शिवाजी की मूर्ति को फिजूलखर्च बताने वालों के घर में ज़रूर बुज़ुर्गों की कोई तस्वीर नहीं होगी!

जिन लोगों को 3600 करोड़ की मूर्ति महाराज शिवाजी की फिजूल खर्ची लग रही है, बताए –

घर में लगी स्वर्गवासी बुजर्गों की तस्वीर ख़राब होने पर उसको दुबारा बनवा फिजूल खर्च न करें, आखिर उनसे मिलेगा क्या??? सारे उबाल खाते लोगों के हित में जारी-

जिन लोगों को 3600 करोड़ की मूर्ति महाराज शिवाजी की फिजूल खर्ची लग रही है, बताए –

देश भर में लगी हज़ारों मूर्तियां गांधी बाबा की क्या फ्री में लगी थीं??? तब क्यों नहीं बोले

मायावती की खुद की मूर्तियां???? तब सब सही था???

26 जनवरी को झांकियों और अस्त्र शस्त्र के प्रदर्शन में करोड़ों खर्च हो रहे हैं हर साल,70 साल से फिजूल हैं क्या???

लोगों को बस विरोध करने से मतलब, मूर्तियां लगाई जाती हैं किसी विराट व्यक्तित्व को याद रखने, प्रेरणा लेने और उनका आभार व्यक्त करने को.

मायावती का किया इसलिए आलोचना का विषय था क्योंकि उन्होंने खुद अपनी मूर्तियां लगवा दीं, अगर सिर्फ काशीराम जी सुशोभित होते तो कोई अलोचना नहीं होती.

26 जनवरी का खर्च पूरे देश में जोश, साहस और प्रेरणा का संचार कर जाता है, जिसका मूल्य अनमोल है…

शिवाजी हमारे प्रेरणा स्रोत हैं और रहेंगे, बाकी जिसको इस बात से दिक्कत है सबसे पहले हॉल में जाकर 2 हज़ार खर्च कर फिल्म देखने की जगह उस पैसे से गरीबों को खाना खिला मिसाल कायम करें.

रेस्टोरेंट् में जाकर फिजूल खर्च कभी न करें.

और सबसे आवश्यक बात… चाहे 5 सौ की सही घर में टंगी अपने बुजुर्गों की तस्वीर ख़राब होने पर फेंक दे दुबारा बनवा के फिजूल खर्च न करें.

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