सर्वे : नोटबंदी से दिक्कतों के बावजूद देश के लोग प्रधानमंत्री के साथ, राहुल को नकारा

नई दिल्ली. बीती 8 नवंबर की मध्यरात्रि से चलन से बाहर हुए 500 और 1000 रूपए के पुराने नोटों के बाद उपजे हालात को लेकर सत्ता पक्ष और विरोधियों के अपने-अपने दावे हैं.

सत्ता पक्ष जहां इसे भ्रष्टाचार और काला धन के खिलाफ एक अहम कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे आम लोगों को परेशान करने वाले कदम के रूप में प्रचारित कर रहा है.

सोशल मीडिया पर भी लोगों की राय बंटी हुई है. मोदी विरोधियों को जहां आज भी बैंकों और एटीएम पर लंबी लाइने दिख रही हैं, वहीं मोदी समर्थक बमय फोटो इस दुष्प्रचार की पोल खोल रहे हैं.

इस बारे में हालांकि कोई दो राय नहीं कि लोगों को इस कदम से परेशानी तो हुई है लेकिन हकीकत सिर्फ इतनी ही नहीं.

अहम सवाल यह है कि सारी परेशानियों के बावजूद लोग विमुद्रीकरण को किस तरह ले रहे हैं. सवाल यह भी है कि उन्हें सरकार के दावों पर यकीन है या विपक्ष के आरोप पर.

इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए नोटबंदी के 42 दिन बाद सी वोटर ने 24 राज्यों के 419 लोकसभा क्षेत्रों और 897 विधानसभा क्षेत्रों में एक सर्वे कराया.

इस सर्वे से मिली जानकारी को अगर सच माना जाए तो यह सच कांग्रेस और खासकर राहुल गांधी के लिए किसी सदमें से कम नहीं है.

सर्वे के मुताबिक विमुद्रीकरण से होने वाली तमाम परेशानियों के बावजूद आम लोगों का प्रधानमंत्री मोदी में विश्वास बरकरार है, वहीं राहुल गांधी के आरोपों को लोग भरोसे लायक नहीं मानते.

नोटबंदी के साथ-साथ राहुल गांधी द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैं. अधिकांश लोग इस आरोप को आधारहीन बता रहे हैं.

सर्वे के मुताबिक, 82.7 प्रतिशत लोगों का मानना है कि मोदी पर लगे आरोप आधारहीन हैं. वहीं, सिर्फ 17.3 प्रतिशत लोग हैं जो इस आरोप को गंभीर मान रहे हैं.

हालांकि इस सर्वे में कहा गया है कि लोग भले पीएम मोदी के फैसले के साथ हैं, लेकिन अब वे मान रहे हैं कि दिक्कतें बढ़ी हैं और चाहते हैं कि हालात सामान्य हों.

सर्वे में शहरी, अर्ध-शहरी, ग्रामीण क्षेत्रों के निम्न आय वर्ग, मध्यम आय वर्ग और उच्च आय वर्ग के अलग-अलग उम्र के लोगों से कुछ सवाल किए गए.

कुल 57.7 प्रतिशत लोगों का यह मानना था कि वह राहुल पर भरोसा नहीं करते और उन्हें यह आरोप आधारहीन लगते हैं.

9.8 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें राहुल पर भरोसा भी है और मोदी पर लगाए आरोप भी सही हैं.

7.6 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे राहुल पर भरोसा तो करते हैं, लेकिन उनके आरोप को सही नहीं मानते.

वहीं 3.9 प्रतिशत वैसे लोग थे जो राहुल पर भरोसा नहीं करते, लेकिन मोदी पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप को सही मानते हैं.

सर्वे के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है. नोटबंदी पर प्रधानमंत्री के साथ होने के बावजूद लोग असुविधा से नाराज हैं.

ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर लोगों का मानना है कि गरीबों को अमीरों की अपेक्षा अधिक नुकसान हो रहा है.

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