर्फ सिद्धांत दिया बल्कि गणितीय सूत्र भी बताये थे जो कैलकुलस के आधारभूत सिद्धांत हैं.

सूर्य की परिक्रमा करते ग्रह कितने वेग से कितने समय में परिक्रमा पूरी कर लेंगे इसका पता योहानेस केप्लर ने लगाया था. न्यूटन बाबा ने इसके आधार पर वो बल ज्ञात किया जिससे सूर्य सब ग्रहों को अपनी तरफ खींचता है इसे गुरुत्वाकर्षण का inverse square law कहा जाता है.

गणित की तीन मूल शाखाएं: Analysis, algebra तथा geometry में से analysis की शुरुआत करने का श्रेय भी न्यूटन को जाता है. बाद में ये तीनों अन्तर्विषयक हो गए और आज गणितीय भौतिकी का काम इनके बिना चल ही नहीं सकता.

Philosophy of science के विद्वान ये भी मानते हैं कि न्यूटन की गणितीय दक्षता और भौतिकी के नियम जो उन्होंने सुझाये वे दार्शनिक रूप से आर्कमिडीज, अरस्तू और गैलिलियो से प्रेरित थे.

हाँ तो मैं ये कह रहा था कि कुछ चीज़ें हो के भी नहीं होतीं. जैसे न्यूटन की लगभग सभी खोज उनकी हो कर भी नहीं थीं.

दरअसल ये खोजने और श्रेय लेने देने का खेल पश्चिमी सभ्यता के लोगों ने ही शुरू किया. जो कुछ भी मानव हित में है वो सबका है. किसी का कॉपीराइट नहीं है. कोई भी वैज्ञानिक उपलब्धि पहले किये गये अनेक प्रयोगों का प्रतिफल होती है.

न्यूटन का योगदान भुलाया नहीं जा सकता. उनकी Mathematical Principles of Natural Philosophy नामक किताब जिसे हम Principia के नाम से जानते हैं मानव इतिहास के सबसे प्रतिष्ठित गणितीय विद्या के ग्रन्थों में से एक है. प्रो० सुब्रमण्यम चन्द्रशेखर ने इस पर टीका लिखी थी: Newton’s Principia for the Common Reader.

न्यूटन के गुरुत्व के सिद्धांत को और अधिक विस्तार देने वाले महान अल्बर्ट आइंस्टीन ने शायद सही कहा था कि हर अनुभव सापेक्ष होता है. आप हिंदी तिथि से घरवालों के साथ जन्मदिन मनाएं तो आपको एक मिनट एक घण्टा बराबर लगेगा जबकि ग्रेगोरियन कैलेंडर से गर्लफ्रेंड के साथ मनाएं तो एक दिन भी एक घण्टा जैसा महसूस होगा…

Beauty is in the eye of beholder my friends and nature is the most beautiful beholder of which we are an integral part.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY